Palash Biswas On Unique Identity No1.mpg

Unique Identity No2

Please send the LINK to your Addresslist and send me every update, event, development,documents and FEEDBACK . just mail to palashbiswaskl@gmail.com

Website templates

Zia clarifies his timing of declaration of independence

What Mujib Said

Jyoti basu is DEAD

Jyoti Basu: The pragmatist

Dr.B.R. Ambedkar

Memories of Another Day

Memories of Another Day
While my Parents Pulin Babu and basanti Devi were living

"The Day India Burned"--A Documentary On Partition Part-1/9

Partition

Partition of India - refugees displaced by the partition

Saturday, August 23, 2014

स्त्रियां कभी नहीं हारतीं।हालात बदलने हैं तो पुरुषतंत्र के तमाम किलों और मठों पर गोलाबारी सबसे जरुरी है।

स्त्रियां कभी नहीं हारतीं।हालात बदलने हैं तो पुरुषतंत्र के तमाम किलों और मठों पर गोलाबारी सबसे जरुरी है।


पलाश विश्वास

आज का रोजनामचा आनंतमूर्ति जी की स्मृति में।

आज का रोजनामचा इरोम शर्मिला के जीवट को सलाम।


आज का रोजनामचा रंगकर्मी शंभू मित्र और तृप्ति मित्र को याद करते हुए।इस 22 अगस्त को शंभू मित्र सौ के हो गये।


तृप्ति के बिना शंभू अधूरे हैं,इसलिए शंभू के साथ तृप्ति को भी शतवार्षिक प्रणाम।


इन्हीं शंभू मित्र को बांग्ला भद्रसमाज ने रंगकर्म के लिए मंच से बेदखल किया था कभी।लेकिन आज चर्चा का यह विषय नहीं है।सिर्फ इतना कि तृप्ति के सान्निध्य से जैसे शंभू का कृतित्व व्यक्तित्व है वैसे ही बुनियादी तौर पर हर मनुष्य लेकिन अर्ध नारीश्वर है और यह लोक मान्यता भी है।जिसे हम सिरे से भूल रहे हैं।


अनंत मूर्ति जी की भी शायद ज्यादा चर्चा न कर सकूं,जैसे मैं शमशेर बहादुर सिंह की चर्चा नहीं कर सकता।महाश्वेतादी और नवारुणदा उन्हें बहुत सम्मान देते थे,इतनी सी निजी स्मृति है।


इरोम शर्मिला की फिर गिरफ्तारी से जाहिर है कि इस मुक्तबाजारी मृत्यु उपत्यका में न्याय प्रणाली,कानून के राज और लोकतंत्र की दशा दिशा क्या है।


अभी हमारे युवा पत्रकार साथी मोदी विकास कामसूत्र में इस कदर निष्णात हैं कि वे सोवियतसंघ,चीन से लेकर क्यूबा के साम्यवादी शासन को बड़े जोर शोर से सैन्य शासन बताने से अघा नहीं रहे हैं।बंगाल में वाम कैडरतंत्र के वाम राजकाज की तस्वीरें भी कुछ इसी तरह की बनीं।


ऐसे आधुनिक पत्रकार,अर्थशास्त्री,विद्वतजन आदिवासियों का सफाया विकास के लिए जितना जरुरी मानते हैं उतना ही जरुरी मानते हैं राष्ट्रका सैन्यीकरण,लोकतंत्र का अवसान और अंततः सैन्यशासन।उन्हें न नाजियों से परहेज है और न फासीवाद का डर।


वे हर हाल में हिंदू राष्ट्र चाहते हैं इस डिजिटल देश में नागरिक और मानवोधिकारों को तिलांजलि देकर क्योंकि वे प्रकृति और पर्यावरण की नीलामी के पक्षधर हैं और जनपक्षधर हर आवाज उनके नजरिये से राष्ट्रद्रोह है।


उनके लिए सोनी सोरी और इरोम शर्मिला का दमन बेहद जरुरी है।न्यायपालिका पर अंकुश भी उतना ही जरुरी है।


कारपोरेट लाबिइंग का राजकाज और वैश्विक इशारे उनके लिए सर्वोत्कृष्ट दिशानिर्देश हैं और वे सिरे से स्त्री विरोधी हैं।


मैंने कल देर रात एक नया प्रयोग किया बांग्ला ब्लाग पर।प्रेजेंटेशन और न्यूज स्ट्रीम का मिलाजुला प्रयोग।शारदा फर्जीवाड़े के संदर्भ में।

http://shudhubangla.blogspot.in/2014/08/blog-post_339.html


रोज नयी गिरफ्तारियां।सारे उज्जवल चेहरों का नक्षत्र समावेश फर्जीवाड़े में।खेलकूद से लेकर मीडिया और दुर्गापूजा तक में चिटफंड।


पक्ष विपक्ष के नेता,मंत्री,सांसद सारे के सारे चिटफंड के मुलाजिम और इस पर पीपीपी फंडा गुजराती।अपडेट करते करते थक गये।पूरी तस्वीर एक मुश्त पेश करने का यह तरीका सूझा।


सुबह अभिषेक को फोन लगाया कि तकनीकी तौर पर यह आयोजन कैसे संभव है,उस पर विचार करने क्योंकि बांग्लादेश में पत्रकारिता,साहित्य,संस्कृति और राजनीति में भी जो लोक जनपदीय गूंज भारत में किसी भी क्षेत्र में नहीं,किसी भी भाषा में नहीं है।


मुक्तबाजार में लोक और जनपदों का साझा चूल्हा तहस नहस है और माइक्रोओवन चिमनियों का प्रदूषण सर्वत्र।घर,समाज और पूरा देश अब शापिंग माल है जहां क्रयशक्ति के अलावा कोई अस्मिता नहीं,अस्तित्व नहीं।


भरत में स्त्रियों ने अपने भोगे हुए यथार्थ के मुताबिक इस अंतिम सत्य को सबसे पहले,सबसे बेहतर समझा है और इस मुक्त बाजार में वजूद की लड़ाई में स्त्रियां मर्दों से हजारों हजार मील आगे हैं।अपनी संतानों के ताजा स्टेटस के फर्क पर गौर करें तो यह सच बेनकाब होगा।


स्त्री की सत्यनिष्ठा में कोई मिलावट होती नहीं है,और न कोई पाखंड होता है।


स्त्री की दासता के बिना इसीलिए अर्थतंत्र और सामाजिक वर्चस्व कायम होना मुश्किल है और इसीलिए स्त्री देह सबसे बड़ी राजनीति है और सर्वोत्तम वाणिज्य भी वहीं।


चित्रांगदा को जीते बिना अर्जुन अर्जुन नहीं है तो श्री रामचंद्र मर्यादा पुरुषोत्तम हो न हो,मर्यादा का उत्कर्ष लेकिन माता सीता सबसे जो उत्पीड़िता हैं।


हमारे साझा परिवार में फैसले तमाम हमारी ताई लेती रही हैं।ताई जी के फैसले के ऊपर मेरे ताउ,पिता और चाचा समेत किसी को कुछ कहने सुनने की नौबत कभी नहीं आयी।


बसंतीपुर की बुजुर्ग औरतें मसलन मेरी दादी,मेरी नानी,टेक्का की ठाकुमा,अन्ना बूढ़ी वगैरह वगैरह गजब की लड़ाकू औरतें रही हैं।


बसंतीपुर समेत बंगाल शरणार्थी इलाकों के स्त्री समाज से जो स्नेह मुझे मिला है,वहीं अपनापा मुझे संथाल, मुंडा, बुक्सा, थारु, नगा, त्रिपुरी,गोंड,भील आदिवासी गांव में निरंतर मिलता रहा है और मैं दरअसल खुद को आदिवासी ही मानता हूं इसीलिए।


इसलिए भी कि आदिवासी समाज में स्त्री गुलाम नहीं है।


स्त्री कथा का संघर्ष मैंने उत्तराखंड में खूब देखा है और उत्तराखंडी स्त्रियां, इजाएं,दीदियां और वैणियां मेरे लिए प्रेणा और ऊर्जा का अंनत स्रोत है।


यही स्त्री जीवट झारखंड, ओड़ीशा, गुजरात,राजस्थान और समूचे मध्यभारत,दक्षिण भारत,पूर्वोत्तर और पूरे हिमालयी भूगोल में है।


जिसका प्रतीक अकेली इरोम शर्मिला नहीं है।सोनी शोरी भी हैं।तो उत्तराखंडी और मणिपुरी महिलाएं भी हैं।


झुग्गी झोपड़ियों,चायबागानों,चायबागानों,कोयला और दूसरे खानों,गंदी बस्तियों, दंडकारण्य,शरणार्थी शिविरों,सरकारी बेसरकारी कार्यालयों में कार्यरत तमाम स्त्रियां इसका समूह प्रतीक।


आर्यावर्त का भूगोल इतिहास और धर्मशास्त्र सिरे से स्त्री विरोधी है।ऐसा महाराष्ट्र में भी नहीं है।हिंदी पट्टी इसलिए पिछड़ी है क्योंक स्त्री को उसका यथोचित सम्मान देना यहां जनसमाज को स्वीकार है नहीं।


हिंदी पट्टी इसीलिए दहेज पट्टी है तो भ्रूण हत्या का भूगोल भी।

आनरकीलिंग और बलात्कार की संस्कृति हिंदी पट्टी से ही बाकी देश को संक्रमित है।

अब आप तय करें कि इस पर हम गर्व करें कि पश्चाताप।


बंगाल में इतिहास और विरासत अनार्य है तो बौद्धमय भी।इसलिए बंगाल में स्त्रियां ज्यादा सशक्त हैं और बंगाली समाज पुरुषतांत्रिक होते हुए भी गहराई में मातृतांत्रिक भी है,देवियां बंगाल में देवों के मुकाबले ज्यादा पुज्यनीया हैं।


लेकिन लोक के अवसान और जनपदों के नगर महानगर में सिमटने की वजह से बंगाल में भी स्त्री फिर वही मुक्त बाजार की उपभोक्ता सामग्री है और बलात्कार संस्कृति में बंगाल अब सबसे अव्वल है।


सांढ़ संस्कृति और विकास कामसूत्र इसलिए सिरे से स्त्री विरोधी है।

बाजार स्त्री देह का ही कारोबार है।


मुक्त बाजार मुक्त कारोबार है।इसलिए मुक्त बाजार में स्त्री फिर वही शूद्र है।सीता है,गीता है या फिर द्रोपदी या कमसकम जोधाबाई या राधा या मीरा और बहुत हुआ तो झांसी की रानी।


लेकिन रानी दुर्गावती के लिए वहां कोई जगह है ही नहीं।


ईमानदारी से सोचें तो इंदिरा गांधी,सोनिया गांधी,मायावती,जयललिता,सुषमा स्वराज,स्मृति ईरानी,सुभाषिणी अली,जयललिता,गौरी अम्मा,मेधा पाटकर,ममता बनर्जी,इंदिरा ह्रदयेश,तारकेश्वरी सिंन्हा,मीरा कुमार जैसी स्त्रियों की राजनीतिक आलोचना राजनीतिक कम है,पुरुषवादी कहीं ज्यादा है।


हम उनकी उपलब्धियों को सिरे से नकार कर उनकी आलोचना के अभ्यस्त हैं और उनका कृतित्व को पुरुषतांत्रिक सत्ता की आंख की किरकिरी मानने को ही अभ्यस्त हैं हम जाने अनजाने।


केसरिया कारपोरेट हिंदू ह्रदयसम्राट प्रधान राष्ट्रीय स्वयंसेवक की शौचालय पीपीपी क्रांति का लालकिले की प्राचीर से उदात्त उद्घोष के बाद सेनेटरी नैपकिन  और गोरा बनाने के कारोबार,फैशन स्टेटमेंट,ब्रांडिंग की पूरी मार्केटिंग विधा के साथ भारतीय मीडिया यह साबित करने में एढ़ी चोटी का जोर लगा रहा है कि बिना शौचालय स्त्रियां कैसे हारती रही हैं।


बिना प्रसाधन, बिना बाजार,बिना स्पांसर,बिना सहवास,बिना कामसूत्र,बिना प्लेब्वाय, बिना थ्री फोर फइव जी के हम समाज में स्त्री की भूमिका और अर्थतंत्र में उसके अनिवार्य योगदान का मूल्यांकन करने के लिए तैयार ही नहीं।


थ्री डी स्त्री देह के अलावा हमारे पुरुष वर्चस्व के लिए स्त्री का कोई अस्तित्व ही नहीं है।

