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Tuesday, May 21, 2013

शीर्षस्थ राजनीतिक हस्तक्षेप से कोलकाता पुलिस की साख खटाई में, मुंबई इंडियंस के मैच में भी घोटाला!

शीर्षस्थ राजनीतिक हस्तक्षेप से कोलकाता पुलिस की साख खटाई में, मुंबई इंडियंस के मैच में भी घोटाला!

एक्सकैलिबर स्टीवेंस विश्वास​


समझा जाता है कि राजनीतिक नेतृत्व के सर्वोच्च स्तर से हस्तक्षेप की वजह से ही विधानगर कमिश्नरेट पुलिस के जांच अधिकारियों से शारदा फर्जीवाड़े का मामला छीन लिया गया है। दूसरी ओर, कोलकाता में आईपीएल बेटिंग और स्पाट फिक्सिंग के मामले में भी राजनीतिक हस्तक्षेप से ही पुलिस अब सक्रिय नहीं हो पायी। कोलकाता में राजस्थान रायल्स ही नहीं, बल्कि मुंबई इंडियन्स के मैच में भी घोटाला होने का शक है दिल्ली पुलिस को ।इसके अलावा स्पाट फिक्सिंग के लेन देन का सबसे बड़े केंद्र बतौर कोलकाता का नाम सामने आया है।मुंबई  से फिल्म कलाकार बिंदू दारासिंह की गिरफ्तारी के बाद बेटिंग और स्पाट फिक्सिंग  के तार अब सीधे फिल्म उद्योग से जुड़ गया है। कोलकाता में आईपीएल मैचों के  फिल्मी कलाकारों का जमघट और फिल्मी दुनियामें आधासे निवेश चिटफंड कंपनियों के होने की वजह से मामला ​​और पेचीदा हो गया है।​ बंगाल में खेल जगत पर चिटफंड कंपनियों के वर्चस्व से, उनके अंडरवर्ल्ड और हवाला कारोबार से जुड़े होने से कोलकाता पुलिस की साख को गहरा धक्का लगा है।इसी बीच केंद्रीय गृहमंत्रालय की ओर से चौदह बूकियों के नाम कोलकाता पुलिस को भेजे गये हैं, जिनका स्पाट फिक्सिंग में सीधा हाथ है।कोलकाता पुलिस को दुर्गापुर, आसनसोल,सिलिगुड़ी और मालदह के बुकियों के नाम भी मालूम हैं। लेकिन अभी उनपर पुलिस की ओर से कार्रवाई शुरु नहीं हो सकी है। इससे ईमानदार पुलिस अफस में तीव्र असंतोष बताया जा रहा है।कोलकाता के शारदा ग्रुप के अकाउंट्स की जांच में जटिल ट्रांजैक्शन स्ट्रक्चर का खुलासा हुआ है। कई ग्रुप कंपनियों के बीच बड़े पैमाने पर ट्रांजैक्शन हुए हैं,पुलिस इस मामले में भी आगे की कार्रवाई पूरी नहीं कर सकी।रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज (आरओसी) की जांच में शारदा रियल्टी, शारदा कंस्ट्रक्शन कंपनी, देवकृपा व्यापार प्राइवेट लिमिटेड, बंगाल मीडिया प्राइवेट लिमिटेड और बंगाल अवधूत एग्रो के बीच 2011-12 में कई तरह के क्रॉस लोन का मामला सामने आया है।


आईपीएल में स्‍पॉट फिक्सिंग मामले में बॉलीवुड से पहला कनेक्‍शन सामने आ ही गया है। बिग बॉस 3 के विजेता और दिवंगत दारा सिंह के पुत्र विंदू दारा सिंह को इस मामले में गिरफ्तार किया गया है। मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच ने सट्टेबाजों से जुड़े होने के आरोप में गिरफ्तार किया है।पुलिस सूत्रों ने बताया कि विंदू दारा सिंह लगातार सट्टेबाजों के संपर्क में थे। क्राइम ब्रांच ने विंदू को गिरफ्तार करने के बाद उनसे पूछताछ भी की।बाद में उन्हें कोर्ट में पेश किया गया और पुलिस ने पांच दिन का रिमांड मांगा है। पुलिस को शक है कि इस मामले में बॉलीवुड के और लोग भी शामिल हो सकते हैं।


दिल्ली और मुंबई पुलिस तो कार्रवाई कर रही है लकिन कोलकाता पुलिस के हाथ बंधे हुए हैं।जबकि स्पाट फिक्सिंग और बेटिंग का सबसे बड़े केंद्र के रुप में कोलकाता का नाम तेजी से उभर रहा है।



