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Partition

Partition of India - refugees displaced by the partition

Thursday, November 12, 2015

जान आफत में तो माफी भी मांग ली गिरीश कर्नाड ने! टीपू विरोधियों के निशाने पर अब ज्ञानपीठ अवार्डी नाटककार और अभिनेता गिरीश कर्नाड हैं।उन्हें जान की धमकी दी गयी और उनने कुलबर्गी, दाभोलकर,हुसैन या पनसरे बनने का विकल्प चुनने के बजाय सीधे माफी मांंग ली। इस सर्वव्यापी केसरिया सुनामी में कोई सृजनधर्मी कलाकार इतना अकेला,इतना असहाय,चक्रव्यूह में इतना निःशस्त्र होगा,हम जैसे तुच्छ प्राणी की समझ में नहीं आ रही है यह बात। पलाश विश्वास

जान आफत में तो माफी भी मांग ली गिरीश कर्नाड ने!

टीपू विरोधियों के निशाने पर अब ज्ञानपीठ अवार्डी नाटककार और अभिनेता गिरीश कर्नाड हैं।उन्हें जान की धमकी दी गयी और उनने कुलबर्गी, दाभोलकर,हुसैन या पनसरे बनने का विकल्प चुनने के बजाय सीधे माफी मांंग ली।


इस सर्वव्यापी केसरिया सुनामी में कोई सृजनधर्मी कलाकार इतना अकेला,इतना असहाय,चक्रव्यूह में इतना निःशस्त्र होगा,हम जैसे तुच्छ प्राणी की समझ में नहीं आ रही है यह बात।


Knock! Knock!Knock!. नी करी दी हालो हमरी निलामी, नी करी दी हालो हमरो हलाल।

https://youtu.be/UiAP7vFfe-c


पलाश विश्वास

हैरतअंगेज है।टीपू सुल्‍तान की जयंती मनाने के कर्नाटक सरकार के फैसले को लेकर जारी विरोध थमने को नाम नहीं ले रहा है। राज्‍य की कांग्रेस सरकार को इस बात का जरा भी अंदाजा नहीं रहा होगा कि उसका यह निर्णय इस कदर विवाद का केंद्रबिंदु बन जाएगा। इस मसले को लेकर राजधानी बेंगलुरू में विरोध प्रदर्शन जारी है।टीपू विरोधियों के निशाने पर अब ज्ञानपीठ अवार्डी नाटककार और अभिनेता गिरीश कर्नाड हैं।उन्हें जान की धमकी दी गयी और उनने कुलबर्गी,दाभोलकर,हुसैन या पनसरे बनने का विकल्प चुनने के बजाय सीधे माफी मांंग ली।


जी हां,टीपू जयंती पर दिए गए विवादित बयान के एक दिन बाद ही वरिष्ठ अभिनेता, लेखक और साहित्यकार गिरीश कर्नाड ने माफी मांग ली है। मंगलवार को गिरीश ने कहा था कि बेंगलुरु इंटरनैशनल एयरपोर्ट का नाम विजयनगर साम्राज्य के शासक रहे केंपेगौड़ा के बजाय टीपू सुल्तान के नाम पर रखा जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा था कि केंपेगौड़ा टीपू की तरह फ्रीडम फाइटर नहीं थे। ज्ञानपीठ पुरस्कार विजेता गिरीश के बेंगलुरु में जेपी नगर स्थित घर से जारी एक बयान में कहा गया है कि उन्होंने जो भी कहा वह उनका व्यक्तिगत विचार था और उन्होंने किसी दुर्भावना के तहत ये बातें नहीं कही थीं।