शरतचंद्र कोई वेज्ञानिक दृष्टि के कथाकर नहीं हैं और न वे समाजवास्तव को अभिव्यक्त करने में सिद्धहस्त रहे हैं।लेकिन उनका जैसा स्त्री पक्ष का कथाकार पूरी दुनिया में खोजना मुश्किल है।


आज सुबह समकालीन तीसरी दुनिया का ताजा अंक पढ़ गया।करीब दस साल बाद दुनिया में जो कहानी पढ़ी,वह स्त्री अस्मिता की कथा है।जो स्त्री हारती नहीं है और अक्लांत योद्धा है जो स्त्री,उसकी यह कथा,जो दरअसल हर स्त्री है भूगोल निरपेक्ष।


बहस के लिए पहचान की राजनीति पर कात्यायनी का अति महत्वपूर्ण लेंख है।इस विमर्श में अंबेडकर प्रसंग में हमारी असहमति पर हस्तक्षेप में लंबी बहसें चली है।कात्यायनी के ताजा आलेख का मूलाधार भी वही अरविंद न्यास का वक्तव्य है।


इस पर हम नये सिरे से टिप्पणी नहीं करेंगे।लेकिन वर्गीय ध्रूवीकरण के बारे में कात्यायनी की जो राय है और पहचान को खारिज करने का जो एजंडा है,हम उसका पुरजोर समर्थन करते हैं।


समकालीन तीसरी दुनिया के इस अंक में आनंद जी के संपादकीय,नेपाल अपडेट,मुशर्रफ अली का आलेख,अभिषेक की रपट और जोहरा सहगल पर संस्मरण अवश्य पठनीय है।पढ़ें और समकालीन तीसरी दुनिया को जारी रखने में सहयोग भी करें।


हम अपनी जमीन से जुड़ीं औरतों को देखें तो महसूस करेंगे कि स्त्रियां किसी भी परिस्थिति में हारती नहीं है।


हाल में लिंकड इन के प्रोफ्शनल नेटवरक में जिस तेजी और सक्रियता के साथ फेसबुक पर अनुपस्थित लेकिन जीवन के हर क्षेत्र में सक्रिय और कामयाब स्त्रियों से परिचय हो रहा है,उससे हमारी यह धारणा टूटी है कि आधुनिक स्त्री सिर्फ क्रयशक्ति के पीछे भाग रही हैं।


उनकी चिंताएं और सरोकार पुरुषों के मुकाबले ज्यादा ईमानदार ही नहीं हैं,समाजवास्तव के मुताबिक हैं और उनके डीएनए के मुताबिक सत्यनिष्ठा का उत्कर्ष भी।


ऐसी स्त्रियां हार नहीं सकतीं।

अपने लोक में लौटें और जनपद संस्कृति के मुताबिक स्त्री को नेतृत्व का मौका दें तो हो सकता है कि कयामत के ये हालात बदल भी जायें।


हमने तो अब तक घर के भीतर या बाहर पुरुषवर्चस्व के दायरे और सांढ़ संस्कृति के व्याकरण से बाहर किसी स्त्री को संबोधित किया ही नहीं है।


हम अब तक सिर्फ मर्दों को संबोधित करते रहे हैं और इसीलिए हमारे पढ़े लिखे पुरुष वर्चस्ववादी प्रयासों का असर भी नहीं हो रहा है।


हालात बदलने हैं तो पुरुषतंत्र के तमाम किलों और मठों पर गोलाबारी सबसे जरुरी है।


अब इस ताजा  विवाद पर भी गौर करेंः


भगाना बलात्कार कांड पर ईस्टर्न स्काई मीडिया की खास पेशकश आंदोलन को हाईजेक करते आज के पत्रकार व एनजीओ वाले। फॉरवर्ड प्रेस के कार्यकारी संपादक प्रमोद रंजन ,ऐ आई बीएसएफ के अध्यक्ष जीतेन्द्र यादव और नैक्डोर की अनीता भारती ने दलित आंदोलकारिओं के खून पसीना पर निम्न राजनीती की साथ ही आंदोलन के पुरोधा की उपाधी लेने की कोशिश की। क्या कहा भगाना कांड संघरश समिति के आंदोलन करिओं ने।

http://www.youtube.com/watch?v=TQxLUTqhXug&hd=1#!

NERIST Employees Association to Stage Indefinite Hunger Strike

Eastern Sky Media Hindi News Bulletin 23rd August, 2014. For more news, visit our website http://easternskymedia.co.in/

LikeLike ·  · Share

इस पर हमारे मित्र दुसाध जी का जवाब यह हैः

H L Dusadh Dusadh

15 hours ago · Edited


मित्रोंभगाणा पीड़ितों को न्याय दिलाने में प्रमोद रंजन,अनीता भारती,जितेन्द्र यादव जैसे सर्व भारतीय स्तर पहचान रखने वाले वंचितों के हितैषियों के साथ जिस तरह तहेलका ने मेरी भी छवि को म्लान करने का कुत्सित प्रयास किया है,उसे देखते हुए बहुजन समाज के ढेरों लोगों की राय है कि मुझे चांचल्य सृष्टि करने वाले तहलका को सबक सिखाने के लिए मानहानि का दावा ठोक देना चाहिए.किन्तु जिस तरह कोर्ट -कचहरियों में सक्षम लोग मामलों को लम्बा खिचवा देते हैं,उसे देखते हुए चाहकर भी मानहानि का मुकदमा दायर नहीं करना चाहता.क्योंकि इससे आर्थिक संकटों में सब समय घिरे रहने वाले मुझ जैसे व्यक्ति का आर्थिक संकट और गहराने के साथ ही सामयिक मुद्दों से ध्यान भटक जाने की भी सम्भावना है.पर,भारत की हिस्ट्री में संभवतः सबसे अधिक किताबे देने वाले मुझ जैसे मिशनरी लेखक की छवि म्लान करने का यदि मनुवादी दुसाहस कर सकते हैं,तो फिर आम बहुजन चिंतकों के साथ वे किस हद तक जा सकते हैं,इसे ध्यान में रखते हुए यौन अपराध का आरोपी तरुण तेजपाल के तहलका के गुनाह को नज़रअंदाज कर देना भी ठीक नहीं लगता.ऐसे में यह देखते हुए कि देश परम्परागत सुविधासंपन्न तबके की किसी भी किस्म की चुनौती दुसाध के लिए झेलना बहुत कठिन है, आप बताएं सेंशेशन क्रियेट करने वाले तहलका के बचकानी(मनुवादी-मार्क्सवादी) षड्यंत्र को नजरंदाज़ कर दिया जाय या ठोक दिया जाय मानहानि का दावा ?


Friday, August 22, 2014

কেঁচো খুঁড়তে কাল কেউটে,সারদা কেলেন্কারিতে যতই জড়াচ্ছে শাসকদল,ততই বাড়ছে তৃণমুলে যোগদান,মীডিযা থেকে যুবসমাজ!দুর্নীতির দুর্বার আকর্ষণ হাহুতাশ হাঘরে বাংলায়-ছিঃছিঃ ছিঃ! প্রশাসন থেকে রাজনৈতিক নেতা, সকলকে তুষ্ট রাখতে কোটি কোটি টাকা ছড়িয়েছিলেন সুদীপ্ত সেন পলাশ বিশ্বাস

কেঁচো খুঁড়তে কাল কেউটে,সারদা কেলেন্কারিতে যতই জড়াচ্ছে শাসকদল,ততই বাড়ছে তৃণমুলে যোগদান,মীডিযা থেকে যুবসমাজ!দুর্নীতির দুর্বার আকর্ষণ হাহুতাশ হাঘরে বাংলায়-ছিঃছিঃ ছিঃ!

প্রশাসন থেকে রাজনৈতিক নেতা, সকলকে তুষ্ট রাখতে কোটি কোটি টাকা ছড়িয়েছিলেন সুদীপ্ত সেন


পলাশ বিশ্বাস

কেঁচো খুঁড়তে কাল কেউটে,সারদা কেলেন্কারিতে যতই জড়াচ্ছে শাসকদল,ততই বাড়ছে তৃণমুলে যোগদান,মীডিযা থেকে যুবসমাজ!দুর্নীতির দুর্বার আকর্ষণ হাহুতাশ হাঘরে বাংলায়-ছিঃছিঃ ছিঃ!

এপার বাংলায় সারদায় বড় বড় তাবড় উজ্জ্বল ছবি1

মন্ত্রী সান্ত্রীসাংসদনেতা তো কেয়া বাত,উজ্জবলতম নক্ষত্রের সমারোহ সারদা কেলেন্কারি!

সুদীপ্ত সেন রোজ মুখ খুলছেন!

কেউ বা হাসপাতালে,কেউ বা পলাতক,কেউ গ্রেফ্তার!

শেষপর্যন্ত কোথাকার জল কোথায় গড়ায় কে জানে!

ইতিমধ্যে বাংলার সিঙ্গাপুর সফরে মীডিয়ার পালাবদলও হল!

যারা ছিলেন সমালোচনায় সবচেয়ে বাচাল,তাঁরাই এখন সেরা স্তাবক!

চতুর্দিকে সেরা বাঙালির অনুপম সমারোহ!

আ মরি আমার বাংলা !স্বামী বিবেকানন্দ সারা দেশে যুবসমাজের সেরা আইকন!

সেই সন্যাসীর দেশ এই বাংলায় কোটি কোটি টাকা নয় ছয়ের এত আয়োজনে কোটি কোটি বেকার ছেলে মেয়েদের একটু লোভ হতে পারে,তা বলে শতাব্দী প্রাচীন একটি দল সেদিন ও ক্ষমতায় ছিল যে দল,তার গোটা যুব শাখা রাতারাতি দুর্নীতির অভিযোগে দিশেহারা ক্ষমতার ধুমে ধুমাছ্ছন্ন হযে গিরগিট হয়ে গেল!

বিশ্ব রেকর্ড অবশ্যই!

ওপার বালায় আবার কালো টাকা পাচারের শিল্প উত্কর্ষে বাঙালির জাত্যাভিমানের নুতন মাত্রা যোগ হচ্ছে প্রতিদিন

কে যেন বলেছিল টাকা মাটি,মাটি সোনা

বাঙালি ইতিহাসের পাতায় প্রণম্য বিপল্বী চরিত্র,সেই বাঙালি শরতচন্দ্রের দুশ্ছরিত্র আখ্যানকে পিছনে ফেলে এখন টাকার পিছনেই ছুটচে

টাকা যার,আমি তার

প্রশাসন থেকে রাজনৈতিক নেতা, সকলকে তুষ্ট রাখতে কোটি কোটি টাকা ছড়িয়েছিলেন সুদীপ্ত সেন


সেবি, আরবিআইয়ের মতো নিয়ামক সংস্থার নোটিসকে বুড়ো আঙুল দেখিয়ে বাজার থেকে কোটি কোটি টাকা তুলেছিলেন সারদাকর্তা। প্রশাসন থেকে রাজনৈতিক নেতা, টাকা ছড়িয়ে সকলকেই তুষ্ট রাখতেন সুদীপ্ত সেন। সাধারণ মানুষের কষ্টের টাকা এভাবেই নয়ছয় করেছে সারদা।  


২৩ এপ্রিল, ২০১৩

জম্মু-কাশ্মীরের শোনমার্গ থেকে গ্রেফতার সুদীপ্ত সেন।

২৪ এপ্রিল, ২০১৩

প্রকাশ্যে আসে সিবিআইকে লেখা সুদীপ্ত সেনের চিঠি। ছয়ই এপ্রিলের তারিখ দেওয়া চিঠিতে সারদাকর্তা ব্যবসা চালানোর জন্য কাদের টাকা দিয়েছিলেন সেবিষয়ে বিস্তারিত তথ্য দিয়েছিলেন।    

সারদা কর্তার দাবি বেআইনি অর্থলগ্নি ব্যবসা চালিয়ে যেতে বিভিন্ন রাজনৈতিক দলের নেতানেত্রীদের মোটা টাকা দিতে হয়েছিল তাঁকে। পতনের শুরুটা হয়েছিল  মিডিয়া ব্যবসায় নামার পরই।

মিডিয়া ব্যবসায় সুদীপ্ত সেনের প্রথম বড় লগ্নি ছিল চ্যানেল টেন। শান্তনু ঘোষের কাছ থেকে বাজারদরের তুলনায় অনেক বেশি টাকায় চ্যানেল টেন কিনেছিলেন সারদাকর্তা। চ্যানেল টেনের পিছনে ৫০ কোটি টাকা খরচ হয়েছিল। শান্তনু ঘোষের কাছ থেকে বাজারদরের চেয়ে বেশি মূল্যে গ্লোবাল অটোমোবাইল সংস্থাটিও কিনেছিলেন সুদীপ্ত। ২৮ কোটি টাকায় এনই বাংলা সহ পজিটিভ গ্রুপের একাধিক চ্যানেল কেনেন তিনি।