राजनीतिक हस्तक्षेप की वजह से ही विधाननगर पुलिस के कब्जे से छूट गये सुदीप्त सेन। विधाननगर कमिश्नरेट की ओर से पुलिस हिफाजत की  मांग नहीं की गयी। हालांकि दक्षिण २४ परगना पुलिस के आवेदन पर जेल हिफाजत से फिर सुदीप्त को पुलिस हिफाजत में भेज दिया गया। लेकिन शारदा समूह मामले में जांच का सिलसिला ही टूट गया। अब सुदीप्त को दक्षिण २४ परगना के किसी थाने के बजाय दक्षिण २४ परगना पुलिस की हिरासत में उत्तर २४ परगना के ही अपेक्षाकृत सुरक्षित ठिकाने न्यू टाउन थाने में रखा गया है, जहां इस मामले की जांच राजनीतिक इच्छा मुताबिक चलायी जा सकें।विधाननगर पुलिस सुदीप्त के परिवार के बारे में पूछताछ कर रही थी और राजनेताओं को दी गयी रकम का ब्यौरा मांग रही थी, इससे बड़े लोगों के लिए खतरा पैदा हो गया था और जांच अधिकारियों को आगे सघन पूछताछ से रोकने के लिए ही विधाननगर कमिश्नरेट से सुदीप्त के सकुशल स्थानांतरण का फैसला है गया।


इसी बीच, दक्षिण २४ परगना पुलिस के आवेदन पर ही सुदीप्त की खसमखास देवयानी को भी पुलिस हिरासत में नये सिरे से भेजा गया है। फिर वही सघन पूछताछ का दौर और रस्म अदायगी। बिना किसी फौजदारी मामला दर्ज किये। देवयानी मुखर्जी के उपचार पर हुए मोटा खर्च कौन भरेगा, परिवार या फिर पुलिस प्रशासन? इसे लेकर विवाद पैदा हो गया है। बीते शनिवार को अस्पताल में पेशी से पहले अस्वस्थ होने की शिकायत बाद देवयानी को एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था।अन्य पांच अभियुक्तों की तरह नहीं, बल्कि देवयानी को पुलिस ने साल्टलेक के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया। वहां उसे अस्पताल के नौ तल्ले पर सुपर डीलक्स केबिन (नंबर-828) में रखा गया था। यह 848 नंबर केबिन उक्त अस्पताल में सबसे सुपीरियर केबिनों में एक है। जहां टेलीविजन, एसी समेत सभी प्रकार की सुविधा है। यहां भर्ती रोगी जब चाहे खान-पान कर सकता है। राजसी इस केबिन का प्रतिदिन का किराया छह हजार रुपये है। डाक्टरों को हर विजीट के लिए 1500 रुपये भुगतान करना पड़ता है। इसके अलावा जांच, मेडिसीन और अन्य खर्च अलग। देवयानी के उपचार पर दो दिनों में 60 हजार रुपये खर्च हुए हैं। अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि सोमवार को पुलिस उसे ले गई और आश्वासन दिया है कि बिल का भुगतान कर दिया जाएगा।


बंगाल में परिवर्तन जमने में दमयंती सेन, नजरुल इस्लाम और पचनंदा जैसे पुलिस अफसरों से हुए सलूक के बाद पुलिस की ओर से अपनी ओर से किसी भी मामले में कार्रवाई करना खतरे से खाली नहीं रह गया है। इसी वजह से सार्वजनिक स्थलों पर बेटिंग के कारोबार में पुलिस की ओर से कोई कार्रवाई नहीं हुई।इस मामले में पुलिस ने सीबीआई में उल्लेखित लोगों से पूछताछ तो नहीं ही की है ौर न ही सुदीप्त के दूसरे सहकर्मियों से । उसके परिजनों का तो अता पता नहीं है। जिस सुंदरी ब्रिगेड की इतनी चर्चा है, वह अभी पुलिस की गिरफ्त से बाहर है। विशेष जांच दल को भी हरी झंडी नहीं मिली है। सुदीप्त सेन से पूछताछ में खुफिया विभाग की पुलिस को कई और अहम जानकारियां हासिल हुई हैं।नेता-मंत्रियों को मोटी रकम देनी पड़ती थी और इसी दबाव के चलते शारदा समूह को वित्तीय समस्या का सामना करना पड़ा। सुदीप्त द्वारा 18 पन्नों का जो पत्र सीबीआई को लिखा गया था, उसमें इन नेता-मंत्रियों का नामों का उल्लेख नहीं है। सुदीप्तो से पूछताछ में पुलिस को यह जानकारी मिली है।सुदीप्त के साथ जम्मू कश्मीर से गिरफ्तार शारदा समूह की निदेशक देवयानी मुखर्जी से पूछताछ में भी पुलिस को कई महत्वपूर्ण जानकारियां प्राप्त हुई हैं। खुफिया विभाग का अनुमान है कि सुदीप्त ने एक मोटी रकम कहीं छिपाकर रखी है। उसके 210 बैंक खातों में से 67 के स्टेटमेंट पुलिस के हाथ लगे हैं। अनुमान है कि शारदा समूह  की विभिन्न शाखाओं से बैंक खातों में समय में पैसा नहीं जमा कराया जाता था।


राजनीतिक नेतृत्व ने इस पूरी अवधि के दौरान यह सुनिश्चित करता रहा कि पुलिस इस सिलसिले में अबियुक्तों को छुये नहीं और न ही देवयानी और सुदीप्त  से जिरह के मुताबिक हासिल तथ्यों के मद्देनजर आगे कोई कार्रवाई करे।


