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Thursday, July 10, 2014

गांवों को इंटरनेट से जोडऩे के लिए 500 करोड़ रूपए का आवंटन

गांवों को इंटरनेट से जोडऩे के लिए 500 करोड़ रूपए का आवंटन

 गांवों को इंटरनेट से जोडऩे के लिए 500 करोड़ रूपए का आवंटन

नई दिल्ली : सरकार ने 'डिजिटल भारत' पहल के तहत 500 करोड़ रूपए  का आवंटन करने की घोषणा की है। इसके तहत गांवों में ब्रॉडबैंड नेटवर्क लगाया जाएगा और हार्डवेयर तथा भारतीय साफ्टवेयर उत्पादों के स्थानीय विनिर्माण को बढ़ावा दिया जाएगा। 
 

 'डिजिटल भारत' पहल के तहत राष्ट्रीय ग्रामीण इंटरनेट एवं प्रौद्योगिकी मिशन, सरकार गांवों में ब्रॉडबैंड की स्थापना पर ध्यान केंद्रित करेगी। हार्डवेयर व भारतीय साफ्टवेयर उत्पादों के स्थानीय विनिर्माण को प्रोत्साहन देगी। 

 जेटली ने संसद को सूचित किया ''साफ्टवेयर क्षेत्र के स्टार्टअप पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। गांवों में राष्ट्रीय ग्रामीण इंटरनेट एवं प्रौद्योगिकी मिशन सेवा तथा आईटी में प्रशिक्षण के लिए मैं 500 करोड़ रूपए आवंटित करने का प्रस्ताव करता हूं।'' 

एक अन्य कदम जिससे प्रौद्योगिकी फमो' को ज्यादा अवसर उपलब्ध होगा, वित्त मंत्री ने 100 स्मार्ट सिटी का प्रस्ताव किया है। इसके लिए सरकार 7,060 करोड़ रपये प्रदान करेगी। लघु व मझोले उपक्रमों की आमदनी बढ़ाने के लिए वित्त मंत्री ने कहा कि विनिर्माण इकाइयों को अपने उत्पाद रिटेल व ई कामर्स प्लेटफार्म के जरिये बेचने की अनुमति होगी।

सब्सिडी बोझ घटाना होगा: सी रंगराजन,बजट से कितने खुश बाजार और इंडस्ट्री

सरकार ने वित्त वर्ष 2015 के लिए वित्तीय घाटे का लक्ष्य 4.1 फीसदी रखा है। लेकिन सरकार के लिए इसे हासिल करने के लिए सब्सिडी बोझ घटाना होगा, ये कहना है कि प्रधानमंत्री आर्थिक सलाहकार समिति के चेयरमैन सी रंगराजन का। उन्होंने ने वित्तीय घाटे के लक्ष्य का स्वागत किया है। उनके मुताबिक वित्तीय घाटे का लक्ष्य आय पर निर्भर करेगा और आय को लेकर चिंताजनक स्थिति नहीं है।

बजटः कॉरपोरेट जगत की उम्मीदें कितनी पूरी

प्रकाशित Thu, जुलाई 10, 2014 पर 18:35  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

वित्तमंत्री ने आज उम्मीदों का बजट पेश किया। कोई बड़ा ऐलान तो नहीं हुआ लेकिन सभी वर्गों को खुश करने की कोशिश की गई। किसी को ज्यादा मिला तो किसी के पकवान में मीठा थोड़ा कम था- लेकिन कोई मायूस नहीं हुआ। अच्छे दिन का वादा करनेवाले मोदी के बजट में कुछ ठोस ऐलान हैं तो आगे इकोनॉमी को सुधारने का रोड मैप भी है।  इंफ्रा सेक्टर पर बड़ा फोकस किया गया है। रियल इस्टेट, हाउसिंग, पावर, और एग्रीकल्चर जैसे अहम सेक्टर को भी तवज्जो दी गई है। मोदी को सिंहासन में बिठाने वाले मिडिल क्लास को भी टैक्स छूट देकर बड़ी राहत देने की कोशिश की गई है। मोदी सरकार का बजट क्या इंडस्ट्री की उम्मीदों पर खरा उतरा है, इस पर सीएनबीसी आवाज़ की खास पेशकश।


एचएसबीसी इंडिया की चेयरपर्सन नैना लाल किदवई का मानना है कि रेट्रोस्पेक्टिव टैक्स पर सरकार का फैसला अनुमानित ही था। इन मामलों को जल्दी से सुलझाना संभव नहीं है लेकिन सरकार ने इसपर जांच की बात कही है जो अच्छा ही है। बजट में विनिवेश के ऊपर कोई ऐलान ना होने से थोड़ी निराशा है क्योंकि इसके लिए काफी ऐलान की उम्मीद थी और बाजार भी इसके लिए अनुकूल है। देश को नए बैंकों की जरूरत है और सरकारी पीएसयू बैंकों को मिलाने पर सैद्धांतिक मंजूरी मिलने से बैंकों के लिए अच्छा होगा। वित्त वर्ष 2017 से अकाउंटिंग के नए नियम जारी होने से भी सरकारी काम में पारदर्शिता आएगी।


बजट में कंपनी एक्ट पर तो नहीं लेकिन डीटीसी के ऊपर आश्वासन जरूर दिए गए हैं कि इसकी समीक्षा होगी। वहीं जीएसटी के ऊपर भी राज्यों के बीच सहमति बनाने की बात कही गई है जो सकारात्मक है। हालांकि ऐलान करने से ज्यादा इन कामों को पूरा करना ज्यादा मुश्किल है।


महिंद्रा एंड महिंद्रा के डायरेक्टर अरुण नंदा का कहना है कि बजट से काफी सारी उम्मीदें पूरी हुई हैं और आगे भी इस दिशा में काम होने की उम्मीद है। अपने पहले बजट में सरकार ने अच्छे दिनों का वादा पूरा करने की पूरी कोशिश की है। मैन्यूफैक्चरिंग कंपनियों को टैक्स छूट बढ़ाने से देश का इंडस्ट्रियल प्रोडेक्शन बढ़ेगा लेकिन इसमें काफी वक्त लगेगा। बजट की दिशा तो ठीक है तो लेकिन तुरंत ही देश की तस्वीर बदल जाएगी ऐसा नहीं है। डिफेंस में एफडीआई की सीमा बढ़ाकर 49 फीसदी करना बहुत बड़ा कदम है। डिफेंस में नीचे से शुरू करके ऊपर तक जाएंगे और बहुत सी बड़ी कंपनियां आकर यहां निवेश करेंगी। सालोंसाल मामले पेंडिंग रहने की कार्यपद्धति में बदलाव आएगा और इससे सेक्टर की हालत सुधरेगी। इसके अलावा डिफेंस में आगे चलकर और एफडीआई को मंजूरी दी जा सकती है।


आईसीआईसीआई बैंक की एमडी और सीईओ चंदा कोचर का कहना है कि बजट में काफी सकारात्मक ऐलान हुए हैं। रोड, पोर्ट, शिपिंग, इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए अच्छी पूंजी दी गई है। डिफेंस और इंश्योंरेंस में एफडीआई बढ़ाया गया है जो काफी समय से अपेक्षित था। इसके अलावा बैंकों को सीनियर बॉन्ड जारी करने की मंजूरी दी गई है जिससे बैंक पूंजी जुटा पाएंगे। बजट में सरकार का फोकस साफ है और ग्रोथ पर फोकस करना पॉजिटिव है। इस बजट को 10 में से 9 अंक दिए जा सकते हैं।


बीसीजी के एशिया पैसेफिक के चेयरमैन जन्मेजय सिन्हा का कहना है कि देश में संस्थागत और विदेशी निवेश नहीं आ रहा है जिसे आकर्षित करने के लिए इस बजट में कोशिश की गई है। डिफेंस और बीमा में 49 फीसदी विदेशी निवेश को मंजूरी देना इसी दिशा में बड़ा कदम है। इसके अलावा इस साल वित्तीय घाटे को 4.1 फीसदी के लक्ष्य हासिल करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है जो सरकार की प्रतिबद्धता को दिखाता है। रोड, पोर्ट, स्मार्ट सिटी, आईआईएम खोलने, आईआईटी खोलने और एजुकेशन पर खर्चा बढ़ाने की बात कहकर रोजगार को पैदा करने की भी कोशिश की है। रेलवे बजट से पहले ही रेल किराए बढ़ाकर सरकार ने अपना विजन साफ कर दिया था और इसे ही बजट में दिखाने की कोशिश की गई है।


बजट 2014: बाजार को क्या लगा अच्छा

प्रकाशित Thu, जुलाई 10, 2014 पर 15:47  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

मोदी सरकार का पहला बजट आम टैक्स पेयर के लिए अच्छी खबर लेकर आया है। अब सालाना 2.5 लाख तक की आमदनी पर कोई टैक्स नहीं लगेगा। 80सी के तहत टैक्स छूट की सीमा भी 1 लाख से बढ़ाकर 1.5 लाख कर दी गई है। साथ ही होम लोन पर मिलने वाली ब्याज छूट भी 1.5 लाख रुपये से बढ़ाकर 2 लाख रुपये कर दी गई है।


लगता है बाजार को भी बजट काफी पसंद आया था क्योंकि बजट भाषण के वक्त 300 अंको तक लुढ़क चुके सेंसेक्स ने 400 अंक की जोरदार मजबूती दिखाई थी। तो इंडस्ट्री और बाजार को वित्त मंत्री अरुण जेटली के बजट में क्या बातें अच्छी लगी और कौन सी उम्मीदें पूरी नहीं हो पाईं, आइए जानते हैं।


आनंद राठी फाइनेंशियल सर्विसेज के चेयरमैन आनंद राठी का कहना है कि इस बजट में बडी बारीकीयों से हर सेक्टर पर ध्यान दिया गया है। रियल एस्टेट, इंफ्रा और पावर सेक्टर को बढ़ावा दिया गया है। वहीं ट्रांसपोर्ट टुरिज्म सेक्टर के बारे में बात की गई है। एज्यूकेशन के मामले में स्कील डेवलपमेंट को भी बढ़ावा दिया गया है।   

इस बजट में कुछ प्रतिबंधों के कारण निवेश भले कम हो लेकिन बड़ी बात यह थी कि फिस्कल कंसोलिडेशन की तरफ वित्तमंत्री का शुरु से फोकस था। इसके अलावा महंगाई काबू में लाने की भी कोशिश की गई है और टैक्स छूट की सीमा बढ़ाकर आम जनता को भी राहत पहुंचाई है। जीएसटी इस साल के अंत तक नीचे लाने की कोशिश की जाएगी। एफडीआई बढ़ने और फंडफ्लो आने पर भारतीय बाजारों में ग्रोथ दिखाई देगी। मौजूदा बजट सभी स्तर पर बाजार के उम्मीदों पर खरा उतरा है।


मार्केट एक्सपर्ट संदीप सभरवाल का कहना है कि इस बजट में काफी सकारात्मक एलान किए गए है और इससे ग्रोथ बढ़ने और महंगाई मे कमी आने कि उम्मीद है। टैक्सपेयर्स को जो रियायते दी गई है उससे आम जनता को भी राहत मिली है। हाउसिंग और 80सी में जो रियायत दी गई है इससे सेविंग बढ़ेगी।


इक्विटीरश के कुणाल सरावगी का कहना है कि निफ्टी का चार्ट काफी अच्छा लग रहा है और इसमें ऊपरी रुझान बना हुआ है। जबतक निफ्टी 7500 के नीचे नहीं जाता तबतक मंदी आने की उम्मीद नहीं है। ऊपर में 7800 का स्तर पार होने पर बाजार दोबारा तेजी दिखाएगा।


बजट से कितने खुश बाजार और इंडस्ट्री


वित्त मंत्री अरुण जेटली ने सबकी उम्मीदों का बजट पेश कर दिया है और बाजार के साथ साथ इंडस्ट्री के जानकारों का मानना भी यही है कि ये बजट आगे की सोच को दिखाने वाला है। आइये इंडस्ट्री और बाजार के जानकारों से जानते हैं कि उनके मुताबिक इस बजट से क्या मिला है।


आईडीएफसी के मैनेजिंग डायरेक्टर राजीव लाल का कहना है कि इस बजट में इंफ्रास्ट्रक्चर सेगमेंट को काफी तवज्जो दी गई है जो अभी तक नजरंदाज किया जा रहा था। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना, भू जलमार्ग के लिए पूंजी, एनएचएआई का 8000 किलोमीटर सड़क बनाने का लक्ष्य इन सब बातों से इंफ्रा सेक्टर के लिए काफी अच्छे संकेत निकलकर सामने आ रहे हैं।