বাজারদরের থেকে অধিক মূল্যে চিত্রশিল্পী শুভাপ্রসন্নের মালিকানাধীন দেবকৃপা ব্যাপার লিমিটেড কিনতে বাধ্য হয়েছিলেন। সরকার ঘনিষ্ঠ বুদ্ধিজীবী অর্পিতা ঘোষকে মোটা টাকার বিনিময়ে চ্যানেলের দায়িত্বভার দেওয়া হয়েছিল। উঃপূর্বাঞ্চলে চ্যানেল খুলতে দিল্লির এক সাংবাদিককে টাকা দিয়েছিলেন।

মিডিয়া ব্যবসার পিছনে টাকা ঢালার এখানেই শেষ নয়।  গাঁটছড়া বাধার কিছুদিন পরই  প্রতিদিন গোষ্ঠীর সঙ্গে গোলমাল শুরু হয় সারদাকর্তার। মিটমাট করতে সারদা গোষ্ঠীর মিডিয়া সেকশনের গ্রুপ সিইও করা হয় কুণাল ঘোষকে । এজন্য কুণাল ঘোষ প্রতিমাসে ১৫ লক্ষ টাকা বেতন পেতেন।এছাড়াও, বেআইনি অর্থলগ্নি ব্যবসা চালিয়ে যেতে বরাবরই প্রশাসন ও রাজনৈতিক নেতাদের তুষ্ট রাখতেন সুদীপ্ত সেন। রাজ্য সরকারের উদ্যোগে হওয়া একাধিক মেলার স্পনসর ছিল সারদা। শাসকদলের নেতা-মন্ত্রীদের মধ্যস্থতায়  সারদাকর্তা টাকা ঢেলেছিলেন বেশকয়েকটি প্রীতি ম্যাচেও। এছাড়াও সারদা কর্তার দাবি,

বস্ত্রমন্ত্রী শ্যামাপদ মুখার্জির কাছ থেকে বাজারদরের বেশি টাকায় সিমেন্ট কারখানা কিনেছিলেন। উঃ ২৪ পরগনায় রাজ্যের সঙ্গে যৌথ মালিকানাধীন কৃষিপণ্যের কারখানা কিনেছিলেন।

বাজার থেকে বেআইনিভাবে টাকা তোলা চালিয়ে যেতে সেবি, আরবিআইয়ের মতো আর্থিক নিয়ামক সংস্থাগুলিকেও হাতে রাখতেন সুদীপ্ত সেন। সেজন্যই ইস্টবেঙ্গল কর্তা দেবব্রত সরকার ওরফে নীতুকে প্রতিমাসে মোটা টাকা দিতেন সারদাকর্তা। টাকা দেওয়া হয় নিয়ামক সংস্থার কর্তাদেরও। এছাড়াও রিয়্যালটি ও কন্সট্রাকশনের ব্যবসায় নামার পর প্রশাসনকে সঙ্গে রাখতে অনন্ত চার প্রাক্তন পুলিস কর্তাকে মোটা টাকা দিতে হত সুদীপ্ত সেনকে।


নিয়ন্ত্রণ করছে রাজনীতিক আমলা ও ব্যবসায়ী চক্র ॥ জিডিপি কমছে ৩ শতাংশ

কালো টাকার সন্ধানে ॥ শেষ


০ নিয়ন্ত্রণের জন্য কমিশন গঠন প্রয়োজন

০ অর্থমন্ত্রী জনমত গঠনের পক্ষে

কাওসার রহমান ॥ কালো টাকার কালো অর্থনীতি দেশের অর্থনৈতিক সম্ভাবনাকে নষ্ট করে দিচ্ছে। কালো টাকার কারণে প্রতিবছর অন্তত তিন শতাংশ হারে প্রবৃদ্ধি হারাচ্ছে বাংলাদেশ। এই টাকার একটি বড় অংশই দেশের অর্থনৈতিক কর্মকা-ে ব্যবহৃত হলেও তার প্রাপ্তিযোগ হচ্ছে শূন্য। বরং কালো টাকার কারণে কমে যাচ্ছে আমলাতন্ত্রের দক্ষতা। নষ্ট হচ্ছে সামাজিক স্থিতিশীলতা। অর্থনীতিবিদদের মতে, এই কালো টাকাকে কেন্দ্র করে দীর্ঘকাল ধরে দুর্নীতিগ্রস্ত আমলা রাজনীতিক ও ব্যবসায়ীদের মধ্যে একটি মাফিয়া চক্র গড়ে উঠেছে। ক্ষমতার পালা বদলে এক দল যায় নতুন দল আসে। যারা ক্ষমতার খুব কাছাকাছি থেকে এই কালো টাকা সৃষ্টি ও পাঁচারে সাহায়তা করে। এই চক্র ভাঙতে হলে জাতীয়ভাবে রাজনৈতিক ঐকমত্য গড়ে তুলতে হবে। আর এই চক্র ভাঙতে না পারলে কালো টাকা কোনভাবেই নিয়ন্ত্রণ করা সম্ভব হবে না।

অর্থনীতিবিদ প্রফেসর অরুণ কুমার ভারতের অন্যতম কালো টাকা বিশেষজ্ঞ। জওহরলাল নেহরু বিশ্ববিদ্যালয়ের সেন্টার ফর ইকোনমিক স্টাডিজ এ্যান্ড প্ল্যানিংয়ের এই শিক্ষক গত ১৫ বছর ধরে ভারতের কালো টাকা নিয়ে গবেষণা করছেন। তিনি গবেষণা করে দেখেছেন, বর্তমানে ভারতের অর্থনীতির ১২ শতাংশ হারে প্রবৃদ্ধি অর্জনের সামর্থ্য রয়েছে। কিন্তু কালো অর্থনীতির কারণে ভারত ৭ শতাংশের বেশি প্রবৃদ্ধি অর্জন করতে পারছে না। তিনি সত্তর দশকে ফিরে গিয়েও একই সমীক্ষা চালান। তাতেও দেখেছেন, ওই দশকে ভারতের অর্থনৈতিক প্রবৃদ্ধি অর্জনের সামর্থ্য ছিল ৮.৫ শতাংশ। কিন্তু বাস্তবে ওই দশকে অর্জিত হয়েছে ৩.৫ শতাংশ। একই সূত্র বাংলাদেশের অর্থনীতির ওপর প্রয়োগ করেন দেশের অর্থনীতির গবেষক ড. মাহবুব আলী। তিনি দেখেন, ভারতের মতো কালো অর্থনীতি বাংলাদেশের অর্থনৈতিক সম্ভাবনাকেও নষ্ট করছে। তার হিসাবে, বাংলাদেশ প্রতিবছর অন্তত তিন শতাংশ হারে প্রবৃদ্ধি হারাচ্ছে কালো টাকার কারণে। তিনি বলেন, 'বর্তমানে বাংলাদেশের অর্থনীতির যে সম্ভাবনা তাতে প্রতিবছর দেশের অন্তত নয় শতাংশ হারে প্রবৃদ্ধি অর্জন করা উচিত। কিন্তু কালো অর্থনীতির নেতিবাচক প্রভাবের কারণে বাংলাদেশ ছয় শতাংশ প্রবৃদ্ধির বেড়াজাল ভাঙতে পারছে না।'

তিনি বলেন, 'যদি কম করেও ধরি তাহলে বর্তমানে বাংলাদেশে কালো টাকার পরিমাণ জিডিপির ৪০ শতাংশ। তার অর্থ এই দাঁড়ায় যে, দেশের প্রায় সকল কর্মকা-েই কিছু না কিছু অবৈধতার ছাপ রয়েছে। শিক্ষা, স্বাস্থ্য, পরিবেশ নিয়ন্ত্রণ, সড়কের ট্রাফিক ব্যবস্থা, আইন-শৃঙ্খলা কিংবা শিল্প যে খাতের কথাই বলি না কেন, সব খাতেই কালো টাকা সৃষ্টি হচ্ছে।'

প্রফেসর মাহবুব আলী বলেন, কালো টাকার কর্মকা- আছে, কিন্তু উৎপানশীলতা নেই। এ টাকা পুঁজি হিসেবে ব্যবহৃত হলেও তার প্রাপ্তিযোগ শূন্য। বিপুল পরিমাণ কালো টাকার কারণে দেশে বিস্তৃত আকারে অনৈতিক কর্মকা- ঘটছে। উৎপাদন খাতে কালো টাকা কাজ করছে না। এর প্রভাবে দেশে পাবলিক- প্রাইভেট পার্টনারশিপ গড়ে উঠছে না। কালো টাকা ঘুষ হিসেবে ব্যবহৃত হয়ে আমলাতন্ত্রের দক্ষতা কমে যাচ্ছে। এটা নষ্ট করে দিচ্ছে সামাজিক স্থিতিশিীলতা।

কালো টাকা মূল্যস্ফীতিকেও বাড়িয়ে দেয়। আমাদের দেশে সময়ে সময়ে মূল্যস্ফীতি অনেক বেড়ে যায়। সেটা মূলত কালো টাকার দৌরাত্ম্যের কারণেই হয়। কালো টাকার কারণে সঞ্চয় ও বিনিয়োগ ক্ষতিগ্রস্ত হচ্ছে। পুঁজিবান্ধব আর্থিক নীতি প্রয়োগ হচ্ছে না। সঠিকভাবে কাজ করছে না মুদ্রানীতি। দেশের পুঁজি বিদেশে বিনিয়োগ হচ্ছে। আর পুঁজি পাচারের কারণে দেশ বঞ্চিত হচ্ছে কাক্সিক্ষত কর্মসংস্থান থেকে।

ওয়াশিংটনভিত্তিক একটি গবেষণা প্রতিষ্ঠান গ্লোবাল ফিনান্সিয়াল ইন্টিগ্রিটির তথ্য মতে, ভারতে নিয়ন্ত্রণ হ্রাস ও বাণিজ্য উদারীকরণের পর পুঁজি পাচার বেড়ে গেছে। দেশটিতে ৬৮ শতাংশ পুঁজি পাচারের ঘটনা ঘটছে ১৯৯১ সালে অর্থনৈতিক সংস্কার শুরুর পর। বাস্তবিক অর্থে, সংস্কারের আগে যেখানে পুঁজি পাচারের বার্ষিক হার ছিল ৯.১ শতাংশ, অর্থনৈতিক সংস্কারের পর তা বেড়ে দাঁড়িয়েছে ১৬.৪ শতাংশ। এ প্রসঙ্গে অর্থনীতিবিদ মাহবুব আলী বলেন, 'উদারীকরণের কারণে শুধু ভারতেই নয়, বাংলাদেশ থেকেও পুঁজি পাচার বেড়েছে। একই সঙ্গে অর্থনীতিতে বেড়েছে কালো টাকার পরিমাণও। সত্তর দশকের শেষ দিকে যেখানে দেশে কালো টাকার পরিমাণ ছিল গড়ে জিডিপির ২০ শতাংশ। ১৯৯৬ সালে তা বেড়ে জিডিপির প্রায় ২৯ শতাংশে দাঁড়ায়। ২০০৪ সালে এসে তা আরও বৃদ্ধি পেয়ে জিডিপির প্রায় ৪৬.৬ শতাংশে উন্নীত হয়। এটাই প্রমাণ করে ১৯৯১ সালে বাণিজ্য উদারীকরণ শুরু হওয়ার পর দেশে কালো টাকার পরিমাণ বেড়েছে।

তিনি বলেন, 'কালো টাকার পারিমাণ বৃদ্ধি মানেই পাচারের পরিমাণও বৃদ্ধি। গত ১২ বছরে সুইস ব্যাংকগুলোতে বাংলাদেশীদের আমানতের পরিমাণ বেড়ে দাঁড়িয়েছে ১৭৭ কোটি ৯৪ লাখ ফ্রাঁ, যা বর্তমান মূল্যে (প্রতি সুইস ফ্রাঁ ৮৭.১৪ টাকা) প্রায় ১৫ হাজার ৫০৫ কোটি টাকা। আগে কখনও এত বিপুল পরিমাণ টাকার তথ্য পাওয়া যায়নি। এটাই প্রমাণ করে দেশ থেকে টাকা পাচার বৃদ্ধি পেয়েছে।'