कोलकाता पुलिस के लिए इन दो मामलों के अलावा एक बड़ा खतरा सरदर्द बना हुआ है, जिससे निपटने की उसे राजनीतिक तौर पर मनाही है। वह है, पंचायत चुनावों के मद्देनजर सीमावर्ती इलाकों में आईएसआई की मदद से जमात समर्थक कट्टरपंथी संगठनों की निरंकुश सक्रियता, जो बांग्लादेश में बढ़ती हिंसा और  अस्थिरता के साथ साथ निरंतर संगीन सेसंगीन हुआ जा रहा है। पर वोट बैंक समीकरम के मद्देनजर ऐसे मामलों में कार्रवाई न करने के ही संकेत हैं राजनीतिक नेतृत्व की तरफ से। वैसे भी पंचायत चुनाव में केंद्रीय बलों की मदद न लेने की राज्य सरकार की जिद की वजह से मतदान शांतिपूर्ण कराना राज्य पुलिस के लिए बहुत बड़ी चुनौती में तब्दील हुआ है।तीन चरणों में मतदान के लिए कम से कम १२००कंपनी सुरक्षबल चाहिए यानीकम से कम एक लाख २० हजार जवान।जबकि राज्य पुलिस के पास सिरफ ४५० कंपनी सुरक्षा बल है।दूसरे राज्यों  से अतिरिक्त १५ कंपनी सुरक्षा मिलना अब तक तय हुआ है।


आरओसी ने 23 अप्रैल को मिनिस्ट्री ऑफ कॉरपोरेट अफेयर्स को दाखिल रिपोर्ट में कहा है, 'शारदा कंस्ट्रक्शन को 2011-12 में शारदा रियल्टी से 40 करोड़ रुपए का लॉन्ग टर्म लोन मिला, लेकिन बाद में 30 करोड़ रुपए का कई बार ट्रांजैक्शन हुआ और अंत में यह 10 करोड़ रुपए रह गया।' कंपनी ने इस पैसे का इस्तेमाल कोई एसेट तैयार करने में नहीं किया। इसकी जगह इसने कई दूसरी ग्रुप कंपनियों को लोन दिया और वे कंपनियां किसी बिजनस गतिविधियों में शामिल नहीं थीं।


बचे हुए 10 करोड़ रुपए में से शारदा कंस्ट्रक्शन ने 2.9 करोड़ रुपए का कर्ज अपनी सब्सिडियरी देवकृपा व्यापार को दिया। शारदा कंस्टक्शन ने 3.5 करोड़ रुपए हिस्सेदारी खरीदने में खर्च की। इस कंपनी ने 2.31 करोड़ रुपए का कर्ज बंगाल मीडिया प्राइवेट लिमिटेड को दिया। इसने 36 लाख रुपए का कर्ज एक अन्य ग्रुप कंपनी वेस्ट बंगाल अवधूत एग्रो प्राइवेट लिमिटेड को दिया। इन कंपनियों में देवकृपा व्यापार किसी भी उल्लेखनीय बिजनस ऐक्टिविटी में शामिल नहीं थी। कंपनी का फाइनैंशल स्टेटमेंट कहता है कि इसने टीवी स्टूडियो को बनाने में पैसा खर्च किया, जबकि स्टूडियो अभी भी पूरा नहीं बना है।


शारदा कंस्ट्रक्शन से बंगाल मीडिया प्राइवेट लिमिटेड को कर्ज मिला, लेकिन इसके पास भी कोई बिजनस मॉडल नहीं है। कंपनी का 43 करोड़ रुपए का नेगेटिव नेट वर्थ है और इसने 2011-12 में 14 करोड़ रुपए का लॉस झेला है। इन सब तथ्यों का खुलासा आरओसी की रिपोर्ट में हुआ है।


तीसरी कंपनी वेस्ट बंगाल अवधूत एग्रो प्राइवेट लिमिटेड का मामला भी पूरी तरह संदिग्ध है। रिपोर्ट के अनुसार कंपनी के बुक्स पर भारी-भरकम ऐसेट होने के बावजूद इसने इस्तेमाल के लिए कोई फंड नहीं रखा है। कंपनी के अकाउंट के अनुसार इसके पास 1.78 करोड़ रुपए की जमीन है, बिल्डिंग की वैल्यू 1.35 करोड़ रुपए है। कंपनी के पास 70 लाख रुपए की मशीनरी है, लेकिन इन ऐसेट्स से कंपनी को किसी तरह की आय नहीं हुई है।


आरओसी की हालिया रिपोर्ट शारदा ग्रुप कंपनियों के अकाउंट्स में अनियमितताओं के सामने आने के 10 महीने बाद आई है। आरओसी ने कंपनी के मामलों में जांच के सुझाव दिए हैं। कॉरपोरेट मिनिस्ट्री के एक अधिकारी ने कहा, 'हमने राज्य सरकार को उनके जांच को समझने के लिए लिखा है। हम अभी तक क्या किया है और आगे क्या करने की योजना है, इन सब को राज्य सरकार को समझना चाहिए।'





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