इन सब कदमों से इंफ्रास्ट्रक्चर सेगमेंट के लिए निवेश अवश्य आएगा। इसमें कुछ समय लग सकता है लेकिन घरेलू निवेश के साथ साथ विदेशी निवेश भी अवश्य बढ़ेगा। राजीव लाल ने इस बजट को 10 में से 8 अंक दिए हैं।


ब्लू ओशन कैपिटल एडवाइजर्स के निपुण मेहता का कहना है कि बाजार को जिस बजट का इंतजार था वो आ चुका है और बाजार की उम्मीदों के अनुरूप ही आया है। आज बाजार ने इससे तेजी की दिशा भी ली है। सरकार ने हाउसिंग सेक्टर को बढ़ावा देने के लिए काफी कदम उठाए हैं। सेविंग्स बढ़ाने के लिए जो कदम लिए हैं उनसे भी कुछ खास सेगमेंट जैसे हाउसिंग और रियल सेक्टर के लिए काफी अच्छी शुरुआत हो सकती है।


एमएंडएम के ऑटोमोटिव डिवीजन के ईडी और प्रेसिडेंट पवन गोयनका का कहना है कि बाजार में कोई बहुत बड़ा ऐलान ना होने के बावजूद सभी वर्गों के लिए काफी कुछ कहा गया है। डायरेक्ट टैक्स में कटौती की उम्मीद ना होने के बाद भी इनमें कमी की गई है जो काबिलेतरीफ है। इसके अलावा वित्तीय घाटा को भी काबू करने की बात कही गई है जिससे निवेशकों का भरोसा बाजार में बनेगा। इस बजट से ग्रोथ के लिए एक दिशा मिल रही है और सरकार की निवेशक को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्धता नजर आ रही है।


पवन गोयनका के मुताबिक इस बजट से इंडस्ट्री को अच्छे संकेत मिल रहे हैं और भरोसा है कि ज्यादा से ज्यादा निवेशक इंडस्ट्री में निवेश करने के लिए आगे आएंगे।


बीएसई के मेंबर दीपेन मेहता का कहना है कि बजट में कोई बहुत बड़ी घोषणा नहीं हुई है और कोई नए स्कीम, प्रोग्राम का ऐलान नहीं किया है। सब्सिडी के मोर्चे पर भी कुछ खास निकलकर नहीं आया है। सरकार अपने खर्चे और वित्तीय घाटे को नियंत्रित करने के लिए कहां से पैसा लाएगी इस पर स्पष्टता नहीं आई है। बजट में सभी सेक्टर के लिए कुछ ना कुछ देने की असफल कोशिश की गई है और किसी खास सेक्टर को उबारने के लिए कुछ नया नहीं है। मोदी बजट का जितना इंतजार था उसके विपरीत इस बजट को कुल मिलाकर बस ठीकठीक कहा जा सकता है।


सबसे ज्यादा फायदा एफआईआई को हुआ है और घरेलू निवेशकों के लिए कोई साफ ऐलान नहीं किया गया है। एफआईआई को पूरी छूट दी गई है कि वो जो भी निवेश करेंगे वो कैपिटल गेन्स में जाएंगे। लेकिन 80सी के तहत निवेश सीमा बढ़ाने को एक अच्छा कदम माना जा सकता है।


भारतीय बाजार विदेशी बाजारों के मुकाबले आकर्षक लग रहे हैं और इस बजट में एफआईआई को ही आकर्षित करने की कोशिश की गई है। बजट के बाद भी कोई नए स्टॉक और सेक्टर आकर्षक नहीं लग रहे हैं। हां तंबाकू इंडस्ट्री को थोड़ा धक्का जरूर लगा है जिससे इस सेक्टर में गिरावट देखी जा सकती है।


हीरानंदानी ग्रुप के निरंजन हीरानंदानी का कहना है कि हालांकि सरकार ने हाउसिंग सेक्टर और रियल एस्टेट सेक्टर के लिए काफी कुछ ऐलान किए हैं लेकिन इसके बावजूद कुछ कमियां रह गई हैं। चीन से हाउसिंग सेक्टर से मुकाबला करने के लिए अभी भी कुछ कदम उठाने की जरूरत है। सरकार ने इसके लिए शुरुआत जरूर की है और दिशा देने की कोशिश की है। 2.5 करोड़ घर बनाने के लिए काफी पूंजी की जरूरत है जिसकी उपलब्धता कहां से होगी इसके बारे में अभी स्पष्टता नहीं है।


हालांकि आरईआईटी का ऐलान होने से रियल्टी सेक्टर के लिए भारी पूंजी आएगी और बैंकों को भी रियल एस्टेट सेक्टर में पूंजी लगाने के लिए भरोसा मिलेगा। वित्त मंत्री अरुण जेटली के इस बजट को 10 में से 7 अंक दिए जा सकते हैं।


प्रभुदास लीलाधर की अमीषा वोरा का कहना है कि सरकार ने कई सेक्टर पर ध्यान देने की कोशिश की है। जैसे रियल एस्टेट सेक्टर के लिए आरईआईटी की बात कही है तो उससे रियल्टी सेक्टर को फायदा होगा और उसके कर्ज कम होंगे। रियल्टी सेक्टर के कर्ज कम होने से बैकों के एनपीए भी घटेंगे। सरकार ने इंफ्रा, हाउसिंग, रियल एस्टेट, पावर, एग्रीकल्चर जैसे कई महत्वपूर्ण सेक्टर के लिए अच्छे ऐलान किए हैं और इनका फायदा इकोनॉमी की ग्रोथ बढ़ने के रूप में आगे चलकर मिलेगा।

22 हजार करोड़ की रियायतों के साथ वोटरों का आभार, रिफॉर्म के लिए करें इंतजार

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22 हजार करोड़ की रियायतों के साथ वोटरों का आभार, रिफॉर्म के लिए करें इंतजार
नई दिल्‍ली
मोदी सरकार ने 22,200 करोड़ रुपये की कर रियायतों के साथ मध्‍यवर्गीय वोटरों को धन्‍यवाद दिया है। बजट में कोई कड़वी दवा नहीं है। बड़े आर्थिक सुधारों का इंतजार करना होगा। अलबत्‍ता महंगाई से जूझने और करने की इच्‍छा बहुत कुछ है लेकिन अभी ब्‍योरा तैयार नहीं है। पूरे बजट भाषण में बमुश्किल 8 ऐसी बड़ी घोषणाएं मिलती हैं जिनमें दूर की कुछ सूझ नजर आती है अलबत्‍ता इनमें बिग बैंग रिफॉर्म, कोई गेम चेंजर आइडिया नहीं है। 
 
बजट की अाठ बड़ी घोषणायें
 
1. आयकर में  रि‍यायत
  • इनकम टैक्स से छूट की सीमा दो लाख रुपए से बढ़ा कर 2.5 लाख रुपए की गई। इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 80 सी के तहत छूट की सीमा 1.5 लाख रुपए की गइ और होम लोन ब्‍याज पर कर छूट सीमा 1.5 लाख रुपये 2 लाख रुपये कर दी गई है।  
असर : महंगाई के मारे मध्‍य वर्ग को राहत मिलेगी। बचत पर रियायत के जरिेये  ईएलएसएस, एनएससी, यूलिप, ईपीएफ, पीपीएफ, जीपीएफ, एनपीएस आदि में बचत बढ़ेगी। होम लोन लेने को प्रोत्‍साहन मिलेगा।  
 
2. कृषि क्षेत्र के लिए पैकेज   
  • 1000 करोड़ रुपये की प्रधानमंत्री किसान सिंचाई योजना, नेशनल कॉमन मार्केट, महंगाई रोकने के लिए 500 करोड़ रुपये का मूल्य स्थिरीकरण कोष, किसानों को 100 करोड़ रुपए का हेल्थ कार्ड और कृषि भंडारण के लिए 5000 करोड़ रुपये के साथ बजट में एक मजबूत एग्री पैकेज दिखता है। 
असर 
सिंचाई पर खर्च की वापसी हुई है अलबत्‍ता सिंचाई सुविधायें राज्‍यों  के हाथ हैं। नेशनल कॉमन मार्केट से बिचौलियों को खत्‍म करके नेशनल मंडी को बढ़ावा मिलेगा। मूल्य स्थिरीकरण कोष की मदद से राज्य सरकारें जरूरी सामान बाजार से खरीदकर उन्हे रियायती दरों पर उपभोक्ताओं को बेचेंगी। उन्हे इस फंड के तहत सब्सिडी दी जाएगी।
 
3.. 10,000 करोड़ रुपये का स्‍टार्ट अप  फंड  
छोटे कारोबारि‍यों और युवा उद्य‍मियों को मिलेगा अपने कारोबार श्‍ुारु करने के लिए वेंचर कैपिटल, इक्विटी और सस्‍ते कर्ज, रिस्‍क कैपिटल मिलेगी। 
असर 
रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और युवा उद्यमि‍यों को कारोबार करने के लि‍ए प्रोत्‍साहन मि‍लेगा। अलबत्‍ता सीड कैपिटल व वेंचर कैपिटल देने वाली अन्‍य सरकारी संस्‍थायें भी सक्रिय हैं। 
 
4- शहरों के वि‍कास पर फोकस 
  • सात शहरों में स्मार्ट इंडस्ट्रियल सिटी शहरी नवीनीकरण कार्यक्रम के तहत पीपीपी मॉडल के जरिए काम किया जाएगा। पीपीपी मॉडल के जरिए कम से कम 500 आदर्श शहर बनाए जाएंगे। टियर टू और थ्री सिटी में पीपीपी मॉडल से हवाई अड्डों का निर्माण होगा
असर
रियलिटी उद्योग और कंस्‍ट्रक्‍शन को बढ़ावा। स्मार्ट औद्योगिक सिटी में वे सारी सुविधा मिलेंगी जो किसी भी उद्योग को जरूरत होती है। रोजगार सृजन करने में भी ये शहर योगदान करेंगे। हालांकि शहरों के नि‍र्माण में पीपीपी मॉडल के साथ पिछला अनुभव कुछ खास बेहतर नहीं रहा है। ऐसे में इस घोषणा का क्रियान्वयन संदेह के घेरे में है। टियर टू और थ्री सिटी में हवाई अड्डों के निर्माण की योजना सफल हुई तो इसका असर देखने को मिलेगा।
 
5. सस्‍ते मकानों के लिए 4000 करोड़ रुपये 
  • ससते मकानों के लिए 4000 करेाड़ रुपए रखे गए हैं। यह पैसा कैसे मिलेगा यह स्‍पष्‍ट नहीं है। नेशनल हाउसिंग बैंक को 12000 करोड़ रुपये मिलेंगे। 
असर :
देश में करीब 2.5 लाख घरों की कमी है, जिसमें से 90 फीसदी घर कम कीमत आय वर्ग को चाहिए। ऐसे में 4000 करोड़ की रकम बहुत ही कम है। इस रकम से मोदी सरकार सभी को घर देने के सपने को पूरा नहीं कर सकती है।

6. बीमा व डिफेंस में विदेशी निवेश 
  • डिफेंस में 49 प्रतिशत तक एफडीआई लाया जाएगा। बीमा क्षेत्र में विदेशी निवेश 26 फीसदी से बढ़ाकर 49 फीसदी हुआ।
असर : रक्षा क्षेत्र के लिए विदेशी निवेश खोला जाना बड़ा फैसला है। इससे देश में ज्यादा विदेशी मुद्रा आ सकेगी। देश की रक्षा क्षेत्र के लिए आयात पर निर्भरता कम होगी। बीमा क्षेत्र में विदेशी निवेश की सीमा बढ़ने से विदेशी कंपनियां का रुझान देश में बढ़ सकेगा। इससे पहले 26 फीसदी से ज्यादा निवेश नहीं कर सकती थी कंपनियां। बीमा क्षेत्र में कंपटीशन बढ़ेगा जिससे ग्राहकों के लिए बेहतर प्रोडेक्ट बाजार में आ सकेंगे। बीमा क्षेत्र से जुड़ी कंपनियां जैसे रिलायंस कैपिटल, आदित्य बिरला नुवो, मैक्स इंडिया को फायदा होगा।
 
7- लघु उद्योगों के लिए पैकेज 
  • एमएसएमई की परिभाषा बदलेगी और निवेश सीमा बढ़ेगी। छह नए टेक्सटाइल क्लस्टर्स बनाने की भी बात कही गई। छोटे कारोबारि‍यों के लि‍ए पेमेंट बैंकों को शुरू कि‍या जाएगा। एसएमई के लिए कारोबार से आसानी से निकलने के लिए नया बैंकरप्सी फ्रेमवर्क डेवलप किया जाएगा।
असर 
एमएसएमई की परिभाषा बदलने मौजूदा 2.6 करोड़ एमएसएमई की संख्या में इजाफा होगा। साथ ही देश में निर्माण गतिविधियां भी तेजी से बढ़ेंगी। रोजगार के नए अवसर भी प्राप्त होंगे। देश में माइक्रो इंडस्ट्री के लिए मौजूदा सीमा 25 लाख, लघु उद्योग के लिए 5 करोड़, मध्यम उद्योग के लिए 10 करोड़ है।