সম্প্রতি বাংলাদেশে সবচেয়ে বড় পুঁজি পাচারের ঘটনা ঘটেছে ২০১৩ সালে। ৫ জানুয়ারি নির্বাচনের আগে দেশে রাজনৈতিক অস্থিরতার সৃষ্টি হয়। প্রবল হয়ে ওঠে দেশে আরও একটি এক-এগারো সৃষ্টির আশঙ্কা। ফলে বড় আকারের পুঁজি পাচার হয়ে চলে যায় দেশের বাইরে। এর বড় প্রমাণ হলো- ২০১৩ সালে সুইস ব্যাংকগুলোতে বাংলাদেশীদের আমানতের পরিমাণ প্রায় ৬২ শতাংশ বৃদ্ধি। সুইস ব্যাংকে অনেক দেশের আমানত যেখানে গত ২০১৩ সালে কমেছে, সেখানে বাংলাদেশীদের আমানত এক হাজার ৩০০ কোটি টাকা বেড়েছে।

উন্নত দেশগুলো মুখে মানিলন্ডারিংয়ের কথা বললেও, তারা 'ট্যাক্স হেভেন' তৈরি করে মূলত এই পুঁজি পাচারকে উৎসাহিত করছে। তারা তাদের দেশে উন্নয়নশীল দেশগুলো থেকে পুঁজি পাচার হয়ে গেলেও এই পুঁজির উৎস খুঁজে দেখে না। কারণ তাদের দেশে অতিরিক্ত সম্পদ যাচ্ছে, এতে তারা খুশি।

প্রফেসর অরুণ কুমার বিষয়টিকে একটু অন্যভাবে দেখছেন। তিনি মনে করেন, এই ট্যাক্স হেভেন হচ্ছে উপনিবেশবাদপরবর্তী উন্নত দেশগুলোতে উন্নয়নশীল দেশ থেকে সম্পদ নিয়ে যাওয়ার একটি কৌশল। এজন্যই তারা এই ট্যাক্স হেভেন তৈরি করেছে এবং এতে তারা লাভবান হচ্ছে। লাতিন আমেরিকান দেশগুলো থেকে শত শত কোটি ডলার এই ট্যাক্স হেভেনের মাধ্যমে ইউরোপের দেশগুলোতে চলে যাচ্ছে। বিশ্বের ৪০টি ব্যাংকের ৭০০ সহযোগী প্রতিষ্ঠান এই ট্যাক্স হেভেনের কার্যক্রম পরিচালনা করছে। যার মাধ্যমে উন্নয়নশীল দেশগুলো থেকে প্রতিবছর বিপুল পরিমাণ পুঁজি পাচার হচ্ছে উন্নত দেশে। এ তালিকায় রয়েছে সুইস, ব্রিটিশ ও মার্কিন বড় বড় ব্যাংক।

এ বিষয়ে গ্লোবাল ফাইন্যান্সিয়াল ইন্টিগ্রিটি (জিএফআই) বাংলাদেশ প্রসঙ্গে বলছে, পাচার হয়ে যাওয়া এসব অর্থ জমা হয়েছে উন্নত বিশ্বের বিভিন্ন ব্যাংক ও আর্থিক প্রতিষ্ঠানে এবং করের সুখস্বর্গ (ট্যাক্সেস হেভেন) বলে পরিচিত বিভিন্ন দেশ ও অঞ্চলে। অথচ আইনের প্রয়োগ না থাকায় বাংলাদেশ থেকে টাকা পাচার ঠেকানো যাচ্ছে না। বিশেষ করে রফতানি, আমদানি, হুন্ডি ও চোরাচালানের মাধ্যমে দেশ থেকে অর্থ পাচার হচ্ছে বলে জিএফআই প্রতিবেদনে উল্লেখ করা হয়েছে।

অর্থনৈতিক বিশ্লেষকরা বলছেন, কালো টাকার কারণে দেশের আয়ের একটা অংশের ওপর বাংলাদেশ সরকার কোন কর তো পাচ্ছেই না, উল্টো কর ফাঁকি দেয়া টাকাটার একাংশ বিদেশী কোন ব্যাংকে জমা হচ্ছে। আর যে অংশটা দেশে রয়ে যাচ্ছে সেটা দেশের বাজারে ঘুরপথে ঢুকে পড়ছে।

এতে দেশ তথা বিশ্বঅর্থনীতির দু'ভাবে সর্বনাশ হচ্ছে। প্রথমত, কোন দেশের মুদ্রা বাজারে ঠিক কত পরিমাণ অর্থ আছে সেই মূল হিসাবটাই আর সরকারের হাতে থাকছে না। ফলে কেন্দ্রীয় ব্যাংক পুরোপুরি মুদ্রাবাজার নিয়ন্ত্রণ করতে পারছে না। কারণ কেন্দ্রীয় ব্যাংক পরিস্থিতি সামাল দেয়ার জন্য যে দাওয়াই-ই দিক না কেন মুদ্রাবাজারে একাংশ তার আওতার বাইরে থেকেই যাচ্ছে। এতে দীর্ঘমেয়াদী কোন আর্থিক ব্যবস্থা নেয়া ক্রমশ কঠিন হয়ে দাঁড়াচ্ছে।

দ্বিতীয়ত, বিদেশী ব্যাংকে হিসাববহির্ভূত অর্থ জমা হওয়ায় দেশের বাইরে অনাকাক্সিক্ষত সম্পদ পুঞ্জীভূত হতে শুরু করছে, যার সম্বন্ধে সরকারের না আছে কোন ধারণা, না আছে সেই অর্থ কিভাবে ব্যয় হচ্ছে তার উপর কোন রকম নিয়ন্ত্রণ। ফলে ধীরে ধীরে দেশের বাইরে যদি আর্থিক ক্ষমতার অন্য ভরকেন্দ্র গড়ে ওঠে তাহলে আশ্চর্যের কিছু হবে না।

এ ছাড়া যে অর্থ দেশের ব্যাংকে জমা থাকলে ব্যাংকের আর্থিক ক্ষমতা বাড়ত সেই অর্থ বাইরে থেকে বিদেশী ব্যাংকের শক্তি বাড়াতে সাহায্য করছে। বাংলাদেশ এখন ঋণের বাজার উন্মুুক্ত করেছে। ফলে বাংলাদেশী ব্যবসায়ীরা যদি এ দেশেরই কালো টাকায় বলীয়ান হওয়া বিদেশী ব্যাংকের কাছ থেকে ঋণ নেয় তাতে আশ্চর্য হওয়ার কিছু থাকবে না। বিশ্লেষকদের মতে, শুধু কর ব্যবস্থা দিয়ে কালো টাকা নিয়ন্ত্রণ করা যাবে না। কারণ কালো অর্থনীতির মূল শক্তি হচ্ছে আমলা রাজনীতিক ও ব্যবসায়ীদের মধ্যে গড়ে ওঠা মাফিয়া চক্র। এ চক্র ভাঙতে হলে রাজনৈতিক ইচ্ছা সবচেয়ে বেশি জরুরী।

এছাড়া কালো টাকা তৈরির উপায় বন্ধে নজরদারি বাড়ানোসহ যথাযথ আইনের প্রয়োগ ঘটাতে হবে। তবে কালো টাকা সাদা করলেই সমস্যার সমাধান হবে না, বরং যেসব কারণে বা উপায়ে টাকা কালো হয় সেসব কারণ বা উপায় চিহ্নিত করে যথাযথ ব্যবস্থা নিতে হবে, যাতে দেশে নতুন কোন কালো টাকা তৈরি হতে না পারে।বাংলাদেশ ব্যাংকের প্রতিবেদন থেকে দেখা যায়, দেশে ২৩ হাজার ২১২ জন কোটিপতি আছেন। অথচ জাতীয় রাজস্ব বোর্ডের তথ্যানুসারে, ২০১১-১২ অর্থবছরে ১ লাখ টাকা ব্যক্তি আয়কর দেয়ার মতো ১ হাজার ব্যক্তিও দেশে নেই। এতেই বোঝা যায়, টাকাওয়ালাদের ধরতে পারছে না সরকার। ফলে শুধু কালো টাকা সাদা করা নয়, সব টাকাওয়ালার ট্যাক্স ফাঁকি বন্ধ করা উচিত। ট্যাক্স আদায়ে দায়িত্বশীল প্রতিষ্ঠানগুলোর দুর্নীতি বন্ধ করতে পারলেই সুফল পাওয়া যাবে।

মানি লন্ডারিং প্রতিরোধ ও সন্ত্রাসী কর্মকান্ডে অর্থায়ন বন্ধে আন্তর্জাতিক সংস্থাগুলোর সঙ্গে চুক্তিতে স্বাক্ষর করায় বাংলাদেশে যেমন কালো টাকা উৎপাদনের সব পথ বন্ধ করতে অঙ্গীকারাবদ্ধ, তেমনি যেখানে কালো টাকার সন্ধান পায় সেখানেই অনুসন্ধান চালাতে হবে।

এ প্রসঙ্গে ড. মুহাম্মদ মাহবুব আলী বলেন, 'শুধু কর ব্যবস্থা দিয়ে কালো টাকা নিয়ন্ত্রণ করা যাবে না। যারা কর ফাঁকি দেন তাদের কাছে কর কম বা বেশি তাতে কিছু আসে যায় না। বরং কর কম থাকলে কালো টাকার পরিমাণ বেড়ে যায়।'

তিনি বলেন, 'কালো টাকা সাদা না করার অন্যতম কারণ হচ্ছে কর দেয়ার পরও কালো টাকার মালিকদের বিরুদ্ধে দুর্নীতি দমন কমিশনের ব্যবস্থা গ্রহণের সম্ভাবনা। এ ক্ষেত্রে ট্রুথ কমিশন থাকা উচিত যাতে আত্মস্বীকৃতরা কালো টাকা সাদা করলে তাদের বিরুদ্ধে আইনগত ব্যবস্থা নেয়া না হয়।'

অর্থনীতি বিশ্লেষকদের মতে, কালো টাকার উৎস বন্ধ করার পদক্ষেপ নেয়াই হবে সর্বোত্তম উপায়। আবাসন খাতের জন্য এ সুযোগ বড়লোকদের আরও বড় করার সুযোগ তৈরি করে দেবে বলে অনেকে মনে করেন। কারণ কালো টাকা সাদা করার জন্য তারা এখন বৈধভাবে অসংখ্য ফ্ল্যাট বা এ্যাপার্টমেন্টের মালিক হয়ে যাবেন। ফলে ফ্ল্যাট বা এ্যাপার্টমেন্টের দাম আকাশে উঠবে। মধ্যবিত্তরা আর ফ্ল্যাটের স্বপ্ন দেখতে পারবে না। তাই সুযোগ প্রদানের বিষয়ে বিস্তর ভাবনা চিন্তার আবশ্যকতা রয়েছে।

এ ক্ষেত্রে বিশ্লেষকরা কিছু পদক্ষেপ নেয়ার প্রস্তাব করেছেন। এগুলো হলো- ১. আকস্মিক ঘন ঘন অনুসন্ধানের মাধ্যমে কালো টাকা জব্দ করা, ২. কেনাবেচায় রেকর্ড সংরক্ষণ আবশ্যিক করা, ৩. গোঁজামিল বা কর ফাঁকি প্রমাণিত হলে শাস্তি নিশ্চিত করা, ৪. সরেজমিন জরিপ করে কর প্রদানে সক্ষম সবাইকে করের আওতায় আনা। ৫. দুর্নীতি দমন কমিশন ও বিচার বিভাগ শক্তিশালী করা এবং একে সব ধরনের রাজনৈতিক প্রভাব ও সুপারিশ থেকে মুক্ত রাখা, ৬. মন্ত্রী, সংসদ সদস্য ও সরকারী আমলার বিরুদ্ধে তদন্ত বা অভিযোগ দায়েরের ক্ষেত্রে সংশ্লিষ্ট কর্তৃপক্ষকে সক্ষমতা ও স্বাধীনতা প্রদান করা, ৭. অনানুষ্ঠানিক খাতকে আনুষ্ঠানিক খাতে রূপান্তর, ৮. পণ্য আমদানির ডাইরেক্ট প্রোফর্মা ইনভয়েস (ডিপিআই) ব্যবস্থাকে করজালের আওতায় আনা, ৯. ব্যাংকিং চ্যানেলের মাধ্যমে যারা টাকা পাঠাতে পারে না তাদের বৈধভাবে দেশে টাকা পাঠানোর ব্যবস্থা, ১০. জঙ্গীবাদ ও সন্ত্রাসী কার্যক্রমে কালো টাকা দেশে আসছে। যার প্রমাণ ২০১৩ সাল। এদের নির্মূল করতে কঠোর পদক্ষেপ গ্রহণ, ১১. দাতব্য সংস্থার মাধ্যমে দেশে যে অর্থ আসছে সেগুলোও কালো টাকা যাতে না হয় সে ব্যাপারে কঠোর তদারকি থাকা, ১২. বাংলাদেশীদের মধ্যে যাদের বিদেশে সম্পদ রায়েছে তাদের কি পরিমাণ সম্পদ বিদেশে আছে সে সম্পর্কে সুস্পষ্ট ঘোষণা আয়করের আওতায় থাকা, ১৩. বিদেশ থেকে কালো টাকা ফিরিয়ে আনার ব্যাপারে বৈশ্বিক উদ্যোগ ও বিভিন্ন দেশের মধ্যে সমঝোতা তৈরি করা এবং ১৪. কালো টাকার বিষয়টি খতিয়ে দেখার জন্য একটি টাস্কফোর্স বা কমিশন গঠন করা।