फिर विवाद बढ़ता देखकर कर्नाड ने 'डैमेज कंट्रोल' की कोशिश की है। उन्‍होंने कहा कि , 'यदि मेरी टिप्‍पणी से कोई आहत हुआ हो तो मैं माफी मांगता हूं।' केमपेगौड़ा विजयनगर साम्राज्य के तहत जागीरदार थे, जिन्होंने 1537 में बेंगलुरू की स्थापना की थी। विहिप नेता बोले, कर्नाड सिद्धारमैया के आदमी विहिप के राज्‍य सचिव बासवराज, कर्नाड के बयान को लेकर सर्वाधिक मुखर हैं। वे टाउन हाल में इस मसले पर हुए विरोध प्रदर्शन का हिस्‍सा रहे हैं। उन्‍होंने कहा, 'केम्‍पेगौड़ा इस शहर के संस्‍थापक थे। हम गिरीश कर्नाड के बयान की आलोचना करते हैं। वे लेखकर नहीं है, केवल मुख्‍यमंत्री सिद्धारमैया के आदमी हैं।'


इस सर्वव्यापी केसरिया सुनामी में कोई सृजनधर्मी कलाकार इतना अकेला,इतना असहाय,चक्रव्यूह में इतना निःशस्त्र होगा,हम जैसे तुच्छ प्राणी की समझ में नहीं आ रही है यह बात।



ऋत्विक घटक ने पुणे फिल्म इंस्टीच्यूट में जिन छात्रों को तैयार किया,अपनी टीम के जनि तकनीशियनों को ग्रूम किया,वे ही बाद में समांतर सिनेमा के चेहरे बने।कुमार साहनी और मणि कौल उदाहरण हैं।1960 में मेघे ढाका तारा,1961 में कोमल गांधार और 1962 में सुवर्णरेखा बनाने वाले ऋत्विक घटक इप्टा के कार्यकर्ता थे,जिन्हें कोमल गांधार के बाद भद्रलोक समाज ने तड़ी पार कर दिया और मरने से पहले 1976 तक उनने कुल आठ फीचर फिल्में बनायीं।


Subarna Rekha,Blasphemy against ideology by Ritwik Ghatak,the Golden Line and the Ati Dalit Bagdi Bou and death of Sita in a brothel! Palash Biswas


Subarnarekha - Bengali Full Movie - Ritwik Ghatak's Film - Abhi Bhattacharya | Madhabi Mukhopadhya

ऋत्विक घटक ने  इंदिरा गांधी के खुल्ला समर्थन के बाद भी सत्ता की मदद लेकर फिल्में नहीं बनायीं।उनकी जुक्ति तक्को गप्पो और तितास एकटि नदी के लिए भारतसे मदद नहीं मिली लेकिन उनने फिल्म बनाने के लिए कोई सौदा या समझौते किये हों,इसके सबूत मिलना मुश्किल है,हमारे पास हैं नहीं,जिनके पास हों साझा करें।

https://youtu.be/PVSAo0CXCQo


KOMAL GANDHAR!Forget not Ritwik Ghatak and his musicality, melodrama,sound design,frames to understand Partition of India!


सिनेमा क्रांति और समांतर सिनेमा के तमामो क्रांतिकारी राज्य या केंद्र सरकार के तमाम निगमों के पैसे से फिल्में बनाते रहे हैं।


सत्यजीत राय की बहुचर्चित फिल्म पथेर पांचाली बंगाल के तत्कालीन मुख्यंत्री विधान चंद्र राय पर बनी।


भारत की खोज से लेकर फिल्म डिवीजन और दरदर्शन के लिए बनी फिल्में और ज्योति बसु पर बनी फिल्म तमाम उदाहरण हैं इस क्राति की।तमाम आदरणियों की क्रांति सत्तापोषित है और सन्नाटा बुनकर अपनी खाल और रोजी रोटी बचाने के सिवाय उनके पास चारा कोई दूसरा नहीं है जैसे दो टुक शब्दों में बड़ी ईमानदारी से कमल हसन ने कह दिया कि यह रोजी,रोटी,धंधे का मामला है।


Is intolerance killing Humanity and Nature all about Nationalism?Never!,Mr Kamal Hassan? 