8; राष्‍ट्रीयकृत बैंकों के लिए  8000 करोड़ रुपए की पूंजी 
  • सरकारी बैंकों को वि‍त्‍तीय जरूरतें पूरी करने के लि‍ए सरकार की ओर से 8,000 करोड़ रुपए मि‍लेंगे। इसके अलावा, सरकारी बैंकों के शेयरों को बेचने की बात कही गई है।
असर 
पीएसयू बैंकों की एसेट क्‍वालि‍टी में सुधार आएगा। वहीं, उनकी वि‍त्‍तीय हालत भी बेहद होगी। बैकों के विनिवेश का रासता भी खुला है हालांकि सरकार इन पर स्‍वामित्‍व में बड़ी कमी नहीं करेगी। 

अब विदेशी निवेश से पूरा होगा सस्‍ते घर का सपना



नेशनल हाउसिंग बैंक को 12 हजार करोड़ रुपए

बजट में नेशनल हाउसिंग बैंक को 12 हजार करोड़ रुपए दिए गए हैं। इसकी वजह से भावी ग्राहकों को कम कीमत के घर के लिए सस्ते कर्ज मिल सकेंगे। इसका व्‍यापक असर आने वाले दिनों में रियल एस्‍टेट सेक्‍टर पर देखने को मिलेगा। कम ब्‍याज दर पर लोन मिलने से घर खरीददारों की संख्‍या में इजाफा होगा। हालांकि, यह रकम बहुत ही कम है। 125 करोड़ की आबादी के इस देश में शहरी जनसंख्‍या काफी तेजी से बढ़ रही है। शहरों में घर की मांग भी उसी तेजी से बढ़ रही है। उसको देखते हुए यह रकम काफी नहीं है।
 
पीपीपी मॉडल से 500 आदर्श सिटी का निर्माण

शहरी नवीनीकरण कार्यक्रम के तहत पीपीपी मॉडल के जरिए काम किया जाएगा। बजट में पीपीपी मॉडल के जरिए कम से कम 500 आदर्श सिटी बनाने की बात कही गयी है। लेकिन, ये घोषणा यह नहीं बताती कि इस लक्ष्य को कैसे पूरा किया जाएगा। पीपीपी मॉडल के साथ पिछला अनुभव कुछ खास नहीं रहा है। ऐसे में इस घोषणा का क्रियान्वयन संदेह के घेरे में है।

आरआईटीएस ट्रस्ट पर टैक्स छूट

सरकार ने आरआईटीएस ट्रस्‍ट पर टैक्‍स छूट देने को कहा है। यह रियल एस्‍टेट सेक्‍टर को नई ऊंचाई पर ले जाने के लिए सबसे कारगर उपाय सिद्ध होगा। फंड की कमी से जूझ रहे इस सेक्‍टर को सरकार ने बड़ी राहत दी है। इस ट्रस्‍ट पर टैक्स छूट मिलने से छोटे निवेशक भी रियल एस्टेट में निवेश का मौका पा सकेंगे। विदेशी निवेश्‍ाक भी इस ट्रस्‍ट के माध्‍यम से रियल एस्‍टेट सेक्‍टर में निवेश कर पाएंगे। इसका फायदा डेवलपर्स के साथ घर खरीददार को भी मिलेगा। प्रोजेक्‍ट को तय समय पर पूरा करने में मदद मिलेगी। वहीं घर खरीददार को समय पर उनका घर मिलेगा।

होम लोन पर टैक्स छूट

बजट में होम लोन पर मिलने वाली छूट की सीमा बढ़ा दी गई है। इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 24 के तहत पहले 1.5 लाख रुपए पर ब्‍याज छूट को बढ़ा कर 2 लाख रुपए कर दिया गया है। इसके अलावा ग्रामीण आवास की जरूतर को पूरा करने के लिए 8000 करोड़ रुपए और शहरी आवास की जरूरत को पूरा के लिए 4000 करोड़ रुपए आवंटित किए गए है। कम कीमत के घरों के निर्माण में एफडीआई की अनुमति और 100 नए स्‍मार्ट शहरों के लिए 7060 करोड़ रुपए भी बजट में आवंटित किए गए है। 

हवाई अड्डों का निर्माण

पीपीपी मॉडल से टियर टू और थ्री शहरों में हवाई अड्डों का निर्माण होगा। अभी यह कहना जल्‍दबाजी होगा कि यह मॉडल कितना सफल होगा है क्योंकि निवेशक छोटे शहरों में पैसा लगाने से कतराएंगे। यदि योजना सफल हुई तो इसका बड़ा व्‍यापक असर देखने को मिलेगा। छोटे शहरों में निवेश आने से विकास तेजी से होगा। कनेक्टिवटी अच्‍छी होने से शहर की तस्वीर बदलेगी। डेवलप हो रहे एयरपोर्ट के आसपास नए शहर डेवलप हो सकते हैं। इससे इन छोटे शहरों में प्रॉपर्टी की कीमत में इजाफा होगा।

बजट 2014: कितना बचेगा आपका टैक्स

बजट 2014: कितना बचेगा आपका टैक्स


सिगरेट महंगी, टीवी सस्ताः जानिए, मोदी के पहले बजट से आपको क्‍या मिला
प्रकाशित Thu, जुलाई 10, 2014 पर 20:24  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

मोदी सरकार के पहले बजट से सभी बड़ी उम्मीदें लगाएं बैठे थे, ऐसे में सरकार ने आम आदमी को टैक्स छूट के रूप में बड़ा तोहफा दिया है। बजट 2014 में जहां टैक्स छूट 2.5 लाख रुपये तक की आमदनी टैक्स फ्री कर दी गई है, वहीं 80 सी के तहत मिलने वाली टैक्स छूट की सीमा को भी बढ़ा दिया है।


वहीं अलग-अलग योजनाओं में 80 सी के तहत अब 1.5 लाख रुपये तक के निवेश पर टैक्स छूट का फायदा मिलेगा। हालांकि टैक्स दरों में कोई बदलाव नहीं किए गए हैं। वित्त मंत्री के इन चंद कदमों से क्या वाकई बचत करने वालों के अच्छे दिन आ गए, टैक्स छूट में दी गई ये रियायत कितनी बड़ी है, इन मुद्दों पर लेंगे एक्सपर्ट्स की राय।


मोदी सरकार के पहले बजट में आम आदमी को राहत देने की कोशिश की गई है। अब 2.5 लाख रुपये तक की सालाना आय पर आयकर नहीं लगेगा। इसके अलावा वरिष्ठ नागरिकों (सीनियर सिटीजन) के लिए आयकर छूट सीमा 3 लाख रुपये की गई है। आयकर छूट की सीमा बढ़ने से टैक्स बोझ में 5000 रुपये की कमी आएगी। 

सेक्शन 80सी के तहत निवेश पर टैक्स छूट सीमा 1 लाख रुपये से बढ़ाकर 1.5 लाख रुपये कर दी है। साथ ही होमलोन के ब्याज पर बड़ी छूट भी दी है। अब 1.5 लाख रुपये के बजाए 2 लाख रुपये तक के होमलोन के ब्याज पर टैक्स छूट मिलेगी। पीपीएफ में निवेश की सीमा बढ़ाकर 1.5 लाख रुपये हुई है।


फाइनेंशियल प्लानर अर्णव पंड्या का कहना है कि फाइनेंशियल प्लानिंग के नजरिए से देखा जाएं तो इन छोटे छूट से कोई ज्यादा बदलाव आने की उम्मीद नहीं है। आम जनता पर महंगाई का इतना बोझ पड़ता है कि वो बचत नहीं कर पाते हैं। अतिरिक्त बचत करना आम जनता के लिए मुश्किल होता जा रहा है।


80 सी लिमिट को पूरा करने के लिए जरूरी नहीं कि लोग ज्यादा बचत कर पाएंगे। क्योंकि अब भी महंगाई बहुत ज्यादा है और लोगों के लिए बचत करना मुश्किल है। दूसरी तरफ ब्याज दरें भी काफी ज्यादा है। पीपीपएफ में निवेश की सीमा 1 लाख रुपये बढ़ाकर से 1.5 लाख रुपये कर दी गई है। लिहाजा जिनका लंबी अवधि के लिए निवेश करने का नजरिया हो और लंबी अवधि का फायदा उठाना हो तो पीपीएफ अच्छा विकल्प होगा। फाइनेंशियल प्लानिंग के हिसाब से आपको अपनी बचत का एलोकेशन करना चाहिए।


टैक्स गुरु सुभाष लखोटिया के मुताबिक आयकर पर टैक्स छूट की सीमा 2 लाख रुपये से बढ़कर 2.5 लाख रुपये हुई, 80सी के निवेश पर छूट 1 लाख रुपये से 1.5 लाख रुपये हो गई और होमलोन ब्याज पर छूट 1.5 लाख रुपये से बढ़ाकर 2 लाख रुपये की गई है जिससे सभी वर्ग के करदाताओं को फायदा देगा। जिन लोगों की इनकम 30 फीसदी से ज्यादा के स्लैब में आती है उनके लिए करीब 30-35,000 रुपये की टैक्स की बचत होगी। इन सबको देखते हुए अच्छे दिन आने की आशा तो पूरी हो गई है लेकिन वेतनभोगी कर्मचारियों के लिए कोई भी अतिरिक्त फायदा नहीं हुआ है।


वित्त मंत्री चाहते तो आम आदमी को और राहत दे सकते थे। टैक्स में कमी, विदेशों से भारत के पैसों को लाना, ब्लैक मनी, टैक्स चोरी करने वाले लोगों के खिलाफ कोई कड़े कदम उठाएं जाते तो ज्यादा फायदेमंद हो सकता था।


अब होम लोन, सेविंग्‍स के साथ 6 लाख रु. तक की इनकम होगी टैक्‍स फ्री

  • होम लोन के ब्‍याज पर कर छूट बढ़ी
इस बजट में इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 24 के तहत होम लोन के ब्याज की अदायगी पर टैक्स से छूट की अधिकतम सीमा दो लाख रुपए की गई। इस प्रावधान से लोगों को कर बचाने में मदद मिलेगी। पहले यह सीमा 1.5 लाख रुपए थी। 
  • सेक्शन 80 सी के तहत विभिन्‍न बचत पर भी बढ़ी छूट की सीमा
इस बजट में पीपीएफ में निवेश की अधिकतम सीमा को एक लाख रुपए से बढ़ा कर डेढ़ लाख रुपए कर दिया गया है। अब इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 80 सी के तहत 1.5 लाख रुपए की बचत पर कर छूट मिलेगी। इसकी वजह से लोग और अधिक बचत कर सकेंगे। इस सेक्शन के तहत ईएलएसएस, एनएससी, यूलिप, ईपीएफ, पीपीएफ, जीपीएफ, एनपीएस आदि में बचत को शामिल किया जाता है। इसका मतलब यह है कि लोग इन विकल्पों में अधिक बचत कर सकेंगे। पहले सेक्शन 80 सी के तहत छूट की सीमा एक लाख रुपए होगी।
 
छह लाख तक की आमदनी पर कोई टैक्स नहीं
 
अगर किसी व्यक्ति की आमदनी छह लाख रुपए है और वह ऊपर बताई गई तीनों रियायतों का पूरा इस्तेमाल करता है, तो उसे कोई टैक्स नहीं देना पड़ेगा।
 
बजट से कितना बचेगा आपका टैक्स 
 
अगर आपकी सालाना आमदनी तीन लाख रुपए है-
 
 पूर्व स्थिति अब क्या होगा
टैक्सेबल इनकम
एक लाख रुपए50,000 रुपए
टैक्स 10,000 रुपए5,000 रुपए
सेस 300 रुपए150 रुपए
कुल टैक्स 10,300 रुपए5,150 रुपए
 
अगर आपकी सालाना आमदनी छह लाख रुपए है-
 
 पूर्व स्थिति अब क्या होगा
टैक्सेबल इनकमचार लाख रुपए 3.50 लाख रुपए
टैक्स
50,000 रुपए45,000 रुपए
सेस 1500 रुपए1350 रुपए
कुल टैक्स 51,500 रुपए46,350 रुपए
अगर आपकी सालाना आमदनी 11 लाख रुपए है-
 