এ সব সুপারিশ সম্পর্কে প্রফেসর মাহবুব আলী বলেন, 'কালো টাকা নিয়ন্ত্রণ করতে হলে এ বিষয়ে সঠিক তথ্য দরকার। ভারতে এ বিষয়ে স্বাধীনতার পর থেকে এ পর্যন্ত ৪০টি কমিটি বা কমিশন গঠিত হলেও, বাংলাদেশে আজ পর্যন্ত কোন কমিটি বা কমিশন হয়নি। এ নিয়ে দেশে ব্যক্তি পর্যায়ে কিছু গবেষণা হয়েছে, কিন্তু বিস্তৃত কোন গবেষণা হয়নি। বাংলাদেশে যে কাজটি হয়েছে তা হলো সময়ে সময়ে কালো টাকা সাদা করার সুযোগ দেয়া হয়েছে। তাই এ ব্যাপারে কোন পদক্ষেপ গ্রহণের আগে এ বিষয়ে পর্যাপ্ত তথ্য হাতে থাকা দরকার। তাই কালো টাকার বিষয়ে পদক্ষেপ গ্রহণের আগে বিষয়টি খতিয়ে দেখতে একটি টাস্কফোর্স বা কমিশন গঠন করা প্রয়োজন। অর্থমন্ত্রী আবুল মাল আবদুল মুহিত বলেন, 'নৈতিকতা তৈরি না হলে শুধু আইন করে কালো টাকা বন্ধ করা যাবে না। এজন্য জনমত গড়ে তুলতে হবে। তবে আমরা অর্থনৈতিক সংস্কারের মাধ্যমে কালো টাকার ফাঁকফোকর বন্ধ করার চেষ্টা করছি।'

তিনি বলেন, 'সবচেয়ে বেশি চুরি হয় সম্পত্তি হস্তান্তরে। কিন্তু দেশের শপিং মলগুলো 'নাম্বার ওয়ান' চুরির বড় জায়গা। জমি-বাড়ি-ফ্ল্যাট হস্তান্তরে তবু তো রেজিস্ট্রেশন লাগে। শপিং মলগুলোর দোকান হস্তান্তরে কিছু লাগে না। আমরা অনুসন্ধান করে দেখেছি, শপিং মলের দোকান হস্তান্তরেও কোন আইন-কানুন মানা হয় না। এতে জালিয়াতি-চিটিং বেশি হচ্ছে।'

অর্থমন্ত্রী বলেন, 'সম্পত্তি হস্তান্তরে কালো টাকা বন্ধে সম্পত্তির ভ্যালু বাস্তবসম্মত হওয়া উচিত, যার উপর সরকার ট্যাক্স নেবে। সম্পত্তির সরকারী ভ্যালু ৬০ লাখ টাকা, আবার বাস্তব মূল্য পাঁচ কোটি টাকা হলে কালো টাকা হবেই হবে। তাই সম্পত্তির সরকারী ভ্যালুও উচ্চ পর্যায়ে নিয়ে যাওয়া উচিত।'

তিনি বলেন, 'কালো টাকা বন্ধ করতে হলে জনমত সৃষ্টি হওয়া উচিত। মানুষ সচেতন হলে কালো টাকা সৃষ্টি অনেকটা কমে আসবে।'



পুজোর আগেই শহরের সবকটি ভাঙাচোরা রাস্তার হাল ফেরানোর আশ্বাস দিলেন পুরমন্ত্রী। বাইপাস থেকে ডায়মন্ডহারবার রোড। যাদবপুর কানেক্টর থেকে বিটি রোড। বর্ষার ভরা মরশুমে শহরের রাস্তার হাল বেহাল। বাকি রাস্তাগুলির মেরামতি কাজ সবে শুরু হয়েছে। মেট্রোর কাজ চলায় রাস্তা সারাইয়ে সমস্যা রয়েছে বেশ কিছু রাস্তায়। সমস্যা কাটিয়ে রাস্তা সারাইয়ের কাজ সেপ্টেম্বরের দ্বিতীয় সপ্তাহে শেষ হবে বলে মন্ত্রীর আশ্বাস।

ত্রিফলা, তেল, কুপনের পর এবার মেডিক্লেম বিতর্কে কলকাতা পুরসভাত্রিফলা, তেল, কুপনের পর এবার মেডিক্লেম বিতর্কে কলকাতা পুরসভা

নয়া বিতর্কে কলকাতা পুরসভা। ত্রিফলা বিতর্ক, তেল বা কুপণ বিতর্কের পর এবার মেডিক্লেমে অনিয়ম। যে পরিমাণ টাকা মেডিক্লেম করা হয়েছে, তার চেয়ে কয়েকগুণ বেশি টাকা চিকিত্‍সা বিমা বাবদ তুলে নেওয়ার অভিযোগ প্রমাণিত পুরসভারই ইন্টারনাল অডিটের রিপোর্টে। প্রাথমিক তদন্তে অভিযুক্তের কাঠগড়ায় পঁচিশ জন পুরকর্মী। একের পর এক বেনিয়ম, দুর্নীতির অভিযোগে জেরবার কলকাতা পুরসভা। এবার বিতর্ক মেডিক্লেম ঘিরে।

সিন্ডিকেটের বকেয়া নিয়ে ফের প্রকাশ্যে তৃণমূলের গোষ্ঠীদ্বন্দ্বসিন্ডিকেটের বকেয়া নিয়ে ফের প্রকাশ্যে তৃণমূলের গোষ্ঠীদ্বন্দ্ব

আবারও সিন্ডিকেটের বকেয়া হিসেব নিয়ে গণ্ডগোল। আর তাতেই ফের প্রকাশ্যে তৃণমূলের গোষ্ঠীদ্বন্দ্ব। অভিযোগ, গোষ্ঠীদ্বন্দ্বের জেরে আক্রান্ত হলেন নিউটাউন যাত্রাগাছির জ্যাংরা হাতিয়ারার পঞ্চায়েত সদস্য প্রহ্লাদ

টিউব রেলের উদাহরণ দিয়ে ইস্ট-ওয়েস্ট মেট্রোর জট কাটাতে নির্দেশ বিচারপতির টিউব রেলের উদাহরণ দিয়ে ইস্ট-ওয়েস্ট মেট্রোর জট কাটাতে নির্দেশ বিচারপতির

ইস্ট ওয়েস্ট মেট্রোর জট কাটাতে বৈঠকে বসার নির্দেশ দিল কলকাতা হাই কোর্ট। নকশা পাল্টে জাংশন স্টেশন এসপ্লানেড না সেন্ট্রাল, তা নিয়েই সব পক্ষকে সিদ্ধান্তে পৌছতে নির্দেশ দিয়েছেন বিচারপতি। বিচারপতির প্রশ্

প্রশাসন থেকে রাজনৈতিক নেতা, সকলকে তুষ্ট রাখতে কোটি কোটি টাকা ছড়িয়েছিলেন সুদীপ্ত সেনপ্রশাসন থেকে রাজনৈতিক নেতা, সকলকে তুষ্ট রাখতে কোটি কোটি টাকা ছড়িয়েছিলেন সুদীপ্ত সেন

সেবি, আরবিআইয়ের মতো নিয়ামক সংস্থার নোটিসকে বুড়ো আঙুল দেখিয়ে বাজার থেকে কোটি কোটি টাকা তুলেছিলেন সারদাকর্তা। প্রশাসন থেকে রাজনৈতিক নেতা, টাকা ছড়িয়ে সকলকেই তুষ্ট রাখতেন সুদীপ্ত সেন। সাধারণ মানুষের

আইনজীবীর দাবি এনসেফ্যালাইটিসে মৃত্যু হয়েছে ১৬৮ জনের, সরকার হিসেব বলছে মাত্র ৯৬আইনজীবীর দাবি এনসেফ্যালাইটিসে মৃত্যু হয়েছে ১৬৮ জনের, সরকার হিসেব বলছে মাত্র ৯৬

এনেফেলাইটিসে মুত্যু কতজনের তা নিয়ে এবার বিভ্রান্তি চরমে। আদালতে হলফনামা জমা দিয়ে সরকারের দাবি, ২৫ দিনে রাজ্যে মৃত্যু হয়েছে ৯৬ জনের। এর মধ্যে ৬ জন ভিন রাজ্যের বাসিন্দা। অন্যদিকে, মামলাকারি আইনজীবীর

শেষ হওয়ার কথা ২০১৫, অথচ এখনও কাজই শুরু হয়নি ইস্ট-ওয়েস্ট মেট্রোর শেষ হওয়ার কথা ২০১৫, অথচ এখনও কাজই শুরু হয়নি ইস্ট-ওয়েস্ট মেট্রোর

প্রকল্প শেষ হওয়ার ডেডলাইন ২০১৫। অথচ ২০১৪র অগাস্টেও পুরোদমে কাজই শুরু হয়নি ইস্ট-ওয়েস্ট মেট্রোয়। কারণ, পদে পদে বাধা আর সংঘাত। এমন চললে প্রকল্পের মৃত্যু ঘটবে বলে আশঙ্কা বিশেষজ্ঞদের। দীর্ঘ চার বছর রাজ্

ইস্টবেঙ্গল কর্তা এখন সিবিআইয়ের জালে, কীভাবে উত্থান ময়দানের নীতুর? ইস্টবেঙ্গল কর্তা এখন সিবিআইয়ের জালে, কীভাবে উত্থান ময়দানের নীতুর?

দেবব্রত সরকার। খাতায় কলমে ইস্টবেঙ্গলের কার্যকরী কমিটির সদস্য। কিন্তু বকলমে তিনিই লাল-হলুদের সর্বময় কর্তা। সত্তরের দশকে পল্টু দাসের হাত ধরে ময়দানে এসেছিলেন। ধীরে ধীরে তিনিই হয়ে ওঠেন ক্লাবের শেষ কথা।

নীতুর পর সারদার নিশানায় এবার সাংসদ ইমরান সহ আরও দুই তৃণমূল সাংসদনীতুর পর সারদার নিশানায় এবার সাংসদ ইমরান সহ আরও দুই তৃণমূল সাংসদ

সারদা মামলার জাল গোটাতে এবার প্রভাবশালীদেরই টার্গেট করছে সিবিআই ও ইডি। নীতুর পর নিশানায় রাজ্যসভার সাংসদ আহমেদ হাসান ইমরান সহ আরও দুই তৃণমূল সাংসদ। গ্রেফতার হতে পারেন সারদা ঘনিষ্ঠ এক প্রাক্তন পুলিস কর্তা।  সিবিআই জেরা করবে শাসকদল ঘনিষ্ঠ এক বুদ্ধিজীবীকেও।    

এবার মোবাইল অ্যাপসের মাধ্যমে মেটান বিদ্যুতের বিলএবার মোবাইল অ্যাপসের মাধ্যমে মেটান বিদ্যুতের বিল

এবার মোবাইল অ্যাপসের মাধ্যমে মেটানো যাবে বিদ্যুতের বিল। সিইএসসি তৈরি করেছে এমনই একটি অ্যাপস যা ডাউনলোড করে বিল মেটানো থেকে নতুন বিদ্যুত সংযোগ, সবকিছুই মোবাইলের মাধ্যমে করতে পারবেন গ্রাহকরা । www.cesc.co.in/cescapps/. এই লিঙ্কে গিয়ে গ্রাহক ডাউনলোড করতে পারবেন অ্যাপসটি। বিলের পরিমাণ, কবে হাতে আসবে বিল এবং গত ছয় মাসে কত বিদ্যুত খরচ হয়েছে গ্রাহক জানতে পারবেন সেই সব তথ্যও ।

আলুর দাম নিয়ে শাসক আর বিরোধীদের টানাপোড়েন চলছেইআলুর দাম নিয়ে শাসক আর বিরোধীদের টানাপোড়েন চলছেই