https://www.youtube.com/watch?v=7OhKSEBJsBc

बंगाल में सिनेमा में हलचल नहीं है कि पिछले तीन साल से शारदा फर्जीवाड़ा के कारण बांग्ला के फिल्मकार पसीने से तरबतर है।गौतम घोष की देखा विवादित चिटफंड कंपनी रोजवैली के पैसे से बनी।चिटफंड और सरकारी पैसे से क्रांति पेलने वाले फिल्मकार की कोई आवाज नहीं हो सकती,हम जानते हैं।


इसीलिए यह भी खूब बूझ रहे हैं कि 36 फिल्मकारों के राष्ट्रीय पुरस्कार वापस कर देने के बावजूत तमाम समांतर क्रांतिधर्मी फिल्मकारों के चेहरों पर सन्नाटा क्यों बुना हुआ है और वे राष्ट्र के विवेक के मुकाबले अखंड निरपेक्षता का मंत्र जाप क्यों कर रहे हैं।


हम शुरु से मानते रहे हैं कि पहल तो हमारे तमाम आदर्शों को करनी चाहिए।लेकिन महश्वेता देवी ने जुबान नहीं खोली और हमारे सबसे प्रिय फिल्मकार श्याम बेनेगल और गिरीश कर्नाड चुप रहे हैं।बेनेगल ने तो सिरे से एवार्ड लौटाने के विरोध में थे,लेकिन अनुपम केर की तरह वे सीधे राजपथ पर केसरिया सुनामी का हिस्सा नहीं बने,गनीमत है।


गिरीश कर्नाड मौनीबाबा बने हुए थे।ये वे गिरीश कर्नाड हैं,जो फिल्म और रंगकर्म के साथ साथ कन्नड़ साहित्य का राष्ट्रीय्ंतरराष्ट्रीय चेहरा हैं और हम सत्तर के दशक से उनकी रोशनी से सराबोर होते रहे हैं।हमें उम्मीद थी वे कभी न कभी बोलेंगे।बाकी लोगों से बी ऐसी उम्मीद थी।


आखिरकार बिहार में नीतीशे कुमार जनमत के बाद वे बोले भी तो अंजाम और और हैरतअंगेज।हमत तो उनको मिली जान की धमकी की निंदा करने के मूड में लिखने चले थे और अपडेट देखा तो यह क्या,कि उनने माफी भी मांग ली।


मीडिया के मुताबिकः

कर्नाटक सरकार ने 10 नवंबर को टीपू सुल्तान की जयंती मनाने का ऐलान क्या किया, उसके बाद बवाल खड़ा हो गया। हिंदूवादी संगठनों के विरोध के बाद शुरू हुआ विवाद अब थमने का नाम नहीं ले रहा है। आज जहां पहले ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित नाटककार और अभिनेता गिरीश कर्नाड को कलबुर्गी की तरह जान से मारने की धमकी मिली, तो वहीं मैसूर-कोडागू से बीजेपी सांसद प्रताप सिम्हा को एक फेसबुक पेज के जरिए जान से मारने की धमकी दी गई।


सांसद ने इसकी शिकायत पुलिस में की है। 'टीपू सुल्तान' के नाम से बने फेसबुक पेज पर प्रताप के लिए धमकी भरा पोस्ट डाला गया, जिसमें सांसद प्रताप सिम्हा की फोटो डालकर कन्नड़ भाषा में लिखा है, 'अगर तुमने ऐंटी मुस्लिम बयान देकर राजनीति करना जारी रखा, तो तुम्हारा भी वही अंजाम (मौत) होगा।'


इस फेसबुक पोस्ट में दो दिन पहले हिंसा में मरे वीएचपी नेता कुटप्पा की फोटो के साथ सांसद प्रताप सिम्हा की फोटो भी लगाई गई है। इस पोस्ट पर सिम्हा ने भी कॉमेंट किया और लिखा कि वीएचपी नेता कुटप्पा की मौत अपने आप नहीं हुई थी, राज्य सरकार मामले की जांच कर रही है।