  पूर्व स्थितिअब क्या होगा
टैक्सेबल इनकम 9 लाख रुपए8.5 लाख रुपए
टैक्स 1.6 लाख रुपए1.55 लाख रुपए
सेस 4,800 रुपए4,650 रुपए
कुल टैक्स 1,64,800 रुपए1,59,650 रुपए
 
यानि आप देख सकते हैं कि बजट की नई रियायतों से हर टैक्स स्लैब में आने वाले टैक्सपेयर को 5,150 रुपए की बचत होगी।
 
ये हैं आयकर के नए स्लैब
 
आय टैक्‍स दर 
Upto Rs.2,50,000 Nil
Rs. 2,50,001 to Rs. 5,00,000 10%
Rs. 5,00,001 to Rs. 10,00,00020%
Above Rs. 10,00,000  30%
 
सीनियर सिटीजन: 60 वर्ष से अ‍धिक 
 
Upto Rs.3,00,000 Nil
Rs. 3,00,001 to Rs. 5,00,000 10%
Rs. 5,00,001 to Rs.10,00,00020%
Above Rs. 10,00,000  30%
 
 
सीनियर सिटीजन - 80 वर्ष से अधिक 
Upto Rs. 5,00,000  Nil
Rs. 5,00,001 to Rs. 10,00,00020%
Above Rs. 10,00,000 30%
 

Full Speech: Arun Jaitley’s maiden Union Budget

Full Speech: Arun Jaitley's maiden Union Budget

Union Finance Minister Arun Jaitley with MOS for Finance Nirmala Sitharaman and officials outside Finance Ministry. (Source: PTI)Union Finance Minister Arun Jaitley with MOS for Finance Nirmala Sitharaman and officials outside Finance Ministry. (Source: PTI)

Union Finance Minister Arun Jaitley with MOS for Finance Nirmala Sitharaman and officials outside Finance Ministry. (Source: PTI)Union Finance Minister Arun Jaitley with MOS for Finance Nirmala Sitharaman and officials outside Finance Ministry. (Source: PTI)

Union Finance Minister Arun Jaitley with MOS for Finance Nirmala Sitharaman and officials outside Finance Ministry. (Source: PTI)Union Finance Minister Arun Jaitley with MOS for Finance Nirmala Sitharaman and officials outside Finance Ministry. (Source: PTI)
Union Finance Minister Arun Jaitley with MOS for Finance Nirmala Sitharaman and officials outside Finance Ministry. (Source: PTI)Union Finance Minister Arun Jaitley with MOS for Finance Nirmala Sitharaman and officials outside Finance Ministry. (Source: PTI)

Finance Minister Arun Jaitley presented his maiden budget of the BJP-led NDA government amid high expectations from common man to macro business players of the country. Jailetly in his budget left income tax rates unchanged while promising not to bring tax changes with retrospective effect.

Here's the full text of the speech:

Madam Speaker,
I rise to present the Budget for the year 2014-15.

I. STATE OF THE ECONOMY

2. The people of India have decisively voted for a change. The verdict represents the exasperation of the people with the status-quo. India  unhesitatingly desires to grow. Those living below the poverty line are anxious to free themselves from the curse of poverty. Those who have got an opportunity to emerge from the difficult challenges have become aspirational. They now want to be a part of the neo middle class. Their next generation has the hunger to use the opportunity that society provides for them. Slow decision making has resulted in a  loss of opportunity. Two years of sub five per cent growth in the Indian economy has resulted in a challenging situation. We look forward to lower levels of inflation as compared to the days of double digit rates of food inflation in the last two years. The country is in no mood to suffer unemployment, inadequate basic amenities, lack of infrastructure and apathetic governance.

CLICK HERE FOR FULL SPEECH

http://pib.nic.in/archieve/others/2014/jul/gbEngSpeech.pdf

धर्म, राजनीति और पूंजी के बरमुडा त्रिभुज में कत्ल की इस रात की कोई सुबह नहीं!

धर्म, राजनीति और पूंजी के बरमुडा त्रिभुज में कत्ल की इस रात की कोई सुबह नहीं!


पलाश विश्वास

7700 के पार निफ्टी, सेंसेक्स 440 अंक उछला

मोदी सरकार का पहला बजट बाजार को खुश कर गया है। सेंसेक्स-निफ्टी 1.75 फीसदी चढ़े हैं।


फिर वही विकास का कामसूत्र।फिर वही योगाभ्यास।फिर वही वैदिकी मंत्र।इस कूटिल सेक्सी तंत्र यंत्र मंत्र के कूट रहस्य का खुलासा रियल टाइम में असंभव है।खास बात यह है कि मलाईदार तबके की सेहत और जेबों का खास ख्याल रखा गया है और चादर से बाहर पैर न फैलाने के ऐलान के बावजूद नौकरीपेशा,कारोबारी लोगों को ढाई लाख तक की आय पर कोई इनकाम टैक्स न देना पड़े,इसका इंतजाम कर दिया गया है।अपढ़,अदक्ष जनगण के विकास के मंत्रोच्चार के लिए देशी विदेशी पूंजी प्रवाह को निर्बाध निरंकुश बनाने और छिनाल संस्कृति को छइया छइया करके कार्निवाल का माहौल जमजमाट कर दिया गया है।ब्राजील के हारने से दुःखी और अर्जेंटीना के लिए प्रार्थनारत क्रयशक्ति संपन्न जनगण और कारपोरेट मीडिया के लिए यह बजट नमोमय भारत का भूदान यज्ञ है।


इस भूदान यज्ञ के तहत बजट में सौ स्मार्ट नगरों के लिए 7060 करोड़ रुपए का प्रावधान भी किया गया है जो शैतानी औद्योगिक गलियारों और हीरक बुलेटी चतुर्भुज के मुताबिक है।यानी देहात के सर्वनाश को सर्वोच्च प्रथमिकता दी गयी है और कृषिजीवी भारत के मृत्यु परवाने पर दस्तखत है यह केसरिया कारपोरेटबजट।


गौरतलब है कि देश की अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने का संकल्प व्यक्त करते हुए नरेंद्र मोदी सरकार ने आज अपने पहले बजट में विदेशी निवेश को सरल बनाने की अनेक घोषणाएं की और कालेधन को वापस लाने के प्रति प्रतिबद्धता दोहराई।


विनिवेश का रोडमैप चूंकि पहले से तैयार है और उस पर तेजी से अमल भी हो रहा है,इस सिलसिले में खास खुलासा नहीं हुआ,जिससे प्रतिकूल असर होता और इस सिलसिले में वित्तमंत्री ने तथ्यों और सूचनाओं को सार्वजनिक करने से परहेज किया है।

लेकिन पीपीपी गुजरात माडल को महिमामंडित करते हुए विदेशी प्रत्यक्ष निवेश के राष्ट्रवाद का आवाहन पूरी वैदिकी रस्मअदायगी के साथ हो गया है। जैसा कि आर्थिक समीक्षा में संकेत दिया गया था।

इस रामवाण के बाद राजनीतिक बाध्यताओं की आंच से जले छाछ भी फूंककर पीने वाले बाजार में जान आ गयी है और बाजार में उतार-चढ़ाव का दौर देखने को मिल रहा है। वित्त मंत्री के बजट भाषण के बाद लाल निशान में आए बाजार अब बढ़त के साथ आगे बढ़ रहे हैं। सेंसेक्स और निफ्टी हरे निशान में आ गए हैं। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी खरीदारी लौटी है। रियल्टी, मेटल और पावर शेयरों में सबसे ज्यादा खरीदारी नजर आ रही है।

फिलहाल बीएसई का 30 शेयरों वाला प्रमुख इंडेक्स सेंसेक्स 180 अंक यानि 0.7 फीसदी की मजबूती के साथ 25,625 के स्तर पर कारोबार कर रहा है। वहीं एनएसई का 50 शेयरों वाला प्रमुख इंडेक्स निफ्टी 51 अंक यानि 0.7 फीसदी की बढ़त के साथ 7,636 के स्तर पर कारोबार कर रहा है।



बजट पेश करते हुए वित्तमंत्री तनिक अस्वस्थ भी हो गये। जिसकी वजह से उन्‍हें पांच मिनट का ब्रेक लेना पड़ा। बाद में ब्रेक से लौटने पर उन्‍होंने बाकी का बजट भाषण बैठकर पढ़ने का फैसला किया। हालांकि, बजट स्‍पीच के आखिर में उनकी तबीयत सुधरने के बाद उन्‍होंने दोबारा से खड़े होकर अपना भाषण पूरा किया। जानकार मानते हैं कि संभवत: ऐसा पहली बार हुआ है, जब‍ किसी वित्‍त मंत्री ने बजट स्‍पीच के दौरान ब्रेक लिया हो।  मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, जेटली डायबिटिक हैं और उनकी एक बार बायपास सर्जरी भी हो चुकी है। खबरों के मुताबिक, गुरुवार को भाषण पढ़ते वक्‍त जब उन्‍हें सांस लेने में दिक्‍कत होने लगी तो उन्‍होंने दो गिलास पानी पीया। करीब बैठीं विदेश मंत्री सुषमा स्‍वराज ने उन्‍हें सदन से माफी मांगकर कुछ मिनट का ब्रेक लेने की सलाह दी, लेकिन शुरू में जेटली इसके लिए तैयार नहीं हुए। हालांकि, बाद में वह इसके लिए राजी हो गए।


हम शुरुआती रुझान पर ही आज चर्चा करेंगे और बाकी सूचनाएं जैसे जैसे आयेंगी,उसका कूट तिलिस्म का पासवर्ड निकालने की कोशिश करते रहेंगे।


फिर वही बरमुडा त्रिभुज धर्म,राजनीति और पूंजी का।आज अंग्रेजी और भाषाई अखबारों के मुखपन्नों और संपादकीय में देश को कड़वी दवाई के लिये तैयार रहने की नसीहत देते हुए धर्मयोद्धा प्रधानमंत्री के पक्ष में फिर जनादेश सुनामी की रचना तो की ही गयी है,इसके साथ ही कारपोरेट लाबिइंग के रास्ते मीडिया  ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है।


वाशिंगटन से सैम अंकल ने खबरदार भी किया कि नई सरकार लोक लुभावन तौर तरीकों को तिलांजलि दें तो अमेरिकी कंपनियां भारतीय मुक्त बाजार में अरबों अरबों डालर का निवेश कर सकते हैं।अमेरिकी और वैश्विक निवेशकों की आस्था और कारपोरेटइंडिया के एकमुश्त समर्थन की नींव पर बजट रचना की गयी है।


गौरतलब है कि इससे पहले बजट कू पूर्व संध्या पर इकनॉमिक सर्वे ने अधिकारों से लैस एक नया फिस्कल रिस्पॉन्सिबिलिटी ऐंड बजट मैनेजमेंट ऐक्ट बनाने, राज्य सरकारों के हस्तक्षेप से मुक्त नैशनल फूड मार्केट बनाने, राशन कार्ड्स के बजाय फूड स्टैंप्स या कैश ट्रांसफर सिस्टम अपनाने और बेहतर डिलीवरी तथा जवाबदेही तय करने के लिए सोशल सेक्टर की स्कीम्स में बदलाव की वकालत की है। आशावादी लोग इसे एक अच्छा रिफॉर्म प्रोग्राम बताएंगे, लेकिन हवाई बातों से परहेज करने वाले लोग साफ और ठोस कदमों की जानकारी मिलने पर ही संतुष्ट होंगे।


बजट प्राविधि,संसदीय प्रक्रिया और अर्थशास्त्र की धज्जियां उधेडने का यह अभूतपूर्व करिश्मा सहलाने और रतिसुख प्राप्त करने की कामकला सिद्धांत के तहत हुआ है। बजट निर्माण प्रक्रिया के सामान्यत: पांच चरण हैं। प्रथम चरण में बजट की रूपरेखा बनाई जाती है। दूसरे में इसका दस्तावेज तैयार किया जाता है। तीसरे चरण में इसे संसद में स्वीकृति के लिए लाया जाता है। चौथे चरण में बजट का क्रियान्वयन तथा पांचवें चरण में वित्त कोषों का लेखांकन तथा परीक्षण होता है।बजट केंद्र सरकार की आर्थिक नीतियों का आईना है। इसके जरिए प्रधानमंत्री के नेतृत्व में सरकार का एक कोर ग्रुप आर्थिक नीतियां तय करता है। इस कोर ग्रुप में प्रधानमंत्री के अलावा वित्त मंत्री, वित्त मंत्रालय के अधिकारी और योजना आयोग के उपाध्यक्ष रहते हैं। वित्त मंत्रालय की ओर से प्रशासनिक स्तर पर जो अधिकारी होते हैं, उनमें वित्त सचिव के अलावा राजस्व सचिव और व्यय सचिव शामिल होते हैं। यह कोर ग्रुप वित्त मंत्रालय के सलाहकारों के नियमित संपर्क में रहता है। सरकारें अपने हिसाब से इस कोर ग्रुप का ढांचा बदलती भी रहती हैं।