আলুর দাম নিয়ে শাসক আর বিরোধীদের টানাপোড়েন চলছেই। রাজ্য সরকারের দাবি, আলু সমস্যা মিটেছে। কাজ করছে টাস্ক ফোর্স। অবশ্য সরকারের দাবি উড়িয়ে দিচ্ছেন বিরোধীরা। তাঁদের অভিযোগ, টাস্ক ফোর্স শুধু তৈরি হয়েছে, কাজ করছে না।  

উপনির্বাচনে বাম প্রার্থী- চৌরঙ্গিতে ফৈয়াজ আহমেদ খান, বসিরহাটে মৃণাল চক্রবর্তীউপনির্বাচনে বাম প্রার্থী- চৌরঙ্গিতে ফৈয়াজ আহমেদ খান, বসিরহাটে মৃণাল চক্রবর্তী

আগামী ১৩ সেপ্টেম্বর রাজ্যে দুটি বিধানসভা কেন্দ্রে উপনির্বাচনে প্রার্থীর নাম ঘোষণা করল বামফ্রন্ট। চৌরঙ্গিতে প্রার্থী হচ্ছেন ফৈয়াজ আহমেদ খান এবং বসিরহাট দক্ষিণে মৃণাল চক্রবর্তী। আজ রাজ্য বামফ্রন্টের বৈঠকে এনিয়ে আলোচনার পর নাম চূড়ান্ত করা হয়। ১৬ সেপ্টেম্বর উপনির্বাচনের ফল প্রকাশ হবে।    

তাপস পালের পর নির্মল মাঝি, জ্যান্ত মানুষ দাহের পরামর্শ তৃণমূল বিধায়কের তাপস পালের পর নির্মল মাঝি, জ্যান্ত মানুষ দাহের পরামর্শ তৃণমূল বিধায়কের

এখনও থামেনি তাপস পালের ধর্ষণ নিয়ে মন্তব্যের জেরে বিতর্ক। এর মাঝেই দলীয় সাংসদের পথে হেঁটেই জ্যান্ত মানুষকে পুড়িয়ে ফেলার হুমকি দিলেন এক তৃণমূল বিধায়ক।  

সারদায় সিবিআই- নীতুকে গ্রেফতারির পর এবার আরও ৬ জনের বাড়িতে তল্লাসিসারদায় সিবিআই- নীতুকে গ্রেফতারির পর এবার আরও ৬ জনের বাড়িতে তল্লাসি

ধৃত ইস্টবেঙ্গল কর্তা দেব্রবত সরকার ওরফে নীতু সরাসরি সারদার সঙ্গে যুক্ত ছিলেন। সেবি ও আরবিআইয়ের মতো আর্থিক নিয়ামক সংস্থাগুলির সঙ্গে মধ্যস্থতার জন্য প্রতিমাসে টাকা নিতেন লাল-হলুদ কর্তা। এমনই দাবি সারদা কর্তা সুদীপ্ত সেনের। অন্যদিকে, সারদাকাণ্ডে গতকাল নীতুর গ্রেফতারের পর আজ তাঁর ঘনিষ্ঠ ছজনের বাড়িতে তল্লাসি চালাতে পারে সিবিআই।

ইস্ট ওয়েস্ট মেট্রোর জট কাটাতে ফের বৈঠকের নির্দেশ হাইকোর্টেরইস্ট ওয়েস্ট মেট্রোর জট কাটাতে ফের বৈঠকের নির্দেশ হাইকোর্টের

ইস্ট ওয়েস্ট মেট্রোর জট কাটাতে ফের বৈঠকে বসার নির্দেশ দিল কলকাতা হাই কোর্ট। মহাকরণ স্টেশন ব্র্যাবোর্ন রোডে হবে, নাকি লালদিঘিতে হবে, তা নিয়ে দোটানা শুরু থেকেই। সমাধান চেয়ে কলকাতা হাই কোর্টের দ্বারস্থ হয় নির্মাণকারী সংস্থা।


সুদীপ্ত সেনের থেকে নেওয়া টাকা দুই ফুটবল কর্তার ব্যবসায় বিনিয়োগ করেছিলেন দেবব্রত সরকার

প্রকাশ সিংহ, এবিপি আনন্দ

Friday, 22 August 2014 08:22 PM

submit to reddit

তদন্তে নেমে সিবিআই জানতে পেরেছে, প্রথমে সুদীপ্ত সেনের কাছে একলপ্তে ৩ কোটি এবং পরে মাসিক ৭০ লক্ষ করে টাকা নেন ধৃত ইস্টবেঙ্গল কর্তা দেবব্রত সরকার ওরফে নিতু৷ সুদীপ্ত সেনের দাবি, আরবিআই এবং সেবি-র ঝামেলা মেটানোর নাম করেই এই টাকা নিতেন দেবব্রত৷ কিন্তু, সূত্রের খবর, সেবি-র আধিকারিকদের তরফে টাকা নেওয়ার অভিযোগ অস্বীকার করা হয়েছে৷ পাশাপাশি, শীলবাবু নামে আরবিআই-এর এক কর্তাকে টাকা দিয়েছেন বলে দেবব্রত দাবি করলেও, সেই শীল বাবুও গোয়েন্দাদের কাছে তা অস্বীকার করেছেন৷ এহেন পরিস্থিতিতে কেন্দ্রীয় গোয়েন্দা সংস্থার অনুমান,

সুদীপ্ত সেনের থেকে নেওয়া টাকার সিংহভাগই পকেটে পুরতেন দেবব্রত সরকার৷ হয় তিনি কাউকে টাকা দিতেন না, কিংবা সুদীপ্ত সেনকে যে হিসেব দিতেন, সেই অঙ্কের টাকা দিতেন না৷ হয়তো সেই কারণেই টাকা দিয়েও সেবি এবং আরবিআই-এর কাছ থেকে চিঠি পেতে হত সারদা কর্ণধারকে৷


প্রশ্ন উঠছে, তাহলে এই বিপুল অঙ্কের টাকা গেল কোথায়? উত্তর খুঁজতে আরও গভীরে গিয়ে তদন্ত করে সিবিআই৷ সূত্রের খবর, তদন্তে তারা জানতে পেরেছে,

প্রায় প্রতিমাসে গোয়া যেতেন দেবব্রত সরকার৷ গোয়েন্দাদের অনুমান, নিজের নামে না হলেও, অন্য কাউকে সামনে রেখে গোয়ায় হোটেল ব্যবসায় বিপুল অঙ্কের টাকা লগ্নি করেছেন তিনি৷ শুধু তাই নয়, সিবিআই আরও জানতে পেরেছে, উত্তর কলকাতায় প্লাস্টিকের কারখানাতেও লগ্নি রয়েছে এই ইস্টবেঙ্গল কর্তার৷ সেখানে রয়েছে লক্ষাধিক টাকার কয়েকটি মেশিন৷ এছাড়াও, ময়দানের দুই ফুটবল কর্তার ব্যবসাতেও লগ্নি রয়েছে দেবব্রত সরকারের৷

সিবিআই সূত্রে খবর, প্রয়োজনে ডেকে পাঠানো হতে পারে এই দুই ক্লাব কর্তাকে৷ শুধু মাত্র দেবব্রতই নয়, সারদার টাকার হদিশ পেতে, এই ইস্টবেঙ্গল কর্তার আত্মীয়দের সম্পত্তির তালিকাও তৈরি করছে সিবিআই৷ খতিয়ে দেখা হচ্ছে তাঁদের আয়ের উত্স৷ মিলিয়ে দেখা হচ্ছে আয়ের সঙ্গে সম্পত্তির সঙ্গতি৷ তদন্তকারীদের অনুমান, দেবব্রত হাত হয়ে বিপুল অঙ্কের টাকা পৌঁছেছে প্রভাবশালীদের কাছেও৷ কারা সেই প্রভাবশালী? কত টাকা নিয়েছিলেন তাঁরা? কেনই বা নিয়েছিলেন টাকা? জবাবের খোঁজে শুক্রবার দেবব্রতকে দফায় দফায় জেরা করে সিবিআই৷ প্রথমে একা, তারপর সুদীপ্ত সেনের সঙ্গে মুখোমুখি বসিয়ে জেরা করা হয় তাঁকে৷

http://abpananda.abplive.in/kolkata/2014/08/22/article385468.ece/Saradha-Sudipto-Debabrata#.U_fKlMWSxJk



বেআইনি নির্মানকে বৈধতা দিতে হাইকোর্টের ডিভিশন বেঞ্চে কলকাতা পুরসভাবেআইনি নির্মানকে বৈধতা দিতে হাইকোর্টের ডিভিশন বেঞ্চে কলকাতা পুরসভা

জরিমানা নিয়ে বেআইনি নির্মাণকে বৈধতা দিতে এবার হাইকোর্টের ডিভিশন বেঞ্চের দ্বারস্থ কলকাতা পুরসভা। কয়েকজন গৃহকর্তার করা মামলায় এর আগে হাইকোর্টের সিঙ্গল বেঞ্চ পুরসভার এই নতুন নিয়মের বিরুদ্ধে রায় দিয়েছিল। বিরোধীরাও এর তীব্র প্রতিবাদ জানিয়েছে।

  1. 1

  2. 2

  3. 3

  4. 4

  5. 5

http://abpananda.abplive.in/


নিজস্ব সংবাদদাতা

২৩ অগস্ট, ২০১৪

e e e


রজতকে আজ তলব সিবিআইয়ের

সারদা তদন্তে নেমে এ বার তৃণমূল ঘনিষ্ঠ রজত মজুমদারকে তলব করল সিবিআই। রজতবাবু রাজ্যের প্রাক্তন ডিজি। তিনি তৃণমূলের বীরভূম জেলার পর্যবেক্ষকও ছিলেন। কলকাতার তৃণমূল ভবনেই তিনি বসতেন। আজ, শনিবারই রজতবাবুকে সিবিআই দফতরে যেতে বলা হয়েছে।

নিজস্ব সংবাদদাতা

২৩ অগস্ট, ২০১৪

e e e


লগ্নি সংস্থার অনুষ্ঠানে ভিডিও নিয়ে ফের অস্বস্তিতে বস্ত্রমন্ত্রী

সারদাকে সিমেন্ট কারখানা বেচে আগেই ঝামেলায় জড়িয়েছেন রাজ্যের বস্ত্রমন্ত্রী শ্যামাপ্রসাদ মুখোপাধ্যায়। এনফোর্সমেন্ট ডিরেক্টরটের (ইডি) জিজ্ঞাসাবাদের মুখোমুখিও হতে হয়েছে তাঁকে। মন্ত্রিত্ব থেকে তাঁর অপসারণের দাবিও তুলেছে বিরোধীরা। এই ঘটনার রেশ কাটার আগেই নতুন করে সামনে এসেছে অন্য এক বেসরকারি অর্থলগ্নি সংস্থার বার্ষিক অনুষ্ঠানে বস্ত্রমন্ত্রীর যোগ দেওয়ার ভিডিও ফুটেজ।

রাজদীপ বন্দ্যোপাধ্যায়

২৩ অগস্ট, ২০১৪

e e e


ADVERTISEMENT

রাজ্যে বিজেপি ক্ষমতায় আসবে, প্রত্যয়ী অমিত

পরের বিধানসভা ভোটে তৃণমূলকে হারিয়ে রাজ্যে বিজেপি ক্ষমতায় আসছে বলে দাবি করলেন দলের জাতীয় সভাপতি অমিত শাহ। আনন্দবাজারকে দেওয়া সাক্ষাৎকারে লোকসভা নির্বাচনে দলের 'ম্যান অব দ্য ম্যাচ' বলেন, "৩৪ বছরের সিপিএমের অপশাসনে তিতিবিরক্ত বাংলা তৃণমূলের পক্ষে রায় দিয়েছিল।

জয়ন্ত ঘোষাল

২৩ অগস্ট, ২০১৪

e e e


তাঁর সিঙ্গাপুর সফর আলাদা, বুঝিয়ে দিলেন চন্দ্রশেখর

এক জন বললেন, '১৫ বছর পর বিদেশে পা দিলাম'। অন্য জনের কথায়, 'মাত্র ৮০ দিন আগে আমার রাজ্যের জন্ম হয়েছে। ব্র্যান্ড হায়দরাবাদকে তুলে ধরতে আমাকে এখনই বেরিয়ে পড়তে হল'। এক জন বলছেন, 'আসুন বাংলায় বিনিয়োগ করুন'। অন্য জনের বক্তব্য, 'আপনাদের আসতে হবে না, আমার দফতরের 'স্পেশ্যাল চেজিং সেল' আপনাদের ধাওয়া করবে সব সময়'।