पोस्ट के टाइटल में लिखा है, 'प्रताप अपना हश्र ऐसा (कुटप्पा जैसा) नहीं चाहते होंगे।' पुलिस कमिश्नर बी. दयानंद ने भी सांसद की ओर से धमकी मिलने की मौखिक शिकायत किए जाने की पुष्टि की है। धमकी के बाद सांसद के घर के आस-पास सुरक्षा बढ़ा दी गई है। सांसद गुरुवार को लिखित कंप्लेंट दर्ज करवा सकते हैं।


वहीं, गिरीश कर्नाड को कलबुर्गी की तरह जान से मारने की धमकी मिली है। कर्नाड को धमकी दी गई है कि उनका भी वही हाल होगा, जो कन्नड़ लेखक एमएम कलबुर्गी का हुआ था। कलबुर्गी की अगस्त में हत्या कर दी गई थी।


किसी अज्ञात चंद्रा नाम के एक व्यक्ति ने ट्वीट कर यह धमकी दी है। हालांकि इस व्यक्ति ने अपना ट्वीट हटा लिया था। धमकी के बाद बुधवार को बेंगलुरु में एक बयान जारी कर कर्नाड ने कहा कि उन्होंने जो भी कहा, वह उनकी निजी राय थी। उन्होंने कहा कि इसके पीछे कोई दुर्भावना नहीं थी। अगर किसी को पीड़ा पहुंचती है तो मैं माफी मांगता हूं।


गिरीश कर्नाड के खिलाफ भाजपाइयों ने बुधवार को कर्नाटक में जगह-जगह प्रदर्शन किया। कर्नाड ने मंगलवार को बेंगलुरु में कहा था कि 18वीं सदी के मैसूर के शासक टीपू सुल्तान अगर हिंदू होते तो उन्हें मराठा शासक छत्रपति शिवाजी के समान दर्जा मिलता।

कर्नाड ने कहा था कि अगर टीपू सुल्तान हिंदू होते तो उनका भी कद मराठा शासक छत्रपति शिवाजी की तरह होता। कर्नाड ने मांग की थी कि बेंगलुरु के इंटरनेशनल एयरपोर्ट का नाम टीपू सुल्तान के नाम पर रखा जाए। फिलहाल इस एयरपोर्ट का नाम विजयनगर के शासक रहे केंपेगौड़ा के नाम पर है। गिरीश कर्नाड ने यह तर्क दिया था कि केंपेगौड़ा टीपू सुल्तान की तरह फ्रीडम फाइटर नहीं थे। केंपेगौड़ा विजयनगर साम्राज्य के तहत जागीरदार थे जिन्होंने 1537 में बेंगलुरु की स्थापना की थी।

  

गौरतलब है कि कर्नाटक सरकार 18वीं सदी में मैसूर के शासक रहे टीपू सुल्तान की 265वीं जयंती मना रही है। भाजपा से जुड़े संगठन आरएसएस-वीएचपी इसका विरोध कर रहे हैं। टीपू को आरएसएस ने सबसे असहिष्णु शासक करार दिया है। विरोध में आरएसएस और तमाम हिंदू संगठन कर्नाटक में प्रदर्शन कर रहे हैं।



एनडीटीवी की यह खबर भी पढ़ लेंः

टीपू सुल्‍तान विवाद: कर्नाड के बयान से विरोधी खफा, मशहूर एक्‍टर ने की माफी की पेशकश


बेंगलुरू: टीपू सुल्‍तान की जयंती मनाने के कर्नाटक सरकार के फैसले को लेकर जारी विरोध थमने को नाम नहीं ले रहा है। राज्‍य की कांग्रेस सरकार को इस बात का जरा भी अंदाजा नहीं रहा होगा कि उसका यह निर्णय इस कदर विवाद का केंद्रबिंदु बन जाएगा। इस मसले को लेकर राजधानी बेंगलुरू में विरोध प्रदर्शन जारी है। टीपू विरोधियों के निशाने पर अब ज्ञानपीठ अवार्डी नाटककार और अभिनेता गिरीश कर्नाड हैं।