धर्मयोद्धा नमोमहाराज और एकमुश्त वित्त प्रतिरक्षा मंत्री ही बजट प्रक्रिया में मुख्यभूमिका निबाहते रहे ,जाहिर है।इस प्रक्रिया में पहली बार योजना आयोग का उल्लेखनीयभूमिका नहीं है क्योंकि मोंटेक के इस्तीफे के बाद नये उपाध्यक्ष की नियुकति नहीं हुई और न ही नई सरकार के आर्थिक विशेषज्ञों और सलाहकारों का कोई देशी नेटवर्क बना है।गौरतलब है कि  बजट की रूपरेखा बनाने में योजना आयोग, नियंत्रक महालेखा परीक्षक व प्रशासनिक मंत्रालयों की मदद ली जाती है। प्रत्येक मंत्रालय अपनी आवश्यकताओं की जानकारी वित्त मंत्रालय को देता है। योजना आयोग सरकारी योजनाओं की प्राथमिकताओं से वित्त मंत्री को अवगत कराता है और नियंत्रक लेखा परीक्षक लेखा-जोखा उपलब्ध कराता है।


यह बजट अपने आप में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश है जो वैश्विक निर्देशन और संघ परिवार मुख्यालय के निर्देशन में तैयार हुआ।


यह बूंबाट डर्टी पिक्चर सिर्फ विकास और एंटरटेनमेंट के लिए है,जहां जनकल्याणकारी राज्य और गणतंत्र की सड़ती लाशों की बदबू विदेशी तेल और गंध से छुपायी गयी है।


और इस धर्म, राजनीति और पूंजी के बरमुडा त्रिभुज में कत्ल की इस रात की कोई सुबह नहीं।


केसरिया जायनवादी धर्मोन्मादी कारपोरेट सरकार और शाही बजरंगियों के पहले बजट में आयकर में छूट के मार्फत मलाईदार तबके को मलहम और सुधार एजंडे का निरमम वास्तव।


खास बात तो यह है,जो केसरिया संहारक बजट की थीमसांग है, विनिवेश ,प्रत्यक्ष निवेश और निजीकरण के जरिये भारत के उनतीस राज्यों को केंद्रीकृत बाजार में तब्दील करने के कार्यभार के संकल्प के साथ लोकसभा चुनावों में पराजित लेकिन नमो सरकार में अमित शाह की शाही सवारी के मुकाबले सबसे अहम कारपोरेट वकील अरुण जेटली,जो वित्तमंत्री के साथ साथ रक्षा मंत्री भी हैं,यानी वैश्विक व्यवस्था के हित साधने का कम्प्लीट पैकेज, न बजट पेश करते हुए पूंजी की तमाम भव बाधाएं दूर करने और निनानब्वे फीसद जनता की गंगाप्राप्ति का भव्य आयोजन कर सुधारों के मार्फत कर दिया है,जैसा कि मध्ययुग से जारी ग्लोबीकरण के अर्थशास्त्र की चर्चा करते हुए हम बार बार लिखते बोलते रहे हैं।


आयकर राहत का हिसाब करते हुए हमारे पढ़ लिखे तबके को यह बात शायद समझ में नहीं आयेगी और आयेगी भी तो उनकी गैंडाई त्वचा में दावानल की आंच महसूस नहीं की जायेगी कि प्रतिरक्षा (इसके साथ आंतरिक सुरक्षा और खुदरा बाजार से लेकर आधारभूत आर्थिक उत्पादन संरचना समवेत भी नत्थी है),और बीमा(इसके साथ बैंकिग और तमाम वित्तीय क्षेत्र,सेवा क्षेत्र) में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की हदबंदी तोड़ने की धर्मोन्मादी घोषणा की है।पूरे देश को एकीकृत करने के हिंदुत्व जायनवादी अभियान के नरमेध राजसूय के जरिये कर प्रणाली और वित्तीय सुधार का अंगीकार भी है।


मोदी सरकार के पहले बजट के बाद जूते-चप्पल, छोटे फ्लैट टीवी, स्पोर्ट्स का सामान, साबुन, कंप्यूटर, ब्रांडेड कपड़े, पैकेज्ड फूड और सोलर प्रोडक्ट्स सस्ते हुए हैं।


हालांकि, सरकार ने तंबाकू उत्पादों पर टैक्स बढ़ाया है। सिगरेट, तंबाकू, पान मसाला महंगे होंगे। साथ ही कोल्ड ड्रिंक, इंपोर्टेड मोबाइल, रेडियो टैक्सी सेवा महंगे हो गए हैं।

इंडस्ट्री देखना चाहती थी कि बजट में सरकार अर्थव्यवस्था में जान फूंकने के लिए क्या कदम उठाती है।


एचसीसी के चेयरमैन, अजीत गुलाबचंद का कहना है कि ये मोदी सरकार का पहला बजट है। इंडस्ट्री की नजर इस पर होगी कि बजट में आर्थिक सुधार के क्या कदम उठाए जाते हैं और देश की तरक्की के रास्ते पर ले जाने के लिए क्या दिशा होगी। इंडस्ट्री को बजट से सिर्फ दिशा की उम्मीद है। सरकार के पास बजट बनाने के लिए वक्त कम था। सरकार नई है, इसलिए विशिष्ट ऐलानों की उम्मीद नहीं है।


फीडबैक इंफ्रा के चेयरमैन, विनायक चटर्जी के मुताबिक बजट में विशिष्ट रोडमैप का उम्मीद नहीं करनी चाहिए। हालांकि, ये देखना जरूरी होगा कि इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए निवेश बढ़ाए जाने के लिए सरकार की क्या योजना है।


सीआईआई के डायरेक्टर जनरल, चंद्रजीत बनर्जी का कहना है कि बजट में सरकार की नीतियों में रिफॉर्म के ऐलान की उम्मीद है। लेकिन, अहम है ऐलानों को लागू कैसे किया जाएगा इस पर नजर होगी। वित्तीय अनुशासन की दिशा वाले बजट की उम्मीद है।


प्रभुदास लीलाधर के ज्वाइंट एमडी, दिलीप भट्ट का कहना है कि बाजार सिर्फ ये जानना नहीं चाहता है कि सरकार की क्या योजना है। बाजार की नजर ठोस आंकड़ों पर होगी। इकोनॉमी में रिवाइवल, ग्रोथ को बढ़ावा, महंगाई को बढ़ाए बिना निवेश कैसे बढ़ेगा, ये बाजार देखेगा। बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। लेकिन, सभी निवेशक गिरावट पर खरीदारी का मौका तलाश रहे हैं। अगर एसटीटी कम किया जाता है तो बाजार की ओर रिटेल निवेशकों का रुझान बढ़ेगा।


एडेलवाइज फाइनेंशियल सर्विसेज के सीईओ (होलसेल कैपिटल मार्केट्स), विकास खेमानी के मुताबिक नई सरकार बने हुए अभी कुछ ही वक्त हुआ है, इसलिए बजट से ज्यादा उम्मीद नहीं है। लेकिन जीएसटी, रेट्रोस्पेक्टिव टैक्स, पीपीपी, डीटीसी को लेकर ऐलानों या सफाई आने की उम्मीद है। बाजार में बजट के बड़ी गिरावट आने की आशंका कम है। निवेशकों के लिए गिरावट पर खरीदारी का मौका होगा। बजट में जीएसटी का रोडमैप साफ होने से बैंकिंग और कैपिटल गुड्स सेक्टर का अच्छा प्रदर्शन देखने को मिल सकता है।


मोतीलाल ओसवाल के चेयरमैन, मोतीलाल ओसवाल का कहना है कि मोदी सरकार का पहला बजट लोगों की उम्मीदों पर जरूर खरा उतरेगा। वहीं अगर सरकार ने पॉलिसी को सही तरीके से लागू कर लिया तो फिर 1 लाख करोड़ रुपये तक का विनिवेश लक्ष्य हासिल हो सकता है। रिटेल निवेशकों को वापस बाजार में लाने के लिए सरकार को पीएसयू कंपनियों के विनिवेश में इन्हें ज्यादा छूट देनी चाहिए।


मोतीलाल ओसवाल एसेट मैनेजमेंट के मनीष सोंथालिया का कहना है कि अगर बजट उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा तो बाजार में 5 फीसदी की गिरावट संभव है। उम्मीद के मुताबिक बजट नहीं रहने पर निफ्टी 7200 तक गिरने की आशंका है। लेकिन उम्मीद के मुताबिक बजट रहने पर निफ्टी 8000 तक जाने की उम्मीद है।



आइए जानते हैं कि बजट में वित्त मंत्री ने अब तक क्या घोषणाएं की हैं -


वित्त मंत्री: वैश्विक अर्थव्यवस्था में सुधार के संकेत

वित्त मंत्री: महंगाई कम करने पर पूरा जोर

वित्त मंत्री: 7-8 फीसदी की जीडीपी दर हासिल करने की उम्मीद

वित्त मंत्री: इकोनॉमी सुधार के लिए कदम उठाएंगे

वित्त मंत्री: इस बजट में ग्रोथ के लिए प्रतिबद्ध

वित्त मंत्री: कड़े फैसले लेने से पीछे नहीं हटेगी सरकार

वित्त मंत्री: 4.1% वित्तीय घाटे का लक्ष्य हासिल करेंगे

वित्त मंत्री: वित्त वर्ष 2016 में 3.6% वित्तीय घाटे का लक्ष्य

वित्त मंत्री: वित्त वर्ष 2017 के लिए 3% वित्तीय घाटे का लक्ष्य

वित्त मंत्री: नई यूरिया पॉलिसी बनाई जाएगी

वित्त मंत्री: फूड और ऑयल सब्सिडी सिर्फ जरूरतमंदो के लिए

वित्त मंत्री: इसी साल जीएसटी का अंतिम फॉर्मूला

वित्त मंत्री: पुरानी तारीख से टैक्स वसूलने का इरादा नहीं

वित्त मंत्री: कड़े कदम उठाने के अलावा विकल्प नहीं

वित्त मंत्री: उच्च स्तरीय कमेटी सभी रेट्रोस्पेक्टिव मामलों की जांच करेगी

वित्त मंत्री: डिफेंस में एफडीआई सीमा बढ़ाकर 49%

वित्त मंत्री: इंश्योरेंस में एफडीआई सीमा बढ़ाकर 49%

वित्त मंत्री: मैनेजमेंट कंट्रोल के साथ इंश्योरेस में 49% एफडीआई

वित्त मंत्री: सस्ते घरों के नियमों में बदलाव किया जाएगा

वित्त मंत्री: सरकारी बैंकों की हिस्सेदारी बेचेंगे

वित्त मंत्री: 100 स्मार्ट शहरों के लिए 7060 करोड़ रु आवंटित

वित्त मंत्री: देश में रोजगार के मौके बढ़ाने की जरूरत

वित्त मंत्री: इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में सुधार की जरूरत

वित्त मंत्री: 9 एयरपोर्ट पर ई-वीजा लागू करेंगे

वित्त मंत्री: स्किल इंडिया, ग्राम ज्योति योजना शुरू होंगी

वित्त मंत्री: प्रधानमंत्री सिंचाई योजना के लिए 1000 करोड़ रु

वित्त मंत्री: नए ग्रामीण ऊर्जा योजना को 500 करोड़ रु

वित्त मंत्री: आरईआईटी को टैक्स-पास-थ्रू स्टेटस

वित्त मंत्री: मनरेगा के बजट में बदलाव नहीं

वित्त मंत्री: प्रधानमंत्री सड़क योजना के लिए 14389 करोड़ रु

वित्त मंत्री: ग्रामीण आवास योजना के लिए 8000 करोड़ रु

वित्त मंत्री: रूरल आंत्रप्रनर के लिए 1000 करोड़ रु

वित्त मंत्री: 4 नए एम्स बनाने पर विचार जारी

वित्त मंत्री: नए एम्स के लिए 500 करोड़ रु आवंटित

वित्त मंत्री: 5 नए आईआईटी, आईआईएम बनाए जाएंगे

वित्त मंत्री: ग्रामीण पानी आपूर्ति के लिए 3600 करोड़ रु

वित्त मंत्री: 12 नए सरकारी मेडिकल कॉलेज

वित्त मंत्री: 600 नए कम्यूनिटी रेडियो शुरू होंगे

वित्त मंत्री: नए आईआईटी, आईआईएम के लिए 500 करोड़ रु



वित्‍त मंत्री अरुण जेटली ने संसद में मोदी सरकार का पहला आम बजट पेश किया। उन्‍होंने इनकम टैक्‍स छूट की सीमा मौजूदा दो लाख रुपए से बढ़ा कर ढाई लाख करने की घोषणा की। वरिष्‍ठ नागरिकों के लिए तीन लाख रुपए (मौजूदा से 50 हजार रुपए ज्‍यादा) तक की आय टैक्‍स से मुक्‍त रखी गई है। होम लोन पर अब दो लाख रुपए तक के ब्‍याज पर टैक्‍स छूट मिलेगी। पहले यह सीमा डेढ़ लाख रुपए थी। सेक्‍शन 80 सी के तहत टैक्‍स में छूट पाने के लिए निवेश की सीमा भी एक लाख रुपए से बढ़ा कर डेढ़ लाख कर दी गई है। वित्‍त मंत्री ने टैक्‍स रेट में कोई बदलाव नहीं किया है, बस स्‍लैब बदला है। पीपीएफ स्‍कीम में अब लोग साल में एक लाख के बजाय अधिकतम डेढ़ लाख रुपए निवेश कर सकेंगे। नए टैक्‍स प्रावधानों से 6 लाख रुपए सालाना आय वालों के 5150 रुपए की बचत होगी।