জগন্নাথ চট্টোপাধ্যায়

২৩ অগস্ট, ২০১৪

e e e


ডাক্তারের ভুলে মৃত্যু, ক্ষতিপূরণ এ বার ১৬ লক্ষ

হাসপাতালে অন্তিম শয্যায় রোগিণী একটি চিরকুটে লিখে গিয়েছিলেন, 'ডাক্তার আমাকে দেখেনি। এখানে ফেলে দিয়ে গেছে।' চিকিৎসায় গাফিলতির জেরে ওই রোগিণীর মৃত্যুর ঘটনায় চিকিৎসক ও হাসপাতাল-কর্তৃপক্ষকে ১৬ লক্ষ টাকা ক্ষতিপূরণ দেওয়ার নির্দেশ দিয়েছে কলকাতা ক্রেতা সুরক্ষা আদালত। বুধবার আদালতের রায়ে জানানো হয়েছে, এক মাসের মধ্যে মৃতার পরিবারের হাতে ওই টাকা দিতে হবে। দেরি করলে প্রতিদিন জরিমানা হিসেবে দিতে হবে পাঁচ হাজার টাকা।

অনুপ চট্টোপাধ্যায়

২৩ অগস্ট, ২০১৪

e e e


সিপিএমের সঙ্গ ছেড়ে গেরুয়া পথে পুরনো বন্ধু

পরিচয়ে শিল্পপতি। হাবে-ভাবে বাঙালি। বন্ধু কমিউনিস্ট পার্টির।এমন আশ্চর্য এক ইনিংসের 'বেদনাদায়ক' সমাপ্তি ঘটছে আজ, শনিবারের বারবেলায়! যখন প্রায় দু'দশকের সিপিএম-সঙ্গ ছেড়ে আনুষ্ঠানিক ভাবে বিজেপি-তে যোগ দেবেন শিশির বাজোরিয়া। আলিমুদ্দিন এবং দিল্লির এ কে জি ভবনে অনায়াস যাতায়াতে অভ্যস্ত শিশিরকে আজ সাদরে গেরুয়া শিবিরে বরণ করে নেবেন বিজেপি নেতারা। শিশির যাকে বলছেন, "একটা সফরের শেষ।

সন্দীপন চক্রবর্তী

২৩ অগস্ট, ২০১৪

e e e


সরকারের দাবি নস্যাৎ সরকারেরই পর্যবেক্ষণে

কাগজে-কলমে যা দাবি করা হচ্ছে, বাস্তবের সঙ্গে তা মিলছে না। দুইয়ের মধ্যে বহু যোজনের ফারাক। যা কি না ধরা পড়েছে খোদ দাবিকর্তাদেরই পাঠানো প্রতিনিধিদের নিজস্ব পর্যবেক্ষণে! প্রসঙ্গ সেই এনসেফ্যালাইটিস। পশ্চিমবঙ্গের স্বাস্থ্য দফতর বৃহস্পতিবার হাইকোর্টে হলফনামা দিয়ে জানিয়েছে, রোগ-পরিস্থিতি সম্পর্কে যথাসময়ে স্বাস্থ্যভবনে রিপোর্ট প্রেরণের ক্ষেত্রে গাফিলতি থাকলেও চিকিৎসায় কোনও ত্রুটি হয়নি।

সোমা মুখোপাধ্যায়

২৩ অগস্ট, ২০১৪

e e e


জিনে পরিবর্তন হয়েছে ম্যালেরিয়া জীবাণুর, দাবি

প্লাসমোডিয়াম ফ্যালসিপেরামের আক্রমণ থেকে মুক্তি পাওয়ার জন্য ২০০৯ সালে কেন্দ্রীয় স্বাস্থ্য মন্ত্রক আর্টিমিসিনিন কম্বিনেশন থেরাপি (এসিটি) চালু করেছিল। কিন্তু সেই ওষুধ থেকেও নিজেদের বাঁচানোর রাস্তা খুঁজে নিল ম্যালেরিয়ার জীবাণু। দাবি বিদ্যাসাগর বিশ্ববিদ্যালয়ের শারীরবিদ্যা বিভাগের গবেষকদের।

সুমন ঘোষ

২৩ অগস্ট, ২০১৪

e e e


চার বছরের মেয়েকে খুন করে লুকিয়ে রাখল বাবা

সকাল থেকে খোঁজ মিলছিল না চার বছরের মেয়ের। প্রতিবেশীদের সঙ্গে খুঁজতে বেরিয়েছিল বাবাও। তবে বাবার আচরণে সন্দেহ হয়েছিল পড়শিদের। তাঁরাই তাকে পুলিশের হাতে তুলে দেন। পুলিশি জেরায় ভেঙে পড়ে ওই যুবক স্বীকার করে, নিজেই মেয়েকে খুন করে রেল সেতুর নীচে লুকিয়ে রেখেছে সে।

নিজস্ব সংবাদদাতা

২৩ অগস্ট, ২০১৪

e e e


মায়ের উপর অত্যাচার, বদলা নিতে খুন বাবাকে

মায়ের উপর অমানুষিক অত্যাচার করতেন বাবা। অত্যাচার সহ্য করতে না পেরে বাড়ি ছেড়ে চলে যান মা। এর ক'দিন পরেই দুই বন্ধুকে সঙ্গে নিয়ে বঁটি দিয়ে শ্বাসনালি কেটে বাবা সুরেশ সাহাকে (৪৬) খুন করল তাঁর বড় ছেলে। মায়ের উপর অত্যাচারের বদলা নিতেই সে বাবাকে খুন করেছে, মনে করছে পুলিশ।

নিজস্ব সংবাদদাতা

২৩ অগস্ট, ২০১৪

e e e


'ছোট্ট ধর্ষণেই' হাতছাড়া ডলার, বিতর্কে জেটলি

ধর্ষণ ছোট ঘটনা কেন্দ্রীয় অর্থমন্ত্রীর এই মন্তব্য ঘিরেই আজ দিনভর তোলপাড় হল রাজধানী। বৃহস্পতিবার সব রাজ্যের পর্যটন মন্ত্রীদের সঙ্গে বৈঠকে বসেছিলেন অরুণ জেটলি। সেখানেই তিনি বলে বসেন, "দিল্লিতে একটা ছোট্ট ধর্ষণের কথা দেশে-বিদেশে ফলাও করে ছেপে বেরিয়েছিল।

সংবাদ সংস্থা

২৩ অগস্ট, ২০১৪

e e e


প্রয়াত কন্নড় সাহিত্যিক অনন্তমূর্তি

চলে গেলেন 'সংস্কার'-এর ঔপন্যাসিক কন্নড় সাহিত্যিক উদুপি রাজাগোপালচার্য অনন্তমূর্তি। বয়স হয়েছিল ৮২। বেশ কিছু দিন ধরে অসুস্থ ছিলেন তিনি। বেঙ্গালুরুর মণিপাল হাসপাতালে কিডনির সমস্যা নিয়ে দশ দিন আগে ভর্তি হন। রোজ ডায়ালিসিস চলছিল তাঁর। সেই লড়াই থেমে গেল আজ।

সংবাদ সংস্থা

২৩ অগস্ট, ২০১৪

e e e


মুখ্য অর্থনৈতিক উপদেষ্টা হতে পারেন সুব্রহ্মণ্যম

নরেন্দ্র মোদীর উপরে আস্থা রেখেও তাঁর সরকারের বিভিন্ন অর্থনৈতিক সিদ্ধান্তের কড়া সমালোচনা করতে ছাড়েননি তিনি। কেন্দ্রীয় অর্থমন্ত্রী অরুণ জেটলির প্রথম বাজেটকে 'হতাশাজনক' বলতেও ছাড়েননি। ওয়াশিংটনের পিটারসন ইনস্টিটিউট ফর ইন্টারন্যাশনাল ইকনমিক্স এবং সেন্টার ফর গ্লোবাল ডেভেলপমেন্ট-এর সেই অর্থনীতিবিদ অরবিন্দ সুব্রহ্মণ্যম এ বার অর্থ মন্ত্রকের মুখ্য অর্থনৈতিক উপদেষ্টার দায়িত্ব পেতে চলেছেন বলে খবর।

নিজস্ব সংবাদদাতা

২৩ অগস্ট, ২০১৪

e e e


কোচিং স্টাফ বদল নিয়ে বোর্ডকে কটাক্ষ দ্রাবিড়ের

ঘুরিয়ে ভারতীয় বোর্ডকে একহাত নিলেন রাহুল দ্রাবিড়। ভারতীয় ব্যাটিং কিংবদন্তি বলে দিলেন, ইংল্যান্ডের বিরুদ্ধে ওয়ান ডে সিরিজের আগেই টিমের সাপোর্ট স্টাফ বদলানো সবার জন্যই কঠিন।





