Sunday, June 15, 2014

Paddolochan Biswas 12 hours ago कल पहली बार पिता माँ ताऊ ताई बेटा और गाँव के तमाम लोगो के समाधियो के पास रात भर सैकङो लोगॅ के साथ रहा।यादो के साथ।मौका था काली पूजा का और था ऋषिकेश का क्लासिकल भक्ति गायन का ।आगे क्या लिखुँ युँ समझ लिजिऎ अवतार आ रहे है और जा भी रहे है


कल पहली बार पिता माँ ताऊ ताई बेटा और गाँव के तमाम लोगो के समाधियो के पास रात भर सैकङो लोगॅ के साथ रहा।यादो के साथ।मौका था काली पूजा का और था ऋषिकेश का क्लासिकल भक्ति गायन का ।आगे क्या लिखुँ युँ समझ लिजिऎ अवतार आ रहे है और जा भी रहे है

काली पूजा मे बकरे की बली क्यो देते है और क्यो पँडित बकरा का सिर ले जाता है?

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