वित्त मंत्री अरुण जेटली ने आज अपना पहला बजट पेश कर दिया। बजट पेश करते हुए जेटली ने कहा कि हमारी सरकार को सिर्फ 45 दिन हुए हैं ऐसे में बहुत बड़े बदलाव की उम्मीद न करें। आम बजट में विदेशी निवेश को सरल बनाने और 100 नए स्मार्ट सिटी बनाने का ऐलान किया गया है। हालांकि बजट पेश होते ही संसेक्स में गिरावट देखी गई।



वित्त मंत्री अरुण जेटली ने सरकार के पहले बजट को आज लोकसभा में पेश करते हुए कहा कि भारत को विकास के पथ पर ले जाना होगा। उन्होंने कहा पूर्ववर्ती सरकार द्वारा निर्णय लेने की धीमी गति से संभावनाएं कम होती गई और पिछले दो वित्त वर्ष में विकास दर पांच प्रतिशत से नीचे बनी रही।

उन्होंने कहा कि वैश्विक अर्थव्यवस्था में सुधार के संकेत मिल रहे हैं और भारतीय अर्थव्यवस्था को 7 से 8 प्रतिशत के विकास पथ पर लाने के बजट में उपाय किए गए हैं। वर्तमान आर्थिक स्थिति चुनौतीपूर्ण है। इसके मद्देनजर वित्तीय अनुशासन और वित्तीय सुदृढ़ीकरण अपनाने की जरूरत है।



महंगाई पर काबू पाना मुश्किल

जेटली ने कहा कि यह एनडीए का पहला बजट है और महंगाई पर काबू पाना हमारे लिए सबसे बड़ी चुनौती है। इसके अलावा देश में गरीबों के लिए काफी काम करना है। साथ ही उन्होंने कहा कि विकास दर को दो अंकों में लाना सरकार का लक्ष्य है। जेटली ने कहा कि दुनिया में वित्तीय गिरावट का असर भारत पर भी पड़ा है। उन्होंने कहा कि विकास के लिए बड़ा फंड जरूरी है।


बीमा क्षेत्र में 49 फीसदी एफडीआई

जेटली ने बीमा क्षेत्र में 49 फीसदी एफडीआई का प्रस्ताव दिया साथ ही कहा कि सरकार एफडीआई को प्रोत्साहित करेगी। जेटली ने कहा कि सरकार रक्षा क्षेत्र में 26 फीसदी एफडीआई को मंजूरी देगी। टैक्स से जुड़े झगड़े सीबीडीटी कमेटी के जरिए निपटाए जाएंगे। जीएसटी लाने पर भी विचार हो रहा है। बैंकों को जवाबदेह और स्वायत्त बनाया जाएगा।


100 नए स्मार्ट सिटी का प्लान

जेटली ने कहा कि 100 नए स्मार्ट सिटी बनाने का प्लान है जबकि 100 शहरों का आधुनिकीकरण भी किया जाएगा। स्मार्ट शहरों के लिए 7060 करोड़ रुपये का प्रस्ताव है। पर्यटन बढ़ाने के लिए ई वीजा की जरूरत है। देश के नो हवाई अड्डों पर ई वीजा की सुविधा दी जाएगी।


नई यूरिया नीति लाएंगे

सरकार पेट्रोलियम पर सब्सिडी की समीक्षा करेगी साथ ही नई यूरिया नीति लाएगी। काले धन पर जेटली ने कहा कि ये अर्थव्यवस्था के लिए अभिशाप है। काला धन वापस लाना होगा। वित्त मंत्री ने कहा कि तीन साल में अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाना चुनौती होगा। विकास के लिए बड़े फंड की जरूरत होगी। हमारा लक्ष्य विकास दर को दो अंकों में लाना है।


बाजार में तेजी

नरेंद्र मोदी सरकार का पहले बजट पेश होते ही शुरुआती तेजी के बाद बजट की घोषणाओं से निराश निवेशकों की बिकवाली से बाजार ने गोता लगाना शुरू कर दिया। लेकिन जैसे जैसे बजट अपने अंतिम पड़ाव की ओर बढ़ने लगा सेंसेक्स ने भी रफ्तार पकड़ ली। बजट खत्म होने पर सेंसेक्स करीब 300 अंक ऊपर चढ़ गया।


वित्‍त मंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'ड्रीम प्रोजेक्‍ट' (सरदार पटेल की विश्‍व की सबसे ऊंची मूर्ति बनाना) के लिए दो सौ करोड़ रुपए देने का प्रस्‍ताव किया है, लेकिन मदरसों के आधुनिकीकरण के लिए सौ करोड़ रुपए का ही प्रावधान रखा है। उन्‍होंने सरकार का खर्च घटाने के लिए आयोग बनाने का प्रस्‍ताव भी किया है। बजट में घोषित अहम बातें ये हैं-

  • गुजरात में सरदार पटेल की प्रतिमा 'स्‍टैट्यू ऑफ यूनिटी' बनाने के लिए 200 करोड़ रुपए का प्रावधान

  • नौ एयरपोर्ट्स पर ई-वीजा दिए जाने की सुविधा

  • कौशल विकास के लिए 'स्किल इंडिया' नाम से राष्‍ट्रीय स्‍तर पर योजना चलाई जाएगी।

  • सौ स्‍मार्ट सिटीज बनाने के लिए 7060 करोड़ रुपए का प्रावधान।

  • साफ-सफाई को बढ़ावा देने के लिए स्‍वच्‍छ भारत अभियान चलाया जाएगा।

  • रक्षा क्षेत्र में प्रत्‍यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) की सीमा 49 फीसदी कर दी गई है।

  • गांवों तक बिजली पहुंचाने के लिए दीन दयाल उपाध्‍याय ग्राम ज्‍योति योजना शुरू की जाएगी।

  • बेटी पढ़ाओ, बेटी बचाओ योजना के लिए सौ करोड़

  • दिल्‍ली में क्राइसिस मैनेजमेंट सेंटर खोलने का प्रावधान, इसके लिए पैसा 'निर्भया फंड' से दिया जाएगा।

  • प्रधानमंत्री सड़क योजना के लिए 14389 करोड़ रुपए

  • 500  करोड़ रुपए खर्च कर आंध्र प्रदेश, पश्चिम बंगाल, विदर्भ और पूर्वांचल में एम्‍स खोले जाएंगे। जम्‍मू, छत्‍तीसगढ़, गोवा, आंध्र प्रदेश और केरल में आईआईटी खोले जाने का भी एलान।

  • मदरसों के आधुनिकीकरण के लिए सौ करोड़ का प्रावधान

  • अहमदाबाद और लखनऊ में पीपीपी मॉडल के जरिए मेट्रो रेल शुरू की जाएगी। इसके लिए सौ करोड़ रुपए रखे गए हैं।

  • चालू वर्ष में ही किसानों को समर्पित टीवी चैनल 'किसान टेलीविजन' लॉन्‍च किया जाएगा।

  • नाबार्ड के जरिए पांच लाख किसानों को कर्ज दिया जाएगा।

  • 'सॉयल हेल्‍थ कार्ड' मुहैया कराने की स्‍कीम शुरू  की जाएगी। इसके लिए सौ करोड़ रुपए रखे गए हैं। 56 करोड़ रुपए की लागत से देश भर में मिट्टी जांचने के लिए प्रयोगशालाएं बनवाई जाएंगी।

बजट पेश करने से पहले वित्‍त मंत्री ने पार्लियामेंट हाउस के कमरा नंबर 9 में कैबिनेट की बैठक में हिस्‍सा लिया। जेटली ने कैबिनेट को बजट का सार बताया। इसके बाद कैबिनेट ने बजट को मंजूरी दे दी।

01:19 PM

प्रिंट मीडिया के विज्ञापनों पर सर्विस टैक्स नहीं

01:16 PM

सिगरेट पर एक्साइज ड्यूटी 11-72% बढ़ाई

01:16 PM

गुटखा पर एक्साइड ड्यूटी बढ़ाकर 70%

01:16 PM

सर्विस टैक्स का दायरा बढ़ेगा

01:15 PM

मोबाइल, इंटरनेट के विज्ञापनों पर सर्विस टैक्स

01:11 PM

पैकेजिंग मशीनरी पर एक्साइज ड्यूटी घटाकर 6 फीसदी की गई

01:07 PM

तंबाकू पर एक्साइज ड्यूटी बढ़ी

01:06 PM

फुटवेयर पर एक्साइज ड्यूटी घटेगी

01:05 PM

सोलर पावर इक्विपमेंट पर कस्टम ड्यूटी में छूट से मोजर-बेयर को फायदा

01:05 PM

चुनिंदा सोलर पावर इक्विपमेंट पर कस्टम ड्यूटी में छूट

01:05 PM

सभी तरह के इंपोर्टेड कोल पर 2.5% कस्टम ड्यूटी

01:03 PM

विंड पावर इक्विपमेंट पर कस्टम ड्यूटी घटाकर 6%

01:03 PM

फ्लैट स्टील प्रोडक्ट्स पर कस्टम ड्यूटी बढ़ाकर 7.5%

01:01 PM

होम लोन पर ब्याज छूट सीमा बढ़ने से दीवान हाउसिंग, एचडीएफसी जैसी कंपनियों को फायदा

01:00 PM

डायरेक्ट टैक्स कोड की समीक्षा होगी

01:00 PM

19 इंच से छोटे एलसीडी, एलईडी टीवी पर कस्टम ड्यूटी खत्म

12:59 PM

कलर पिक्चर ट्यूब पर बेसिक कस्टम ड्यूटी खत्म

12:59 PM

इथेन, प्रोटेन पर कस्टम ड्यूटी घटाकर 2%

12:59 PM

स्पैंडेक्स यार्न पर कस्टम ड्यूटी खत्म

12:59 PM

आरबीडी, पामोलिन पर कस्टम ड्यूटी खत्म

12:54 PM

वित्त वर्ष 2015 में 17.94 लाख करोड़ रु का कुल सरकारी खर्च

12:53 PM

पावर जेनरेशन कंपनियों को 31 मार्च 2017 तक टैक्स छूट

12:52 PM

पावर जेनरेशन कंपनियों के लिए टैक्स छूट बढ़ाई गई

12:51 PM

डायरेक्ट टैक्स पर लगने वाले सरचार्ज में बदलाव नहीं

12:50 PM

25 करोड़ रु से ज्यादा निवेश करने वाली मैन्यूफैक्चरिंग कंपनियों को टैक्स छूट

12:47 PM

होम लोन पर ब्याज छूट सीमा बढ़ाकर 2 लाख रु

12:46 PM

80सी के तहत निवेश सीमा बढ़ाकर 1.5 लाख रु

12:46 PM

सीनियर सिटीजन के लिए आयकर छूट सीमा 3 लाख रु

12:45 PM

आयकर छूट सीमा बढ़ाकर 2.5 लाख रु की गई

12:44 PM

वित्त वर्ष 2015 में योजनागत खर्च 5.7 लाख करोड़ रु

01:20 PM

प्रिंट मीडिया के विज्ञापनों पर सर्विस टैक्स नहीं लगने से जागरण प्रकाशन, डीबी कॉर्प को फायदा

01:17 PM

सिगरेट पर एक्साइज ड्यूटी बढ़ने से आईटीसी, गॉडफ्रे फिलिप्स और गोल्डन टोबैको को नुकसान