एयरपोर्ट के नामकरण संबंधी बयान से नाराज

दरअसल, गिरीश कर्नाड की ओर से की गई टीपू सुल्‍तान की प्रशंसा विरोधियों को रास नहीं आ रही। बेंगलुरू एयरपोर्ट का नामकरण केमपेगौड़ा के बजाय टीपू पर करने का कर्नाड का सुझाव भी दक्षिणपंथियों को पसंद नहीं आ रहा है।  वे कर्नाड के विरोध में उतर आए हैं। हालांकि विवाद को बढ़ता देखकर कर्नाड ने 'डैमेज कंट्रोल' की कोशिश शुरू कर दी है। उन्‍होंने कहा कि , 'यदि मेरी टिप्‍पणी से कोई आहत हु हो तो मैं माफी मांगता हूं। ऐसा करके (बयान देकर) आखिर मुझे क्‍या हासिल होगा।' केमपेगौड़ा विजयनगर साम्राज्य के तहत जागीरदार थे, जिन्होंने 1537 में बेंगलुरू की स्थापना की थी।


विहिप नेता बोले, कर्नाड सिद्धारमैया के आदमी

विहिप के राज्‍य सचिव बासवराज, कर्नाड के बयान को लेकर सर्वाधिक मुखर हैं। वे टाउन हाल में इस मसले पर हुए विरोध प्रदर्शन का हिस्‍सा रहे हैं। उन्‍होंने कहा, 'केम्‍पेगौड़ा इस शहर के संस्‍थापक थे। हम गिरीश कर्नाड के बयान की आलोचना करते हैं। वे लेखकर नहीं है, केवल मुख्‍यमंत्री सिद्धारमैया के आदमी हैं।'


विहिप कार्यकर्ता की मौत से गुस्‍सा भड़का

दरअसल इस मुद्दे पर भाजपा के कोडागु  बंद के दौरान हुए हुए प्रदर्शन में एक विहिप कार्यकर्ता की मौत ने विरोधियों के गुस्‍से को और बढ़ा दिया है। पुलिस का कहना है कि कार्यकर्ता की मौत महज एक हादसा थी और लाठीचार्ज से बचने के लिए भागने के दौरान गिरना इस मौत का कारण था।


भाजपा कर रही सीबीआई या न्‍यायिक जांच की मांग

दूसरी ओर, भाजपा इस मसले पर पुलिस को क्‍लीनचिट देने को तैयार नहीं है। भाजपा नेता और राज्‍य के पूर्व गृह मंत्री आर. अशोक ने एनडीटीवी से कहा, 'सौ फीसदी यह हत्‍या है। उन्‍होंने यह किया है। यह पूरी तरह सामुदायिक झड़प और सरकार की नाकामी थी। सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं थे। यह सोचा-समझा मर्डर है। भाजपा मामले की सीबीआई या न्‍यायिक जांच की मांग कर रही है।'


न्‍यायिक जांच को तैयार नहीं सीएम

हालांकि सीएम सिद्धारमैया ने ऐसी किसी भी जांच से इनकार किया है। उन्‍होंने कहा, 'न्‍यायिक जांच की कोई जरूरत नहीं है। मैं पहले ही मैसूर के रीनजनल कमिश्‍नर को मामले की जांच के आदेश दे चुका हूं। सांप्रदायिक झड़प में मारे जाने वाले किसी भी शख्‍स के परिजनों को पांच लाख रुपए का आदेश है। टीपू सुल्‍तान देशभक्‍त और स्‍वतंत्रता सेनानाी थे। वे धर्मनिरपेक्ष व्‍यक्ति थे। इसलिए हम उनकी जयंती मना रहे हैं।'

http://khabar.ndtv.com/news/india/karnataka-simmers-over-tipu-sultan-row-girish-karnad-offers-apology-1242639



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