সেবি-রহস্যে নীতুই তুরুপের তাস


Google plus share

Facebook share

Twitter share

LinkedIn share


সব্যসাচী সরকার




তদম্তের অভিমুখ ঘোরাল সি বি আই৷‌ ইস্টবেঙ্গল কর্তা দেবব্রত সরকার (নীতু)-কে নিজেদের হেফাজতে নেওয়ার পর এবার নজরে সেবি (সিকিউরিটিজ অ্যান্ড এ'চে? বোর্ড অফ ইন্ডিয়া)৷‌ তৃণমূল সাংসদ আহমেদ হাসান ইমরানকে ডাকল ই ডি৷‌ সারদা গোষ্ঠীর সঙ্গে যোগাযোগ নিয়ে জানবে সি বি আই৷‌ আহমেদ হাসান ইমরান একটি দৈনিক পত্রিকা 'দৈনিক কলম'-এর সম্পাদক৷‌ অভিযোগ, রাজ্যসভার এই তৃণমূল সাংসদ সারদা গোষ্ঠীর কাছ থেকে বিভিন্ন সময়ে সুবিধা নিয়েছেন৷‌ যে-সময় সারদা গোষ্ঠী কয়েকটি সংবাদপত্র খুলেছিল, সে-সময় তাঁর সঙ্গে সারদা-কর্তার কী বিষয়ে যোগাযোগ ছিল, কত টাকা তখন সুদীপ্ত সেন ব্যয় করেছিলেন, তা জানবে ই ডি৷‌ ২০১২ সালের এপ্রিলে তাঁর সম্পাদিত পত্রিকাটি আত্মপ্রকাশ করে৷‌ ইমরানের রাজনৈতিক জীবন নিয়েও বিতর্ক রয়েছে৷‌ তিনি কয়েকটি বেসরকারি স্বেচ্ছাসেবী সংস্হার সঙ্গেও যুক্ত ছিলেন একসময়৷‌ এদিকে, নীতুকে জেরা করে সেবি কীভাবে সারদাকে সুবিধা দিয়েছিল, সেটাই এখন সি বি আইয়ের নজরে৷‌ দেবব্রত সরকারকে বৃহস্পতিবার রাতেই জেরা শুরু করেছে সি বি আই৷‌ কলকাতার এক ধনী চা-ব্যবসায়ী ও তাঁর ছেলে কীভাবে মাসে ২০ লাখ টাকা ঘুষ দিয়ে সেবি-কর্তাদের হাতে রেখেছিলেন, সেজন্য তাঁদের এবার জেরা করবে সি বি আই৷‌ রিজার্ভ ব্যাঙ্ক অফ ইন্ডিয়ার এক কর্তা, যাকে 'শীলবাবু' বলে নীতুবাবুদের ঘনিষ্ঠ মহলে সবাই চেনেন, তিনিই নাকি আইনি দরজা খোলা-বন্ধে গুরুত্বপূর্ণ ভূমিকা নিতেন৷‌ নীতুকে জেরা করে শীলবাবুর সন্ধান পেয়েই হয়ত কিছুটা সূত্র মিলবে, এমনটা আশা সি বি আইয়ের৷‌ নীতু ওই চা-ব্যবসায়ীর অফিসে সারদা-কর্তা সুদীপ্তকে নিয়ে গিয়েছিলেন, এমন তথ্য হাতে এসেছে৷‌ কেন্দ্রীয় গোয়েন্দা সংস্হা সূত্রে খবর, খোদ কলকাতাতেই টাকা পাচারের সমস্ত পরিকল্পনা হয়েছে৷‌ আলিপুর আদালতে সংবাদমাধ্যমের সামনে বৃহস্পতিবারই 'নীতু, নীতু, ও টাকা নিত' বলে বেশ স্পষ্ট ভাষণ দিয়েছেন সুদীপ্ত৷‌ এবার মুখোমুখি বসিয়ে জেরা করে কে ঠিক, কে ভুল তা জানার চেষ্টা করবে সি বি আই৷‌ বৃহস্পতিবারই দিল্লিতে জরুরি বৈঠকে কলকাতার অবসরপ্রাপ্ত এক পুলিসকর্তার সারদা-সখ্য নিয়ে আলোচনা হয়৷‌ সম্প্রতি তাঁর বাড়িতে তল্লাশি চালায় সি বি আই৷‌ সূত্রের খবর, সারদার ব্যবসার বহু কিছুই জানতেন তিনি৷‌ তিনি অবসরপ্রাপ্ত আই পি এস অফিসার হলেও তাঁর পরিচিতদের সহায়তায় সারদার পুলিসি ঝামেলা যাতে না হয়, তা আটকে দিয়েছেন৷‌ আর উত্তর ও দক্ষিণ ২৪ পরগনার ব্যবসার কৌশলও ঠিক করতেন তিনিই৷‌ বস্তুত বাইরে বেতনভুক বলে নিজেকে দেখালেও সারদার বুদ্ধিদাতাদের 'কোর কমিটি'র তিনিই অন্যতম ধন্বম্তরী! এবার তাঁকে গ্রেপ্তারের জন্য ঘুঁটি তৈরি করছে সি বি আই৷‌ ইতিমধ্যেই সারদা-কাণ্ডে বহু জড়িত ব্যক্তির প্রত্যক্ষ প্রমাণ হাতে এসেছে৷‌ ব্যাঙ্ক স্টেটমেন্ট দিয়েই তাঁদের জেরা করতে চায় সি বি আই৷‌ দেবব্রত সরকার সেবি-র কোন কোন অফিসারের সঙ্গে যোগাযোগ রাখতেন, সেটুকুই জানার চেষ্টা সি বি আই৷‌ যে সংস্হাগুলি ভুয়ো, তাদের জন্য সেবি আলাদা কোনও ব্যবস্হা নিয়েছিল কিনা, সেটাই দেখা হবে৷‌ দেবব্রত সরকারের সঙ্গে সুদীপ্ত সেনের আলাপ হয় কার মাধ্যমে? সুদীপ্ত সেন ইস্টবেঙ্গল ক্লাবে গিয়ে ফুটবলের উন্নতি বা খেলোয়াড়দের মান বাড়ানো নিয়ে চর্চা করতেন, এমন কোনও প্রমাণ পায়নি সি বি আই৷‌ তাহলে ইস্টবেঙ্গল কর্তা কী করে বুঝলেন, সেবি-র চিঠি পেয়েছেন সুদীপ্ত সেন৷‌ আর তাঁকে টাকার বিনিময়ে সহায়তা করা দরকার? এই 'মিসিং লিঙ্ক' খুঁজতে গিয়ে কয়েকজন প্রভাবশালীর নাম পাওয়া যাচ্ছে৷‌ ইস্টবেঙ্গল কর্তা সুদীপ্ত সেনের আগেও অন্য কোনও ব্যবসায়ীকে, বা ব্যবসায়ীদের সেবি-হস্তক্ষেপ থেকে বাঁচিয়েছেন কি? সি বি আইয়ের এক কর্তার কথায়, সুদীপ্ত সেন মাঝে মাঝে সত্যি কথা নাকি বলেন! মিডল্যান্ড পার্কে শেষবার তল্লাশি চালিয়ে যে কাগজপত্র মিলেছে, তাতেই সারদা গোষ্ঠীর তালিকাভুক্ত মাসোহারাপ্রাপকদের নাম রয়েছে৷‌ সেখানেই 'শীলবাবু' উজ্জ্বল হয়ে আছেন৷‌ নানা সংক্ষিপ্ত নাম ও পদবির সঙ্গে 'বাবু' বা 'দা' বসিয়ে তাঁদের নামের পাশেই মাসোহারার অঙ্ক লেখা৷‌ সাদা চোখে ওই ফর্দের কোনও মানে নেই৷‌ ভাউচারে সইসাবুদের বিষয় নেই, নামে চেক কেটে তারিখ বা সই বসানো নেই, এমন অনেক চেক মিলেছে৷‌ যখন নগদ, যখন চেক– যেভাবেই হোক তুষ্ট রাখার সহজ রাস্তা নিয়েছিলেন সুদীপ্ত সেন৷‌ যেমন, জেরায় নাকি বলে দিয়েছেন, বাঁকুড়ার সিমেন্ট কারখানার জমি রেজিস্ট্রেশন মাত্র সাড়ে ৬ কাঠা৷‌ বাকিটা দখল৷‌ সাড়ে ৬ কাঠায় সিমেন্ট কেন, মাটির প্রদীপের কারখানাও কী হয়?





গারদে পাশাপাশি বসলেন দু'জনে


Google plus share

Facebook share

Twitter share

LinkedIn share


অগ্নি পান্ডে




এমন মুহূর্তের অপেক্ষায় বোধহয় কেউ ছিলেন না৷‌ প্রকাশ্যে দু'জনে মুখোমুখি হবেন তা ভাবা যায়নি৷‌ আসলে সময়ের কারণে, এক গারদে দেখা হয়ে গেল দু'জনের!


সারদা তদম্তে সি বি আইয়ের হাতে বন্দী ইস্টবেঙ্গল কর্তা দেবব্রত সরকার (নীতু)-কে বৃহস্পতিবার সি বি আই আলিপুরে নিয়ে গিয়েছিল অতিরিক্ত মুখ্য বিচারবিভাগের বিচারপতি হারাধন ব্যানার্জির এজলাসে৷‌ সেখানে সি বি আই আবেদন করেছিল, দেবব্রত সরকার ওরফে নীতুর সি বি আই হেফাজত৷‌ বিচারপতি পাঁচদিনের সি বি আই হেফাজতের অনুমতি দিলেন৷‌ তারপরেই বিচারপতি ব্যানার্জির এজলাসে অন্য একটি মামলায় হাজির সারদা-কর্তা সুদীপ্ত সেন৷‌ তিনি হাতজোড় করে বিচারপতির কাছে অনুরোধ করলেন, 'দয়া করে আমাকে সি বি আই হেফাজতে থাকার অনুমতি দিন৷‌ আমার আরও অনেক কিছু বলার রয়েছে সি বি আই-কে৷‌' সব শুনে অতিরিক্ত মুখ্য বিচারবিভাগের বিচারপতি হারাধন ব্যানার্জি অনুমতি দিলেন সুদীপ্ত সেনকে পাঁচদিন সি বি আই হেফাজতে থাকার৷‌ এজলাসের কাঠগড়া থেকে সুদীপ্ত এগিয়ে গেলেন আদালতকক্ষের নির্দিষ্ট গারদে৷‌ সেই গারদে তখন বসে আছেন দেবব্রত সরকার৷‌ দেখা হতেই দু'জন কুশল সংবাদ জানতে চাইলেন দু'জনের৷‌ নীতু গিয়ে পাশে বসলেন সুদীপ্ত সেনের৷‌ হাতে সিগারেট৷‌ নীতু জানতে চাইলেন আদালত কী বলল সুদীপ্তর আবেদনে৷‌ সুদীপ্ত জানতে চাইলেন নীতুর ক্ষেত্রে আদালতের রায় কী?


সুদীপ্ত সেনের যে বিস্ফোরক চিঠির ভিত্তিতেই সারদা কেলেঙ্কারি তদম্তের অন্য মোড়, সেই চিঠিতে অভিযুক্তের তালিকায় রয়েছেন ইস্টবেঙ্গল কর্তা দেবব্রত সরকার৷‌ সুদীপ্ত সেন গ্রেপ্তার হওয়ার পর এই প্রথম দু'জনে মুখোমুখি নীতু ও সুদীপ্ত৷‌ যা একটা ইঙ্গিতপূর্ণ হয়ে রইল৷‌ এবং সি বি আই সূত্রে জানা গেল, এবার সি বি আই আলাদা করে দু'জনকে জেরা করে আবার আদালতে তুলবে চলতি মাসের ২৬ তারিখে৷‌ তার আগে জেরার কাজটা সেরে নিতে চাইছে সি বি আই৷‌ বৃহস্পতিবার আলিপুরের আদালতের গারদে বসেই নীতু বলে ওঠেন, 'আমি নির্দোষ৷‌ আমাকে চক্রাম্ত করে ফাঁসানো হয়েছে৷‌ এটাই বুঝলেন জীবন৷‌ আমি ক্লাবের জন্য মরে যেতেও রাজি আছি৷‌'


যিনি এই কথাগুলো বললেন, তাঁকে দেখার জন্য আলিপুরের অতিরিক্ত মুখ্য বিচারবিভাগীয় আদালতে তিল ধারণের জায়গা ছিল না৷‌ ইস্টবেঙ্গল কর্তারা তো বটেই, বহু সমর্থক পর্যম্ত এসেছিলেন আদালতের রায় শোনার জন্য৷‌ নীতুর হয়ে অম্তত জনা ১৫ আইনজীবী (যা দেখে সি বি আইয়ের এক অফিসার বলেই ফেললেন, বাবা, নীতুবাবুর জন্য এত আইনজীবীক্কগ্গ আদালতে নীতুর জামিনের আর্জি করার জন্য উপস্হিত ছিলেন৷‌ বাইরে প্রচারমাধ্যমের ঠাসা ভিড়৷‌ বিধাননগরের সি বি আই ক্যাম্পাস থেকে বেলা আড়াইটে নাগাদ দেবব্রত সরকারকে নিয়ে আসা হয় আদালত চত্বরে৷‌ বাইরে প্রচারমাধ্যমের ক্যামেরাম্যানদের সঙ্গে ছবি তোলা নিয়ে রীতিমতো ধস্তাধস্তি৷‌ একজন সি বি আই অফিসার পড়েই গেলেন৷‌ কোনওমতে আদালতের গারদে ঢুকিয়ে দেওয়া হয় নীতুকে৷‌ সি বি আইয়ের আইনজীবী বিচারপতি হারাধন ব্যানার্জির এজলাসে কেন নীতুকে সি বি আই তাদের হেফাজতে চাইছে, তার ব্যাখ্যা দেওয়া যখন শুরু করলেন ঠিক তখন ৩টে ৩৫ মিনিটে আদালতের এজলাসে নিয়ে আসা হয় তাঁকে৷‌ গায়ে হালকা ছাইরঙা জামা৷‌ মুখ থমথমে৷‌ চুপ করে সওয়াল জবাব শুনছিলেন৷‌ তাঁর হয়ে জনা পনেরো আইনজীবী নিজেদের মধ্যে আলোচনা করে বিচারপতিকে জামিনের জন্য আবেদন করছিলেন, তখন নীতুর মুখে হালকা হাসি৷‌ কিন্তু তারপর আবার গম্ভীর হয়ে যান৷‌ সি বি আইয়ের আইনজীবী পার্থসারথি দত্ত আদালতে পরিষ্কার বলেন, 'অভিযুক্ত নিজে ষড়যন্ত্রী৷‌ তাঁকে হেফাজতে দরকার৷‌ তদম্তে আরও অন্য অভিযুক্তদের কথা জানা যাবে৷‌ গ্রেপ্তার হওয়া ব্যক্তি খুব প্রভাবশালী৷‌ তদম্তের স্বার্থে তাঁকে আরও জেরা করা দরকার৷‌' সি বি আইয়ের সিনিয়র তদম্তকারী অফিসার ফণিভূষণ করণ আদালতের বিশাল মোটা কেস ডায়েরি তুলে দেন৷‌ বিচারপতি অনেকক্ষণ ধরে সওয়াল জবাব শুনে দেবব্রত সরকারকে পাঁচ দিনের সি বি আই হেফাজতের নির্দেশ দেন৷‌ ৪টে ৫ মিনিট পর্যম্ত এজলাসে দাঁড়িয়ে থাকার পর নীতুকে আবার আদালতের গারদে নিয়ে যাওয়া হয়৷‌ তিনি নিজের পক্ষে এদিন অবশ্য কিছুই বলতে চাননি৷‌ পরে নীতু কয়েকবার ইস্টবেঙ্গল কর্তাদের সঙ্গে কথা বলেন৷‌ ভাস্কর গাঙ্গুলির স্ত্রী গিয়েছিলেন আদালতে৷‌ তাঁর সঙ্গেও কথা বলেন৷‌ বিকেল ৫টার পর আদালত থেকে সি বি আই অফিসারেরা আলাদা দুটি গাড়িতে দেবব্রত সরকার ও সুদীপ্ত সেনকে নিয়ে খানিক সময়ের বিরতিতে রওনা হয়ে যান বিধাননগরের নিজেদের ডেরায়৷‌ যাওয়ার আগে সি বি আইয়ের এক অফিসার বলে গেলেন, 'এবারই হবে আসল জেরা৷‌ যা আমরা চেয়েছিলাম৷‌'