01:10 PM

सभी तरह के इंपोर्टेड कोल पर 2.5% कस्टम ड्यूटी से कोल इंडिया को फायदा

01:07 PM

तंबाकू पर एक्साइज ड्यूटी बढ़ने से आईटीसी को नुकसान

01:06 PM

फुटवेयर पर एक्साइज ड्यूटी घटने से मिर्जा इंटरनेशनल, लिबर्टी शूज को फायदा

01:05 PM

सभी तरह के इंपोर्टेड कोल पर 2.5% कस्टम ड्यूटी से बिजली और खाद कंपनियों को नुकसान

01:03 PM

विंड पावर इक्विपमेंट पर कस्टम ड्यूटी घटने से सुजलॉन एनर्जी को फायदा होगा

http://hindi.moneycontrol.com/budget2014/


आर्थिक सर्वे के मुख्य बिंदु

नई दिल्ली। संसद में आज प्रस्तुत आर्थिक सर्वे के प्रमुख बिंदु इस प्रकार हैं: - पिछले दो सालों के दौरान पांच फीसदी से नीचे रही विकास दर को पीछे छोड़ते हुए 2014-15 में आर्थिक विकास दर 5.4-5.9 फीसदी रह सकती है।

- बैलेंस ऑफ पेमेंट की स्थिति 2013-14 में, और खास कर पिछली तीन तिमाहियों में काफी सुधरी। निकट भविष्य में इसे बरकरार रख पाना एक चुनौती होगी।

- 2001-2012 के बीच देश के सेवा क्षेत्र की चक्रवृद्धि सालाना विकास दर चीन के बाद सर्वाधिक नौ फीसदी रही। इस दौरान चीन की दर 10.9 फीसदी थी।

- जीडीपी के मामले में दुनिया के शीर्ष 15 देशों में सेवा क्षेत्र के जीडीपी के मामले में 2012 में भारत का स्थान 12वां। इसी दौरान वैश्विक जीडीपी में सेवा क्षेत्र का योगदान 65.9 फीसदी और रोजगार में सेवा क्षेत्र का योगदान सिर्फ 44 फीसदी रहा, जबकि भारत के मामले में यह क्रमश: 56.9 फीसदी और 28.1 फीसदी रहा।

- 2013-14 में फैक्टर लागत (मौजूदा मूल्य) पर जीडीपी में सेवा क्षेत्र का योगदान 57 फीसदी रहा, जो 2000-01 के मुकाबले छह फीसदी अधिक है।

- 2013-14 में सेवा क्षेत्र में एफडीआई प्रवाह 37.6 फीसदी गिरावट के साथ 6.4 अरब डॉलर रहा, जबकि एफडीआई में समग्र तौर पर 6.1 फीसदी वृद्धि रही।

- निर्यात: विश्व सेवा निर्यात में भारत का योगदान 1990 के 0.6 फीसदी से बढ़कर 2013 में 3.3 फीसदी हो गया और यह योगदान वस्तु निर्यात के मुकाबले अधिक है। देश के कुल सेवा निर्यात में 46 फीसदी योगदान करने वाले सॉफ्टवेयर सेवा निर्यात की वृद्धि दर 2013-14 में घटकर 5.4 फीसदी रह गई। करीब 12 फीसदी योगदान करने वाले यात्रा सेक्टर में 0.4 फीसदी गिरावट रही।

- पीएफआरडीए अधिनियम, कमोडिटी वायदा कारोबार को वित्त मंत्रालय के तहत लाना और एफएसएलआरसी रिपोर्ट पेश किया जाना 2013-14 में मील के तीन पत्थर रहे।

- एफएसएलआरसी ने अपनी रिपोर्ट में व्यापक स्तर पर सुझाव दिए हैं। ये मुख्य रूप से शासन व्यवस्था में सुधार के सिद्धांतों की प्रकृति से संबंधित हैं।

- बैंकों की सकल गैर निष्पादित परिसंपत्तियों (एनपीए) में वृद्धि। समग्र तौर पर बैंकिंग सेक्टर का एनपीए मार्च 2011 के कुल ऋण के 2.36 फीसदी से बढ़कर दिसंबर 2013 में 4.40 फीसदी हो गया।

- आरबीआई ने अधोसंरचना, लौह और इस्पात, कपड़ा, उड्डयन और खनन क्षेत्र की पहचान संकटग्रस्त क्षेत्र के रूप में की है।

- नई पेंशन प्रणाली (एनपीएस), जिसे अब राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली कहा जा रहा है, के साथ देश की पेंशन प्रणाली का व्यापक सुधार हुआ है। यह देश में वृद्धावस्था के टिकाऊ समाधान की बुनियाद प्रस्तुत करता है।

- सात मई 2014 तक एनपीएस के तहत 67.11 लाख सदस्य थे और उनकी कुल संपत्ति 51,147 करोड़ रुपये थी।

- असंगठित क्षेत्र के मजदूरों के लिए 2010 में शुरू की गई स्वावलंबन योजना को 2010-11, 2011-12 और 2012-13 में दाखिला लेने वाले लाभार्थियों के लिए विस्तारित किया गया। सह-योगदान का लाभ 2016-17 तक उपलब्ध होगा।

- दीर्घावधि विदेशी कर्ज दिसंबर 2013 के अंत में कुल विदेशी कर्ज का 78.2 फीसदी था, जो मार्च 2013 के अंत में 76.1 फीसदी। दीर्घावधि कर्ज दिसंबर 2013 के अंत में मार्च 2013 के अंत के मुकाबले 25.1 अरब डॉलर

(8.1 फीसदी) बढ़ा, जबकि लघु-अवधि कर्ज चार अरब डॉलर (4.1 फीसदी) घटा, जिससे आयात घटने का पता चलता है।

- 20113-14 में थोक मूल्य सूचकांक पर आधारित महंगाई दर घटकर तीन साल के निचले स्तर 5.98 फीसदी पर आ गई।

- उपभोक्ता मूल्य सूचकांक पर आधारित महंगाई दर में भी गिरावट का रुझान।

- थोक और उपभोक्ता दोनों प्रकार की महंगाई दर में गिरावट की उम्मीद।

- वित्तीय घाटा कम किया जाना देश के लिए जरूरी बना रहा।

- वित्तीय घाटा कम किए जाने के लिए सिर्फ खर्च-जीडीपी अनुपात घटाने की जगह अधिक कर-जीडीपी अनुपात का सुझाव।

- आक्रामक नीतिगत पहल ने 2013-14 में सरकार को वित्तीय घाटा कम करने में मदद की।

- 2013-14 में वित्तीय घाटा जीडीपी का 4.5 फीसदी।

- केंद्र और राज्य सरकारों की कुल देनदारी जीडीपी के अनुपात में कम हुई।

- वर्ष 2013-14 में देश के बकाया-भुगतान की स्थिति काफी सुधरी है। चालू खाता घाटा 32.4 अरब डॉलर (जीडीपी का 1.7 फीसदी) रहा, जो 2012-13 में 88.2 अरब डॉलर (जीडीपी का 4.7 फीसदी) था।

- रुपये की वार्षिक औसत विनिमय दर 2013-14 में प्रति डॉलर 60.50 रुपये रही, जो 2012-13 में 54.41 रुपये थी और जो 2011-12 में 47.92 रुपये थी।

-2012-13 में उद्योग का विस्तार सिर्फ एक फीसदी हुआ और 2013-14 में यह दर और कम 0.4 फीसदी हो गई।

- देश का विदेशी पूंजी भंडार मार्च 2014 के आखिर में बढ़कर 304.2 अरब डॉलर हो गया, जो मार्च 2013 के आखिर में 292 अरब डॉलर था।




नई दिल्ली। वित्त मंत्री अरुण जेटली मोदी सरकार का पहला बजट पेश कर रहे हैं। जेटली ने बजट पेश करते हुए कहा कि देश में महंगाई को कम करना सबसे बड़ी चुनौती है। पढ़ें-जेटली के आम बजट की मुख्य बिंदु।

-रेडिमेड कपड़े, श्रृंगार का सामान महंगा

-मोबाइल फोन सस्ता

-तंबाकू, पान मसाला, सिगरेट महंगा

-तेल, टीवी और साबुन हुआ सस्ता

-इनकम टैक्स छूट सीमा 2 से बढ़कर 2.5 लाख रुपये

-दिल्ली में बिजली सुधार के लिए 200 करोड़ रुपये

-दिल्ली में जल सुधार के लिए 500 करोड़ रुपये

-एशियाई खेलों के प्रशिक्षण के लिए 100 करोड़ रुपये

-कश्मीरी विस्थापितों के पुनर्वास के लिए 500 करोड़

-जम्मू-कश्मीर में स्टेडियम के लिए 200 करोड़

-नेशनल स्पोर्ट्स एकेडमी का निर्माण होगा

-सारनाथ, बोधगया सर्किट का विकास

-नए जलमार्ग के लिए 4200 करोड़

-थर्मल पावर प्रोजेक्ट के लिए 100 करोड़

-NHAI के लिए 37880 करोड़ का प्रस्ताव

-6 नए टेक्सटाइल क्लस्टर, 200 करोड़ का प्रस्ताव

-पश्मीना संवर्धन के लिए 50 करोड़

-वाराणसी के बुनकरों के विकास के लिए 50 करोड़

-जनता को गरीबी मुक्त बनाना हमारी प्राथमिकता

-हमारा लक्ष्य विकास दर को दो अंकों में लाना है

-विकास के लिए बड़ा फंड जरूरी

-तीन साल में अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाना चुनौती

-काला धन वापस लाना प्राथमिकता

-नई यूरिया नीति लाएंगे

-पेट्रोलियम पर सब्सिडी की समीक्षा होगी

-जीएसटी लाने पर भी विचार हो रहा है

-टैक्स से जुड़े झगड़े सीबीडीटी कमेटी निपटाएगी

-रक्षा क्षेत्र में 49 फीसदी एफडीआई को मंजूरी

-एफडीआई को प्रोत्साहित करेगी सरकार

-बीमा क्षेत्र में 49 फीसदी एफडीआई का प्रस्ताव

-बैंकों को जवाबदेह और स्वायत्त बनाएंगे

-100 स्मार्ट शहरों का विकास करेंगे

-गांवों तक बिजली पहुंचाने के लिए 500 करोड़

-देश में 24 घंटे बिजली सप्लाई की योजना

-सरदार पटेल की प्रतिमा के लिए 200 करोड़ रुपये

-पीएम सिंचाई योजना के लिए 1 हजार करोड़

-टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए 9 शहरों में ई-वीजा सुविधा

-स्मार्ट शहरों के लिए 7060 करोड़ रुपये का प्रस्ताव

-बैंकों को जवाबदेह और स्वायत्त बनाएंगे

-राष्ट्रीय पेयजल योजना को 3600 करोड़ रुपये

-राष्ट्रीय बैंक को 8000 करोड़ रुपये

-महिला बैंक को 100 करोड़ रुपये

-पीएम सड़क योजना को 14389 करोड़

-बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ योजना को 100 करोड़

-आदिवासी वन बंधु योजना को 100 करोड़

-वरिष्ठ नागरिक पेंशन योजना जारी रहेगी

-गांवों तक बिजली पहुंचाने के लिए 500 करोड़

-नए मेडिकल कॉलेज बनाए जाएंगे

-शहरी गरीबों के सस्ते आवास के लिए 4000 करोड़ रुपये

-लखनऊ, अहमदाबाद में मेट्रो के लिए 100 करोड़ रुपये

-सर्व शिक्षा अभियान के लिए 28635 करोड़ रुपये

-नए एम्स के लिए 500 करोड़ रुपये

-5 ग्रामीण हेल्थ रिसर्च सेंटर खोलने का प्रस्ताव

-मदरसों के आधुनिकीकरण के लिए 100 करोड़ रुपये

-5 नए IIT, 5 नए IIM खोलने का प्रस्ताव

-आंध्र प्रदेश, राजस्थान में कृषि यूनिवर्सिटी

-कम्यूनिटी रेडियो स्टेशन के लिए 100 करोड़ रुपये

-कृषि ऋण के लिए 8 लाख करोड़

-भूमिहीन किसानों के लिए 5 लाख का कर्ज

-कृषि उत्पादों के भंडारण के लिए 5 हजार करोड़ रुपये

-सौर ऊर्जा के लिए 500 करोड़


Finance Minister Arun Jaitley wasted no time on preambles or poetry as he presented his first Union Budget, stressing on fiscal prudence and making it clear that "we cannot spend beyond our means." (Budget 2014: Highlights)


To encourage savings, Mr Jaitley said as he reached his tax proposals, he announced some relief for individual tax payers, though he left tax rates and slabs unchanged. Mr Jaitley has raised the exemption limit by Rs. 50,000 to Rs. 2.5 lakh a year. This means that anyone who earns less than 2.5 lakh will not be taxed; those earning more than that will save Rs. 5,150 a year.


The finance minister also raised the exemption limit for senior citizens to Rs. 3 lakh; he hiked the exemption limit on long-term financial savings by Rs. 50,000 to Rs. 1.5 lakh a year and raised the tax-free cap on home loan interest from Rs. 1.5 to Rs. 2 lakh. (Arun Jaitley Provides Big Relief to Income Tax Payers)


Mr Jaitley also enhanced the Public Provident Fund (PPF) ceiling from the current Rs. 1 lakh to Rs. 1.5 lakh in a financial year.   


Earlier in his speech, the minister underscored the challenges the government faces to revive a rundown economy and said he had "no option but to take bold steps to spur growth." He said his government was bound to usher in policies for higher growth and to lower inflation. (Rs. 1000 Crore Set Aside to Improve Irrigation Facilities)


The only break in his brisk reading came when the Lok Sabha saw an unprecedented five-minute adjournment at his request as he reportedly had a severe backache. He resumed his speech sitting. (Finance Minister Arun Jaitley Takes Break During Budget Speech)


The markets, that had been flat since morning as they held their breath, cheered when the Finance Minister announced that he was retaining the fiscal deficit target at 4.1 per cent and that he saw the fiscal deficit for the next year at 3.6 per cent and down to 3 per cent by 2016-17. (Budget 2014: 5 New IITs and IIMs, Says Finance Minister)


They plummeted when he indicated that the controversial retrospective tax was not being scrapped, but recovered some time later.  On most other counts Mr Jaitley seemed to meet market expectations. As of 1.15 p.m., the Sensex traded with over 300 points gain.


He promised more clarity on the goods and services tax (GsT) before the year end. The GST is seen as the single-biggest fiscal reform in the country - it aims to widen the tax base, improve tax compliance and reduce transaction costs of businesses. It can add as much as 2 per cent of GDP to India's economy, analysts say.


Mr Jaitley also made announcements on foreign direct investment in several sectors noting it would help manufacturing and employment. In bold steps, Mr Jaitley has proposed that FDI be raised from 26 per cent to 49 per cent in both defence and insurance. He announced FDI and an outlay of Rs. 7000 crore for the Prime Minister's vision of 100 smart cities, saying that the new middle class needed new cities.


He proposed setting up five more IITs, five more IIMs, allotting Rs. 500 crore for this. He also resolved to ensure an AIIMS in every state soon, allocating Rs. 500 crore more to set up four such hospitals for now.  


Mr Jaitley also reiterated his government's commitment to providing 24x7 electricity in all homes and sanitation in all house by 2019 when India celebrates Mahatma Gandhi's 150th birth anniversary.

http://profit.ndtv.com/news/budget/article-budget-2014-arun-jaitley-targets-fiscal-consolidation-announces-income-tax-sops-586406



Finance Minister Arun Jaitley (C) poses as he leaves his office to present the federal budget for the 2014-15 fiscal year, in New Delhi July 10, 2014. REUTERS-Stringer

Indian security personnel stand guard near sacks containing the papers of the budget for the 2014-15 fiscal year, at the parliament in New Delhi July 10, 2014. REUTERS-Adnan Abidi-Files

Security personnel stand guard near sacks containing the papers of the federal budget for the 2014-15 fiscal year, at the parliament in New Delhi July 10, 2014.  REUTERS-Adnan Abidi

1 OF 3. Finance Minister Arun Jaitley (C) poses as he leaves his office to present the federal budget for the 2014/15 fiscal year, in New Delhi July 10, 2014.

CREDIT: REUTERS/STRINGER



Modi's first budget targets growth, curbs deficit

BY MANOJ KUMAR

NEW DELHI Thu Jul 10, 2014 12:41pm IST


(Reuters) - Prime Minister Narendra Modi's new government on Thursday unveiled a budget it said can revive growth after the longest slowdown in a quarter of a century even while curbing borrowing.

Modi's government, in office for less than two months, said it would raise caps on foreign investment in the defence and insurance sectors, and launch a tax reform to unify India's 29 states into a common market.

Delivering his maiden budget, Finance Minister Arun Jaitley told parliament that India's 1.2 billion people were "exasperated" after two years of economic growth below 5 percent.

He vowed that Asia's third largest economy would expand at an annual rate of 7-8 percent within three to four years.

"We shall leave no stone unturned in creating a vibrant and strong India," Jaitley, 61, told lawmakers after climbing the steps of parliament and showing his budget briefcase to TV cameras.

Modi, 63, won a landslide general election victory in May with a pledge to create jobs for the 1 million people who enter India's workforce every month.

He has since warned that "bitter medicine" is needed to nurse the economy back to health from high inflation and the worst slowdown since free-market reforms in the early 1990s unleashed an era of rapid growth.

At the same time, Jaitley vowed to adhere to the "daunting" budget deficit target - of 4.1 percent of gross domestic product for the fiscal year ending March 2015 - that the government inherited from its predecessor.

"I have decided to accept this challenge - one fails when one stops trying," Jaitley told a hushed lower house of parliament. He said the budget deficit would be reduced to 3.6 percent in the following two fiscal years.

'PARAMOUNT IMPORTANCE'

Jaitley's commitment to fiscal discipline was stronger than many independent economists had expected. With the deficit already approaching half of the annual target just three months into the fiscal year, they expected him to raise the borrowing target to 4.4 percent for the current fiscal year.

"Fiscal prudence is of paramount importance," Jaitley said. "We cannot leave behind a legacy of debt for our future generations."

The government's other major policy initiatives had been broadly flagged in advance.

Jaitley said he wants a solution by December on how India would impose a national Goods and Services Tax (GST), promising that the government would be "more than fair" in its dealings with the country's states on how revenue would be allocated.

He also said he would set up a high-level committee to review retrospective tax claims blamed for choking off foreign investment after companies such as Britain's Vodafone (VOD.L) were hit with massive demands.

Jaitley raised limits on foreign investment in defence and insurance ventures to 49 percent from 26 percent. Foreign defence contractors had sought a higher threshold to justify sharing technology when they site operations in India, a major arms buyer.

The budget for the fiscal year to March 2015 was delayed by this year's general election, which handed Modi's Bharatiya Janata Party (BJP) the strongest electoral mandate in India in three decades.

(Writing by Douglas Busvine; Editing by Richard Borsuk)

Budget 2014: Highlights of Finance Minister Arun Jaitley's Budget speech

Express News Service | July 10, 2014 1:32 pm

Finance Minister Arun Jaitley presents the Narendra Modi government's first budget. Here are the highlights:

1. Two years of sub-five per cent growth has led to challenges to the economy

2. Green shoots of recovery seen in global economy

3. Slow decision making has resulted in loss of opportunity

4. We look forward lower level of inflation

5. Will usher in policy regime that will usher in higher growth, low inflation

6. Aim to achieve 7-8 per cent economic growth rate in next 3-4 years

7. Will leave no stone unturned to create a vibrant India

8. Budget proposes Plan expenditure of Rs 5,75,000 crore for current ficsal

9. Anti-poverty programmes will be targeted well.

10. We need to revive growth particularly in manufacturing sector and infrastructure

11. There is urgent need to generate more resources

12. Should we allow economy to suffer because of indecisiveness and populism

13. Task before us is challenging

14: We must continue to be watchful of CAD

15. Target of 4.1 per cent fiscal deficit is daunting but accepting it as a challenge

16. Finance Minister emphasizes on fiscal prudence, need to generate more resources.

17. Iraq crisis having impact on oil prices

18. We must address the problem of black money fully

19. We must take bold steps to enhance economic activity

20. Expenditure Management Commission will be constituted to look at expenditure reforms

21. We are for minimum government, maximum governance

22. Overall subsidy regime will be reviewed, especially food and oil. Marginalised sections and SC/ST to be protected

23. New urea policy will be formulated

24. We have no option but to take some bold steps to spurt economy; these are only the first steps and are directional

25. This govt will not ordinarily change policies retrospectively which creates a fresh liability

26. All future indirect transfers under the retro tax regime will be scrutinised by a high level committee of CBDT before action is taken

27. We are committed to providing stable tax regime which is investor friendly

28. Govt to set up a high-level Committee to interact with industry to bring about changes in tax laws if required

29. FM Proposes to enhance the scope of income tax settlement commission.

30. Govt proposes to strengthen authority for advance ruling in tax, set up more benches

31. Transfer pricing regulations for residents and non-residents being done

32. FDI in Defence sector raised to 49 per cent

33. Finance Minister Arun Jaitley takes 5-minute break; Lok Sabha adjourned for 5 minutes

34. Financial stability is foundation of rapid recovery

35. Our domestic manufacturing is still at nascent stage

36. Manufacturing units will be allowed to sell their products through retail and e-commerce

37. Budget proposes 49 per cent FDI in insurance through FIPB route.

38. Our Banking system needs to be further strengthened. Need to infuse rs 2.40 lakh crore in our banks

39.Bank capital to be raised through retail sale of shares; Govt to continue to hold majority in PSU banks

40. Govt proposes to provide finance to 5 lakh landless farmers through NABARD

41. Will examine proposal to give additional autonomy to banks and make them more responsible

42. E-visa to be introduced at 9 airports in the country

43. Govt proposes to set up 100 smart cities. Govt to provide Rs 7,060 crore for development of such cities

44. Public sector banks need Rs 2.40 lakh crore equity to conform with Basel-III norms by 2018

45. Rs 50 cr set aside for indigenous cattle breed and blue revolution for inland fisheries

46. We expect PSUs to invest Rs 2,47941 crore this fiscal

47. Infrastructre Investment Trust being set up to finance infra projects and reduce burden on banks

48. Total sanitation by 2019

49. Budget proposes Rs 1,000 crore for Pradhanmantri Krishi Seechai Yojana to improve irrigation facility

50. National multi-scale programme 'Skill India' to be introduced to provide training and support for employment

51. Rs 200 cr set aside for the Sardar Patel statue project in Gujarat

52. Deen Dayal Upadhaya Gram Jyoti Yojana to be launched to augment power supply in rural areas

53. Pension scheme for senior citizens being revived

54. Govt committed to providing 24×7 power supply to all homes

55. Rs 50,548 cr proposed for SC development

56. EPFO will launch a unified account scheme for portability of Provident Fund accounts

57. Govt proposes to set up committee to examine how to utilise large funds lying unused in postal schemes

58. Govt approves minimum monthly pension of Rs 1,000 per month under EPS-95 scheme run by EPFO

59. Committee will be set up to examine how unused money in postal schemes can be utilised

60. Govt announces schemes for disabled persons; to set up 15 new Braille press and revive 10 existing ones

61. Rs 14,389 crore provided for Pradhan Mantri Gram Sadak Yojana.

62. Govt to launch 'Beti Bachao, Beti Padhao' scheme; sets aside Rs 100 crore for it

63. Crisis Management Centres for women to be set up at all government hospitals in NCR region

64. Govt increases wage ceiling for EPFO schemes to Rs 15,000 from existing Rs 6,500 per month

65. Rs 3,600 crore provided for safe drinking water in 20,000 habitations in villages facing problem of impure drinking water

66. Budget proposes National Housing Banking programme; sets aside Rs 8,000 crore

67. Rs 2.29 lakh crore allocated for Defence budget.

68. 4 more AIIMS in Andhra Pradesh, West Bengal, Vidharba and Purvanchal are under consideration; Rs 500 cr provided

69.  Each state where there is no AIIMS will be added in the coming years

70. Govt proposes to add 12 more medical government colleges

71. 5 new IIMs and 5 new IITs proposed to be set up

72. 'Kisan' TV channel to be launched by DD at cost of Rs 100 crore: Rs 100 crore for Community radio stations proposed

73. FM proposes National Rural Internet and Technology Mission; Rs 500 crore set aside.

74. Metro rail services to be launched in Lucknow and Ahmedabad; Rs 100 crore set aside for it

75. Budget proposes to set up agri-infrastructure fund at a cost of Rs 100 crore; two more agri-research intitutes in

Jharkhand and Assam

76. FM announces Rs 100 crore for modernisation of madrasas

77. Govt sets aside Rs 200 cr for setting up of agriculture university in AP and Rajasthan, and horticulture university in Haryana, Telangana

78. Rs 100 crore provided for providing soil card to every farmer

79. Govt committed to achieve 4 per cent farm growth; to use new technologies to boost crop yields

80. Rs 500 crore price stabilisation fund to be set up

http://indianexpress.com/article/india/politics/budget-2014-highlights-of-finance-minister-arun-jaitleys-budget-speech/3/